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तिग्मांशु धूलिया और अनुराग कश्यप ने बदली कास्टिंग की तस्वीर
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कीर्तिराज रुमाल
रुद्रपुर। हिंदी सिनेमा में पिछले डेढ़ दशक में कास्टिंग डायरेक्टर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। यही वजह है कि अब फिल्मी किरदार पहले से अधिक रियलिस्टिक और आम जीवन के ज्यादा करीब मालूम पड़ते हैं। इस नये सिनेमा के लिए तिग्मांशु धूलिया और अनुराग कश्यप जैसे फिल्म निर्देशकों का योगदान बहुत ज्यादा है।
दो दिवसीय एक्टिंग व ऑडिशन की कार्यशाला के लिए रविवार को रुद्रपुर पहुंचे बॉलीवुड और सावधान इंडिया, क्राइम पेट्रोल जैसे टीवी सीरियल के कास्टिंग डायरेक्टर मनोज रमोला ने अमर उजाला के साथ अपने अनुभव साझा किए। मूल रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिला निवासी रमोला पिछले करीब 10 वर्षों से मुंबई में हैं।
कास्टिंग डायरेक्टर के काम में आ रहे परिवर्तन के बारे में रमोला ने कहते हैं कि पहले कलाकारों को भारी-भरकम मेकअप व विग आदि से नए किरदार में ढाला जाता था लेकिन पिछले डेढ़ दशक में कास्टिंग डायरेक्टर के काम के तरीकों में तेजी से बदलाव आया है। अब किरदार की जरूरत के हिसाब से कलाकारों की तलाश की जाती है। इससे फिल्मों में अति नाटकीयता के कम होने के साथ ही रियलिस्टिक सिनेमा ने जोर पकड़ा है।
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रमोला कहते हैं कि इस बदलाव के लिए तिग्मांशु धूलिया व अनुराग कश्यप जैसे रियलिस्टिक सिनेमा के निर्देशकों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। तिग्मांशु धूलिया ने शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन से बतौर कास्टिंग डायरेक्टर ही कॅरिअर शुरू किया था। इसके बाद वह वर्ष 2001 में प्रदर्शित आसिफ कपाड़िया की फिल्म वॉरियर के कास्टिंग डायरेक्टर रहे।
अपने कलाकारों में ठेठ देसीपन के लिए धूलिया काफी चर्चित हैं। उनकी फिल्म हासिल, पान सिंह तोमर, साहब, बीवी और गैंगस्टर में उनकी कास्टिंग की छाप दिखती है। अनुराग कश्यप की गैंग ऑफ वासेपुर, गुलाल, देव डी आदि फिल्में भी किरदारों के चयन को लेकर काफी चर्चित रहीं।
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रुद्रपुर। हिंदी सिनेमा में पिछले डेढ़ दशक में कास्टिंग डायरेक्टर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। यही वजह है कि अब फिल्मी किरदार पहले से अधिक रियलिस्टिक और आम जीवन के ज्यादा करीब मालूम पड़ते हैं। इस नये सिनेमा के लिए तिग्मांशु धूलिया और अनुराग कश्यप जैसे फिल्म निर्देशकों का योगदान बहुत ज्यादा है।
दो दिवसीय एक्टिंग व ऑडिशन की कार्यशाला के लिए रविवार को रुद्रपुर पहुंचे बॉलीवुड और सावधान इंडिया, क्राइम पेट्रोल जैसे टीवी सीरियल के कास्टिंग डायरेक्टर मनोज रमोला ने अमर उजाला के साथ अपने अनुभव साझा किए। मूल रूप से उत्तराखंड के बागेश्वर जिला निवासी रमोला पिछले करीब 10 वर्षों से मुंबई में हैं।
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कास्टिंग डायरेक्टर के काम में आ रहे परिवर्तन के बारे में रमोला ने कहते हैं कि पहले कलाकारों को भारी-भरकम मेकअप व विग आदि से नए किरदार में ढाला जाता था लेकिन पिछले डेढ़ दशक में कास्टिंग डायरेक्टर के काम के तरीकों में तेजी से बदलाव आया है। अब किरदार की जरूरत के हिसाब से कलाकारों की तलाश की जाती है। इससे फिल्मों में अति नाटकीयता के कम होने के साथ ही रियलिस्टिक सिनेमा ने जोर पकड़ा है।
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रमोला कहते हैं कि इस बदलाव के लिए तिग्मांशु धूलिया व अनुराग कश्यप जैसे रियलिस्टिक सिनेमा के निर्देशकों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। तिग्मांशु धूलिया ने शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन से बतौर कास्टिंग डायरेक्टर ही कॅरिअर शुरू किया था। इसके बाद वह वर्ष 2001 में प्रदर्शित आसिफ कपाड़िया की फिल्म वॉरियर के कास्टिंग डायरेक्टर रहे।
अपने कलाकारों में ठेठ देसीपन के लिए धूलिया काफी चर्चित हैं। उनकी फिल्म हासिल, पान सिंह तोमर, साहब, बीवी और गैंगस्टर में उनकी कास्टिंग की छाप दिखती है। अनुराग कश्यप की गैंग ऑफ वासेपुर, गुलाल, देव डी आदि फिल्में भी किरदारों के चयन को लेकर काफी चर्चित रहीं।