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बिना डिग्री के प्रवक्ता बन बांट रहे ज्ञान
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बीएड की डिग्री के बिना ही प्रवक्ता पद पर नियुक्ति का मामला सामने आया है। एसआईटी के निर्देश पर प्रमाणपत्रों की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। शिक्षक ने खुद भी इस बात को स्वीकार किया है।
एसआईटी ने जिले में सात शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए विभाग को पत्र भेजा था। प्रवक्ता राजपाल सिरवान को वर्ष 1997 में जखोली ब्लॉक के जनता इंटर कॉलेज देवीधरा-मोलखचौंरी में विद्यालय प्रबंधन समिति के अनुमोदन पर राजनीति विज्ञान विषय में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति दी गई थी। लेकिन, तब उनके पास बीएड की डिग्री नहीं थी। जखोली के खंड शिक्षा अधिकारी ने जब शिक्षक के प्रमाणपत्रों की जांच की तो बीएड की डिग्री नहीं मिली।
बताया जा रहा है कि शिक्षक ने भी यह लिख कर दिया है कि नियुक्ति के समय उन्होंने बीएड नहीं किया था। लेकिन बाद में वर्ष 2005 में उन्होंने चौधरी चरण सिंह विवि से बीएड की डिग्री हासिल की थी। प्रबंधक दर्शन बिष्ट का कहना है कि शिक्षा विभाग मामले में जांच कर रहा है।
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वहीं मुख्य शिक्षाधिकारी सीएन काला ने बताया कि जांच में सामने आया है कि नियुक्ति के समय शिक्षक के पास बीएड की डिग्री नहीं थी। साथ ही अन्य छह शिक्षकों के अभिलेख भी खंगाले जा रहे हैं। गौरतलब है कि जिले में अब तक फर्जी बीएड की डिग्री के मामले में प्राथमिक व जूनियर स्तर पर 22 शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। इसमें से 18 की सेवा समाप्त की जा चुकी है। तीन शिक्षक निलंबित चल रहे हैं और एक की मृत्यु हो चुकी है।
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एसआईटी ने जिले में सात शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए विभाग को पत्र भेजा था। प्रवक्ता राजपाल सिरवान को वर्ष 1997 में जखोली ब्लॉक के जनता इंटर कॉलेज देवीधरा-मोलखचौंरी में विद्यालय प्रबंधन समिति के अनुमोदन पर राजनीति विज्ञान विषय में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति दी गई थी। लेकिन, तब उनके पास बीएड की डिग्री नहीं थी। जखोली के खंड शिक्षा अधिकारी ने जब शिक्षक के प्रमाणपत्रों की जांच की तो बीएड की डिग्री नहीं मिली।
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बताया जा रहा है कि शिक्षक ने भी यह लिख कर दिया है कि नियुक्ति के समय उन्होंने बीएड नहीं किया था। लेकिन बाद में वर्ष 2005 में उन्होंने चौधरी चरण सिंह विवि से बीएड की डिग्री हासिल की थी। प्रबंधक दर्शन बिष्ट का कहना है कि शिक्षा विभाग मामले में जांच कर रहा है।
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वहीं मुख्य शिक्षाधिकारी सीएन काला ने बताया कि जांच में सामने आया है कि नियुक्ति के समय शिक्षक के पास बीएड की डिग्री नहीं थी। साथ ही अन्य छह शिक्षकों के अभिलेख भी खंगाले जा रहे हैं। गौरतलब है कि जिले में अब तक फर्जी बीएड की डिग्री के मामले में प्राथमिक व जूनियर स्तर पर 22 शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। इसमें से 18 की सेवा समाप्त की जा चुकी है। तीन शिक्षक निलंबित चल रहे हैं और एक की मृत्यु हो चुकी है।