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एसपीओ ने की मनमानी और मिली शिकायतें तो हटेंगे: कुंवर
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दलीप सिंह कुंवर, एसएसपी।
- फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। एसएसपी दलीप सिंह कुंवर ने दो टूक कहा कि अगर एसपीओ ने मनमानी की तो तत्काल हटाया जाएगा। स्पेशल पुलिस अफसर (एसपीओ) बनाने का उद्देश्य कोरोना काल में लोगों की समस्याओं का निराकरण करना था। झूठे मुकदमे में फंसाने का रौब दिखाने और हाथापाई करने का अधिकार किसी को नहीं दिया गया है।
सोमवार को एसएसपी ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान पुलिस कर्मियों की कमी को देखते हुए जिले में एसपीओ नियुक्त किए गए थे। बॉर्डर से आने वाले लोगों की एंट्री से लेकर होम क्वारंटीन करने तक की जिम्मेदारी इन्हीं के हाथों में सौंप दी गई थी। पुलिस कार्यालय में 12 से अधिक एसपीओ को मॉनीटरिंग सेल में शामिल किया गया था।
प्रत्येक गांव और मोहल्लों में 10-10 एसपीओ बनाए गए थे। शुरुआत में सभी एसपीओ ने मेहनत और लगन से काम किया। घर-घर जाकर बाहर से आने वालों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाई। अब कई एसपीओ की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। अवैध वसूली से लेकर मारपीट और गालीगलौच के आरोपों की शिकायत मिल चुकी है।
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एसपीओ को पुलिस के बराबर सम्मान उनके काम के हिसाब से दिया जा रहा है। वर्दी के साथ ही उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रहा जा रहा है। जनता से अभद्रता, मारपीट और अन्य शिकायतें आईं तो एसपीओ को हटा दिया जाएगा। पुलिस खुद अपना काम कर सकती है।
एसपीओ पर कब-कब लगे आरोप
केस-1
बाजपुर में एक एसपीओ ने युवक को कॉल कर चौकी इंचार्ज के लिए शराब की पेटी पहुंचाने को कहा था। शराब की पेटी नहीं पहुंचने पर उसने उसे धमकाया। जांच के दौरान चौकी इंचार्ज के इस मामले में शामिल होने की बात सामने नहीं आई थी। इसके बाद एसपीओ के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
केस-2
खटीमा में एसपीओ ने बाइक सवारों के साथ चेकिंग के दौरान मारपीट कर दी थी। कोरोना काल के दौरान एसपीओ द्वारा की गई मारपीट का मामला काफी चर्चाओं में रहा, लेकिन पुलिस के समझाने के बाद लोग मान गए थे।
केस-3
ट्रांजिट कैंप में एक एसपीओ पर महिला के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था, लेकिन मामला प्रकाश में आने के बाद पुलिस ने उसे तत्काल प्रभाव से हटा दिया। महिला की तहरीर के बाद केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया था।
केस-4
गदरपुर में पांच दिन पहले ही एक एसपीओ ने चेकिंग के दौरान एक युवक से अभद्रता की थी, विरोध करने पर उसने 10 लीटर कच्ची शराब के साथ उसे पकड़ा हुआ दिखाकर थाने ले आया। पुलिस ने मामले की जांच की तो पूरा मामला झूठा निकला। एसपीओ के खिलाफ केस दर्ज किया जा चुका है।
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सोमवार को एसएसपी ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान पुलिस कर्मियों की कमी को देखते हुए जिले में एसपीओ नियुक्त किए गए थे। बॉर्डर से आने वाले लोगों की एंट्री से लेकर होम क्वारंटीन करने तक की जिम्मेदारी इन्हीं के हाथों में सौंप दी गई थी। पुलिस कार्यालय में 12 से अधिक एसपीओ को मॉनीटरिंग सेल में शामिल किया गया था।
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प्रत्येक गांव और मोहल्लों में 10-10 एसपीओ बनाए गए थे। शुरुआत में सभी एसपीओ ने मेहनत और लगन से काम किया। घर-घर जाकर बाहर से आने वालों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाई। अब कई एसपीओ की शिकायतें भी सामने आने लगी हैं। अवैध वसूली से लेकर मारपीट और गालीगलौच के आरोपों की शिकायत मिल चुकी है।
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एसपीओ को पुलिस के बराबर सम्मान उनके काम के हिसाब से दिया जा रहा है। वर्दी के साथ ही उनकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रहा जा रहा है। जनता से अभद्रता, मारपीट और अन्य शिकायतें आईं तो एसपीओ को हटा दिया जाएगा। पुलिस खुद अपना काम कर सकती है।
एसपीओ पर कब-कब लगे आरोप
केस-1
बाजपुर में एक एसपीओ ने युवक को कॉल कर चौकी इंचार्ज के लिए शराब की पेटी पहुंचाने को कहा था। शराब की पेटी नहीं पहुंचने पर उसने उसे धमकाया। जांच के दौरान चौकी इंचार्ज के इस मामले में शामिल होने की बात सामने नहीं आई थी। इसके बाद एसपीओ के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
केस-2
खटीमा में एसपीओ ने बाइक सवारों के साथ चेकिंग के दौरान मारपीट कर दी थी। कोरोना काल के दौरान एसपीओ द्वारा की गई मारपीट का मामला काफी चर्चाओं में रहा, लेकिन पुलिस के समझाने के बाद लोग मान गए थे।
केस-3
ट्रांजिट कैंप में एक एसपीओ पर महिला के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था, लेकिन मामला प्रकाश में आने के बाद पुलिस ने उसे तत्काल प्रभाव से हटा दिया। महिला की तहरीर के बाद केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया था।
केस-4
गदरपुर में पांच दिन पहले ही एक एसपीओ ने चेकिंग के दौरान एक युवक से अभद्रता की थी, विरोध करने पर उसने 10 लीटर कच्ची शराब के साथ उसे पकड़ा हुआ दिखाकर थाने ले आया। पुलिस ने मामले की जांच की तो पूरा मामला झूठा निकला। एसपीओ के खिलाफ केस दर्ज किया जा चुका है।