{"_id":"6022c1978ebc3e4a14378d16","slug":"there-is-no-migration-from-goundar-village-due-to-lack-of-facilities-rudrapryag-news-drn3703067142","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुविधाएं नहीं होने से गौंडार गांव से हो रहा पलायन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुविधाएं नहीं होने से गौंडार गांव से हो रहा पलायन
विज्ञापन
सुविधाओं का वर्षों इंतजार के बाद अब गौंडार गांव के ग्रामीण भी पलायन को मजबूर हैं। बीते चार वर्षों में सात परिवार अन्यत्र शिफ्ट हो चुके हैं, जबकि गांव में रह रहे 69 परिवार सड़क के अभाव में बुखार की दवा के लिए छह किमी की खड़ी चढ़ाई नापने को मजबूर हैं।
जिले के आखिरी गांव गौंडार को राज्य निर्माण के 20 वर्ष बाद भी मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो पाई हैं। डेढ़ दशक से गांव के लिए स्वीकृत सड़क वन अधिनियम में फंसी है। गांव को आजतक ग्रीड की बिजली से नहीं जोड़ा गया है। उरेडा की लघु जल विद्युत परियोजना प्रत्येक वर्ष बरसात में क्षतिग्रस्त हो जाती है। वयोवृद्ध प्यारी देवी, नंदा देवी, श्यामा देवी, कार्तिक सिंह, आलम सिंह, मुकंदी सिंह, नारायण सिंह, इंद्र सिंह ने बताया कि विकास के इंतजार में उम्र बीत गई है, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई है। प्रधान वीर सिंह पंवार का कहना है कि चार वर्षों में सात परिवार पलायन कर चुके हैं। शासन-प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी सुध नहीं ली जा रही है।
12 किमी पैदल स्कूल जाते हैं छात्र
गौंडार गांव के छात्र-छात्राएं आठवीं के बाद पढ़ाई के लिए घने जंगल के बीच से दो तरफा 12 किमी पैदल दूरी नाप रहे हैं। इन हालातों में अभिभावकों को बच्चों को छोड़ने के लिए आधे रास्ते तक जाना आना पड़ता है। कई अभिभावकों ने बच्चों के लिए ऊखीमठ में किराये का कमरा ले रखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले के आखिरी गांव गौंडार को राज्य निर्माण के 20 वर्ष बाद भी मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो पाई हैं। डेढ़ दशक से गांव के लिए स्वीकृत सड़क वन अधिनियम में फंसी है। गांव को आजतक ग्रीड की बिजली से नहीं जोड़ा गया है। उरेडा की लघु जल विद्युत परियोजना प्रत्येक वर्ष बरसात में क्षतिग्रस्त हो जाती है। वयोवृद्ध प्यारी देवी, नंदा देवी, श्यामा देवी, कार्तिक सिंह, आलम सिंह, मुकंदी सिंह, नारायण सिंह, इंद्र सिंह ने बताया कि विकास के इंतजार में उम्र बीत गई है, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई है। प्रधान वीर सिंह पंवार का कहना है कि चार वर्षों में सात परिवार पलायन कर चुके हैं। शासन-प्रशासन को अवगत कराने के बाद भी सुध नहीं ली जा रही है।
विज्ञापन
12 किमी पैदल स्कूल जाते हैं छात्र
गौंडार गांव के छात्र-छात्राएं आठवीं के बाद पढ़ाई के लिए घने जंगल के बीच से दो तरफा 12 किमी पैदल दूरी नाप रहे हैं। इन हालातों में अभिभावकों को बच्चों को छोड़ने के लिए आधे रास्ते तक जाना आना पड़ता है। कई अभिभावकों ने बच्चों के लिए ऊखीमठ में किराये का कमरा ले रखा है।
विज्ञापन