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बर्फ से ढके तुंगनाथ पहुंच रहे हैं पर्यटक
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sat, 16 Jan 2016 09:33 PM IST
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बर्फ से लकदक होने के बावजूद तृतीय केदार तुंगनाथ में इन दिनों भी पर्यटक पहुंच रहे हैं। हालांकि दोपहर बाद खराब हो रहे मौसम से खतरे की आशंका बनी है।
बीकेटीसी ने भी मंदिर की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है। समिति ने वन विभाग से तुंगनाथ के लिए पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगाने की मांग की है।
तृतीय केदार तुंगनाथ में राज्य गठन के 16 वर्ष बाद भी यहां जरूरी सुविधाएं नहीं जुट पाई हैं। चोपता से मंदिर तक साढ़े तीन किमी के रास्ते में बिजली, पानी और शौचालय की व्यवस्था नहीं है।
इधर, कपाट बंद होने के बाद भी चोपता व दुगलबिट्टा पहुंच रहे कई पर्यटक तुंगनाथ भी पहुंच रहे हैं। यहां कई फीट बर्फ जमा है।
अधिकांश समय दोपहर बाद बर्फीली हवाओं से कभी भी किसी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है। समिति का कहना है कि तुंगनाथ क्षेत्र मौसम और सुरक्षा की दृष्टि संवेदनशील होने से वन विभाग को चोपता व दुगलबिट्टा से ऊपर पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगानी चाहिए।
कोट-
तुंगनाथ क्षेत्र काफी संवेदनशील है। ऐसे में वन विभाग की ओर से पर्यटकों को चोपता से तुंगनाथ तक जाने की अनुमति देना उचित नहीं है। - प्रकाश पुरोहित, प्रबंधक तुंगनाथ मंदिर, बीकेटीसी
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चोपता से जो भी पर्यटक तुंगनाथ जाता है, वह अपने रिस्क पर जाता है। विभागीय स्तर से उन्हें पहले ही निर्देशित कर दिया जाता है। बावजूद अगर कोई अपनी मर्जी से ऊपरी क्षेत्र में जाना चाहता है, तो हम क्या कर सकते हैं। - शिव लाल, रेंजर केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ऊखीमठ
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बीकेटीसी ने भी मंदिर की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है। समिति ने वन विभाग से तुंगनाथ के लिए पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगाने की मांग की है।
तृतीय केदार तुंगनाथ में राज्य गठन के 16 वर्ष बाद भी यहां जरूरी सुविधाएं नहीं जुट पाई हैं। चोपता से मंदिर तक साढ़े तीन किमी के रास्ते में बिजली, पानी और शौचालय की व्यवस्था नहीं है।
इधर, कपाट बंद होने के बाद भी चोपता व दुगलबिट्टा पहुंच रहे कई पर्यटक तुंगनाथ भी पहुंच रहे हैं। यहां कई फीट बर्फ जमा है।
अधिकांश समय दोपहर बाद बर्फीली हवाओं से कभी भी किसी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है। समिति का कहना है कि तुंगनाथ क्षेत्र मौसम और सुरक्षा की दृष्टि संवेदनशील होने से वन विभाग को चोपता व दुगलबिट्टा से ऊपर पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगानी चाहिए।
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कोट-
तुंगनाथ क्षेत्र काफी संवेदनशील है। ऐसे में वन विभाग की ओर से पर्यटकों को चोपता से तुंगनाथ तक जाने की अनुमति देना उचित नहीं है। - प्रकाश पुरोहित, प्रबंधक तुंगनाथ मंदिर, बीकेटीसी
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चोपता से जो भी पर्यटक तुंगनाथ जाता है, वह अपने रिस्क पर जाता है। विभागीय स्तर से उन्हें पहले ही निर्देशित कर दिया जाता है। बावजूद अगर कोई अपनी मर्जी से ऊपरी क्षेत्र में जाना चाहता है, तो हम क्या कर सकते हैं। - शिव लाल, रेंजर केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ऊखीमठ