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आत्मनिर्भर दीदियां बना रहीं राखियां

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2020 12:04 AM IST
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Self-reliant Women are making Rakhi
रुद्रपुर के कौशल्या इन्कलेव में पीएम और सीएम को भेजी जाने वाली राखियों के लिफाफे। - फोटो : RUDRAPUR
लॉकडाउन की मार झेल रहे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं जोर-शोर से अपने काम में जुट गई हैं। रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए कई स्वयं सहायता समूहों की तरह बाजपुर की ‘दीदी आजीविका ग्राम संगठन’ से जुड़ी समूह की 110 महिलाएं राखियां तैयार करने में जुटी हैं। महिलाएं रक्षा धागे और मोती की राखियां ग्रामीण इलाकों में डोर-टू-डोर जाकर बेचेंगी। इन राखियों की कीमत दो रुपये से लेकर 30 रुपये तक रखी गई है।
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बाजपुर की दीदी आजीविका ग्राम संगठन से जुड़े 10 समूहों की महिलाएं राखियां बनाने में जुटी हुई हैं। कोरोना काल के चलते बाजार में कच्चा माल महंगा मिलने और कुछ सामान नहीं मिलने से समूह की महिलाओं में थोड़ी दिक्कतें झेलनी पड़ी है। इसके बावजूद महिलाओं ने मोती और रक्षा धागे के अलग-अलग डिजाइन से आकर्षक राखियां तैयार की है।
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दीदी संगठन की अध्यक्ष उमा जोशी ने बताया कि संगठन की महिलाओं ने करीब ढाई हजार राखियां बना ली हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल को देखते हुए संगठन की महिलाओं ने 26 हजार मास्क तैयार करके सरकारी कार्यालयों विकास भवन, जिला पंचायत, आपदा कार्यालय आदि में भेजे थे। एक मास्क की कीमत 15 रुपये रखी गई थी।
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दीपा ने ऐपण राखी बनाकर पीएम और सीएम को भेजी
रुद्रपुर। पहाड़ की लोक संस्कृति को सजोने का कार्य कर रही दीपा मटेला की राखियां प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पहनेंगे। दीपा ने अपने हाथ से भुला, दाज्यू की राखियां बनाकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को रक्षाबंधन के त्यौहार को देखते हुए भेंट स्वरूप डाक से भेजी हैं।
कौशल्या एंक्लेव फेस-2 में रहने वाली ब्यूटी पार्लर संचालिका दीपा मटेला बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही ऐपण कला में रुचि रही है। खाली समय में कार्डबोर्ड, रंग का उपयोग करके ऐपण राखी बनाई थी, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया तो दोस्तों, रिश्तेदारों के फोन आने लगे और राखियां मांगने लगे। बीते पंद्रह दिन में 300 राखियां बनाकर 20 रुपये की दर से सोशल मीडिया के जरिये बेंची हैं।

स्थानीय दुकान से ऑर्डर मिलने के बाद उन्होंने राखी बनानी शुरू की तो पति विक्रम सिंह और उनके दो बच्चे भी मदद करने लगे। कोरोना काल में वह अपनी सोसाइटी में डोर-टू-डोर जाकर ऐपण राखियों को बेचेगी। साथ ही आने वाले त्यौहारों को देखते हुए नई-नई चीजों में ऐपण लुक देगी।

बाजपुर में राखियां तैयार करती स्वयं सहायता समूह की महिलाएं।

बाजपुर में राखियां तैयार करती स्वयं सहायता समूह की महिलाएं।- फोटो : RUDRAPUR

बाजपुर में समूह की महिलाओं द्वारा तैयार की गईं राखियां।

बाजपुर में समूह की महिलाओं द्वारा तैयार की गईं राखियां।- फोटो : RUDRAPUR

रुद्रपुर के कौशल्या इन्कलेव में राखी बनाती दीपा।

रुद्रपुर के कौशल्या इन्कलेव में राखी बनाती दीपा।- फोटो : RUDRAPUR

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