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केदारनाथ धाम में शंकराचार्य समाधि का निर्माण होगा पूरा
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केदारनाथ धाम में आपदा से पूर्व आदिगुरू शंकराचार्य का समाधि स्थल। फाइल फोटो
- फोटो : RUDRAPRYAG
केदारनाथ धाम में इस वर्ष आदिगुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल का पुनर्निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। पीएमओ और उत्तराखंड शासन ने इस निर्माण कार्य को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है। वर्ष 2021 से यात्राकाल में श्रद्धालु समाधि के दर्शन कर सकेंगे।
केदारनाथ मंदिर के पीछे बायीं तरफ दिव्य शिला के पास ही आदिगुरु शंकराचार्य की कुटीर (समाधि स्थल) और संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। समाधि का निर्माण भूमिगत होना है, जो जमीन से लगभग छह मीटर की गहराई पर होगा। इसके बाद डिजायन के अनुसार 36 मीटर गोलाकार निर्माण किया जाना है, जिसमें 3 मीटर चौड़ा व 40 मीटर लंबा भूमिगत रास्ता बनाया जाना है, जो समाधि स्थल तक पहुंचेगा। समाधि में प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए जाएंगे। संग्रहालय भी बनेगा, जहां आदिगुरु शंकराचार्य से जुड़ा साहित्य और अन्य वस्तुएं रखी जानी हैं। 16 करोड़ की लागत से होने वाले इस निर्माण कार्य को इस वर्ष पूरा किया जाना है। बता दें कि आदिगुरु शंकराचार्य का समाधि स्थल निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है।
पुराना पैदल मार्ग होगा पुनर्जीवित
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ तक आसान पहुंच के लिए आपदा में ध्वस्त हुए रामबाड़ा-गरूड़चट्टी-केदारनाथ पैदल मार्ग को पुनर्जीवित किया जा रहा है। पहले चरण में केदारनाथ से गरूड़चट्टी से साढ़े तीन किमी रास्ते का निर्माण हो चुका है। दूसरे चरण में रामबाड़ा-गरूड़चट्टी तक भूगर्भीय सर्वेक्षण की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। लोनिवि-डीडीएमए द्वारा भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया की जा रही है। आगामी अप्रैल तक तीन किमी रास्ते का पुनर्निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। रास्ते को मंदिर से लिंक करने के लिए मंदाकिनी नदी पर 60 मीटर स्पान पुल के दोनों एबेडमेंट भी बन चुके हैं। यात्रा से पहले पुल को जोड़ दिया जाएगा।
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केदारनाथ मंदिर के पीछे बायीं तरफ दिव्य शिला के पास ही आदिगुरु शंकराचार्य की कुटीर (समाधि स्थल) और संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। समाधि का निर्माण भूमिगत होना है, जो जमीन से लगभग छह मीटर की गहराई पर होगा। इसके बाद डिजायन के अनुसार 36 मीटर गोलाकार निर्माण किया जाना है, जिसमें 3 मीटर चौड़ा व 40 मीटर लंबा भूमिगत रास्ता बनाया जाना है, जो समाधि स्थल तक पहुंचेगा। समाधि में प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए जाएंगे। संग्रहालय भी बनेगा, जहां आदिगुरु शंकराचार्य से जुड़ा साहित्य और अन्य वस्तुएं रखी जानी हैं। 16 करोड़ की लागत से होने वाले इस निर्माण कार्य को इस वर्ष पूरा किया जाना है। बता दें कि आदिगुरु शंकराचार्य का समाधि स्थल निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है।
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पुराना पैदल मार्ग होगा पुनर्जीवित
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ तक आसान पहुंच के लिए आपदा में ध्वस्त हुए रामबाड़ा-गरूड़चट्टी-केदारनाथ पैदल मार्ग को पुनर्जीवित किया जा रहा है। पहले चरण में केदारनाथ से गरूड़चट्टी से साढ़े तीन किमी रास्ते का निर्माण हो चुका है। दूसरे चरण में रामबाड़ा-गरूड़चट्टी तक भूगर्भीय सर्वेक्षण की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। लोनिवि-डीडीएमए द्वारा भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया की जा रही है। आगामी अप्रैल तक तीन किमी रास्ते का पुनर्निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। रास्ते को मंदिर से लिंक करने के लिए मंदाकिनी नदी पर 60 मीटर स्पान पुल के दोनों एबेडमेंट भी बन चुके हैं। यात्रा से पहले पुल को जोड़ दिया जाएगा।
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