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तस्करी कर ले जाई जा रही सागौन की लकड़ी पकड़ी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jan 2020 12:48 AM IST
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The one who took care of the guard, he killed the 'scissors'
गूलरभोज में तस्करों से जब्त लकड़ी के साथ वनकर्मी। - फोटो : RUDRAPUR
खटीमा। वन निगम के लकड़ी ढोने वाले वाहन जलौनी लकड़ी के नाम पर बेशकीमती लकड़ी चोरी कर रहे हैं। इसका खुलासा तहसीलदार ने वन निगम परिसर में छापा मारकर किया। चार ट्रैक्टर-ट्रॉलियाें में लकड़ी ले जाते हुए पकड़ा। ट्रैक्टर-ट्रॉलियाें को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया।
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बुधवार को वन निगम के डिपो में तहसीलदार यूसुफ अली पहुंचे। उसी समय कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियाें को लेकर चालक बाहर निकल रहे थे। उनमें डाले तक लकड़ियां लदी थीं। ट्रैक्टर चालकों ने बताया कि यह जलौनी लकड़ी है और निगम की लकड़ी डिपो परिसर में डाल दी है। तहसीलदार ने बताया कि जलौनी लकड़ी के नाम पर ट्रॉलियों में गिल्टे लदे थे। तहसीलदार ने ट्रॉली के नीचे और पहिये के ऊपर भी गिल्टे लदे पाए।
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इसी दौरान कुछ वन व्यवसायी और लोनिवि के ठेकेदार भी पहुंचे और विरोध जताने लगे। तहसीलदार ने पुलिस और वन अधिकारियों को बुलाया। इसके बाद ट्रॉलियां खाली कराई। तहसीलदार ने बताया कि जलौनी के नाम पर वन विभाग को चूना लगाया जा रहा है।
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इस मौके पर एसएसआई देवेंद्र गौरव, रेंजर वीएस बिष्ट, डिपो अधिकारी रमेश चंद्र वालीवाल, वन दरोगा अशोक कुमार गौतम, वन बीट अधिकारी भैरव सिंह बिष्ट, धन सिंह अधिकारी, पीएल कांडपाल आदि थे।
वन विभाग से वन निगम को दी जाने वाली लकड़ी में गोलमाल
खड़क सिंह गैड़ा (संवाद)
खटीमा। वन विभाग से वन निगम को दिए जाने वाले प्रकाष्ठ के मामले में बहुत बड़ा झोल है। वन विभाग और निगम की संयुक्त टीम जंगल में कटने वाले पेड़ों का छपान करती हैं। इन पेड़ों को काटने एवं उसके ढुलान में मानकों को ताख पर रखकर कार्य करने से वन विभाग को प्रतिदिन लाखों का चूना लगाया जाता है।
वन विभाग के सुरई रेंज में इन दिनों वन निगम का कटान चल रहा है। कटे पेड़ों के गिल्टे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से निगम डिपो तक पहुंचाए जा रहे हैं। वाहनों के लोड होते समय वन कर्मचारी नहीं होने और जंगलात के बैरियर पर रवन्ना के अनुसार गिल्टों की जांच नहीं होने से भारी मात्रा में लकड़ी चोरी हो रही है। लेकिन विभाग कर्मियों की कमी बताकर पल्ला झाड़ लेता है।
कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सुबह से शाम तक निगम की लकड़ियां ढोते हैं। एक ट्रॉली में छापे के दौरान जलौनी लकड़ी के नाम पर कई क्विंटल लकड़ी चुराई जाती हैं। इस तरह प्रतिदिन लाखों रुपये की लकड़ी चोरी की जाती है।
कर्मचारियों की कमी के चलते जलौनी लकड़ी के नाम पर बेशकीमती लकड़ी चोरी हो रही है। वाहन लोड करते समय भी चौकसी बरती जानी चाहिए। आगे ऐसा न हो इस पर ध्यान दिया जाएगा। - नितीश मणि त्रिपाठी, प्रभागीय वनाधिकारी तराई पूर्वी वन प्रभाग।
- पकड़े गए वाहनों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की रिपोर्ट डीएलएम को भेजी जाएगी। अब रवन्ने के आधार पर लकड़ी निकलेगी साथ ही कर्मचारियों को सतर्क किया जाएगा। - बाबू लाल, उपप्रभागीय वनाधिकारी।
तस्करी कर ले जाई जा रही सागौन की लकड़ी पकड़ी
