18 वर्ष के उपरांत पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ का अपने बड़े भाई द्वितीय केदार मद्महेश्वर से मिलन हुआ। इस मौके पर पूरा मंदिर क्षेत्र बाबा के जयकारों से गूंज उठा। तृतीय केदार अपनी दिवारा यात्रा के तहत रात्रि प्रवास पर मंदिर में पहुंचे। इस दौरान द्वितीय केदार ने उन्हें पंचगाईं गांवों के भ्रमण की अनुमति देते हुए सोने का छत्र भी सौंपा।
सोमवार को पठाली गांव में मक्कू गांव के हक-हकूकधारी पंच पुरोहितों द्वारा आराध्य बाबा तुंगनाथ की विशेष पूजा-अर्चना कर अभिषेक के साथ भोग लगाकर आरती की। इसके उपरांत डोली ने गांव के घर-घर का भ्रमण करते हुए अपने भक्तों की कुशलक्षेप पूछी। दोपहर को डोली ने गांव से विदा ली और जाखड़ी गांव पहुंची। जहां पर ग्रामीणों ने देवता के दर्शन करते हुए अर्घ्य लगाकर सुख-समृद्धि की मनौति मांगी। इसके बाद डोली रात्रि प्रवास के लिए पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंची। जहां पर उन्होंने अपने बड़े भाई द्वितीय केदार मद्महेश्वर भगवान से भेंट की। इसके बाद द्वितीय केदार ने अपने अनुज तुंगनाथ को पंचगाईं गांव भटवाड़ी, डंगवाड़ी, चुन्नी-मंगोली, किमाणा आदि गांवों के भ्रमण की अनुमति देते हुए सोने का छत्र भी प्रदान किया। मौके पर यात्रा प्रभारी युद्धवीर सिंह पुष्पवाण, ग्राम प्रधान गुड्डी देवी, केशवानंद त्रिवेदी, महेशानंद त्रिवेदी, हरिशंकर, मनवर सिंह रावत, जय प्रकाश पंवार, गुलाब सिंह पंवार, रघुवीर सिंह पंवार, सुरेंद्र सिंह रावत, वचन सिंह रावत, शिशुपाल सिंह राणा, विजेंद्र सिंह राणा आदि मौजूद थे। (संवाद)