ऑलवेदर रोड परियोजना में ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर सिरोहबगड़-बाईपास का निर्माण तीन वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। साथ ही यहां प्रस्तावित तीन मोटर पुलों का कार्य भी कछुआ गति से चल रहा है।
बदरीनाथ हाईवे पर लगभग पांच दशक से सिरोहबगड़ भूस्खलन जोन परेशानी का सबब बना हुआ है। बीआरओ द्वारा यहां पहाड़ी से भूस्खलन रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन बात नहीं बन पाई। 2019 से अलकनंदा नदी के दूसरी तरफ से बाईपास का कार्य शुरू किया गया। लेकिन तीन वर्ष बाद भी कार्यदायी संस्था बाईपास तैयार नहीं कर पाई है। साथ ही बाईपास को बदरीनाथ राजमार्ग से लिंक करने के लिए सिरोहबगड़, भूमरागढ़ और नौगांव में तीन मोटर पुल भी प्रस्तावित हैं। इन पुलों का निर्माण दो वर्ष में पूरा होना था, लेकिन अभी तक सिरोहबगड़ के समीप अलकनंदा नदी पर 180 मीटर स्पान वाले पहले पुल के दो तरफा एबेडमेंट ही बन पाए हैं। वहीं, भुमरागढ़ में प्रस्तावित 250 मीटर स्पान वाले दूसरे पुल के एबेडमेंट की खुदाई भी पूरी नहीं हो पाई। यह, पुल जिले का सबसे लंबा मोटर पुल होगा। जबकि चित्रमति नदी पर प्रस्तावित 162 मीटर स्पान वाले तीसरे पुल के लिए खुदाई जोरों पर है, जिसके लिए पूरी पहाड़ी को भी खोद दिया गया है। खांकरा के पूर्व ग्राम प्रधान नरेंद्र ममगाईं, प्रदीप मलासी, बुद्धि बल्लभ ममगाईं का कहना है कि पपडासू बाईपास के निर्माण में एनएच व कार्यदायी संस्था द्वारा मानकों की अनदेखी की जा रही है। एनएच के सहायक अभियंता अनिल बिष्ट ने बताया कि पूर्व में स्थानीय स्तर पर विवाद के चलते कार्य प्रभावित हुआ है।