गूलरभोज। हरिपुरा जलाशय में नाव से सागौन की लकड़ी तस्करी कर रहे लोगों को पकड़ने गए वन कर्मियों की घेराबंदी देखकर तस्कर लकड़ी को पानी में बहाकर फरार हो गए। वनकर्मियों ने लकड़ी को जब्त करने के साथ ही तीन नामजद सहित पांच अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया है।
पीपलपड़ाव रेंज से लकड़ी की तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। मंगलवार रात को नाव से लकड़ी तस्करी की सूचना पर वन क्षेत्राधिकारी भूपेंद्र कुमार मेहरा ने वन दरोगा मोहन दत्त शर्मा के नेतृत्व में टीम गठित कर मौके पर भेजी। हरिपुरा जलाशय के खजिया सलूस के पास टीम ने एक नाव में कुछ लोग और गिल्टे लदे देखे। वनकर्मियों ने तस्करों को पकड़ने के लिए घेराबंदी की तो आरोपी लकड़ी जलाशय में फेंककर नाव से फरार हो गए। टीम ने पानी से सात गिल्टे बरामद किए।
इधर, बुधवार तड़के टीम ने एक अन्य नाव से सवार होकर बौर जलाशय के एक टापू पर तस्करों की ओर से छोड़े गए सागौन के 11 लठ्ठे और बरामद किए। लकड़ी को जब्त कर गूलरभोज वन चौकी में लाया गया। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि तस्करों ने इस लकड़ी को रेंज के निगल्टिया बीट से काटा है।
तीन तस्करों की पहचान पंकज, सूरज निवासी सेमलचौड़ और जाकिर निवासी ठंडा नाला के रूप में की गई है। तीन नामजदों के अलावा पांच अन्य के खिलाफ वन अधिनियम में केस दर्ज किया गया है। टीम में मोहम्मद ताहिर, संपूर्णानंद, हरीश बिष्ट, पान सिंह गोनिया, अशोक बिष्ट, राजू डोगरा आदि थे।
तस्करों के लिए मुफीद साबित हो रहा पीपलपड़ाव का जंगल
अजय अरोरा (संवाद)
गूलरभोज। पीपल पड़ाव रेंज का जंगल पिछले कुछ समय से लकड़ी तस्करों और खनन माफिया के लिए मुफीद साबित हो रहा है। वन विभाग की सख्ती के बावजूद लकड़ी तस्करी और अवैध खनन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। लकड़ी तस्करों और वन कर्मियों के बीच कई बार भिड़ंत और फायरिंग भी हो चुकी है।
मंगलवार रात को वनकर्मियों की ओर से लकड़ी तस्करी को रोकने की की कार्रवाई कोई पहली कार्रवाई नहीं है। बीते वर्ष पांच मई को लकड़ी तस्करी की सूचना पर वनकर्मियों ने तस्करों की घेराबंदी की थी। वन कर्मी राजेश कुमार की तरफ से हुई फायरिंग में ककराला निवासी रंजीत सिंह की गोली लगने से मौत हो गई थी। 29 जुलाई को पीपल पड़ाव रेंज से सागौन की लकड़ी की तस्करी कर दो बाइकों पर तीन गिल्टे ले जा रहे तस्करों और वन कर्मियों में फायरिंग भी हुई थी।
खुद को घिरता देख तस्कर बाइकें और लकड़ी छोड़कर फरार हो गए थे। इसके बाद 17 अगस्त को पुलिस ने गश्त के दौरान बिना नंबर की बाइक पर खैर के तीन गिल्टे सहित तस्कर को तमंचे के साथ गिरफ्तार किया था। आठ दिसंबर को तस्करी की सूचना पर वन कर्मियों की टीम ने तस्कर समझकर की गई फायरिंग में एक बच्चा भी घायल हो गया था। अब मंगलवार रात को विभाग ने 18 लठ्ठे सागौन के बरामद किए है। इसमें तस्कर फरार होने में सफल रहे।

इसके अलावा पीपलपड़ाव की भाखड़ा नदी में रेत और खोचड़ का खनन भी लगातार जारी है। कई बार की गई कार्रवाई में पकड़ी गई ट्रॉलियों से जुर्माना वसूला जा चुका है। इसके बाद भी लगातार खनन भी जारी है। वन क्षेत्राधिकारी भूपेंद्र कुमार मेहरा ने बताया कि लकड़ी तस्करी और खनन रोकने को विभाग प्रयास कर रहा है। इन सब पर काफी नियंत्रण किया गया है। इसको पूरी तरह से रोकने को विभाग प्रभावी कदम उठाने जा रहा है।

खटीमा के पीलीभीत रोड स्थित वन निगम के डिपो में लकड़ी की जांच करते तहसीलदार युसूफ अली।

खटीमा के पीलीभीत रोड स्थित वन निगम के डिपो में लकड़ी की जांच करते तहसीलदार युसूफ अली।- फोटो : KHATIMA

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