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सड़क नहीं: रिश्तों में भी आ रही अड़चन
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Sat, 26 Mar 2016 09:34 PM IST
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सड़क के अभाव में गांव के बेटों के तो दूर बेटियों के रिश्तों में भी रोड़ा अटक रहा है। लोग हमसे रिश्तेदारी जोड़ने से भी हिचक रहे हैं। कारण त्रियुजीनारायण से जंगल के बीच से आठ किमी के पैदल रास्ते को तय कर गांव पहुंचना है। ये शब्द जिले के दूरस्थ तोषी गांव के रणजीत सिंह के हैं।
देश-दुनिया चांद और मंगल पर पहुंच चुकी है, लेकिन रुद्रप्रयाग जिले के तोषी गांव के 40 परिवार आज भी सड़क से वंचित हैं। जरूरी सुविधाओं के अभाव में ये ग्रामीण आदिकाल में जीने को विवश हैं। चीनी, नमक, दाल और बच्चों को 9वीं की पढ़ाई के लिए उन्हें प्रतिदिन एकतरफा आठ किमी पैदल त्रियुजीनारायण पहुंचना होता है। वहीं बुखार की दवा के लिए 32 किमी दूर एलोपैथिक केंद्र फाटा की दौड़ लगानी होती है।
जिला मुख्यालय 92 किमी (84 किमी सड़क व 8 किमी पैदल) दूर तोषी गांव सेंचुरी एरिया में बसा है। गांव के ग्रामीणों को जहां चारापत्ती वन विभाग से पूछकर जुटानी पड़ती है। बीमार व गर्भवती महिला को डंडी से लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। ग्राम प्रधान शशि देवी का कहना है कि त्रियुगीनारायण से राशन व अन्य जरूरी वस्तुओं का एक तरफा भाड़ा चार सौ रुपये से अधिक देना पड़ता है। डेढ़ दशक में गांव के 15 परिवार पलायन कर चुके हैं। कहती हैं, गांव को सड़क से जोड़ने के लिए एक दशक पहले प्रस्ताव तैयार किया गया था। बावजूद इसके अब तक उस पर अमल नहीं हो पाया है। उप प्रधान नागेंद्र सिंह, जगत सिंह, मदन मोहन, भगत सिंह आदि का कहना है कि उत्तराखंड राज्य जिन परिकल्पनाओं को लेकर बनाया गया था, वे उन्हें आज तक नहीं मिल पाई हैं। सरकार अगर उन्हें सड़क नहीं दे सकती,तो अन्यत्र विस्थापन कर दें।
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सेंचुरी एरिया के गांवों को बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वनाधिकार 2006 लागू किया गया है। इस अधिनियम के आधार पर तोषी सहित अन्य सेंचुरी ऐरिया के गांवों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। - डा. राघव लंगर, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
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देश-दुनिया चांद और मंगल पर पहुंच चुकी है, लेकिन रुद्रप्रयाग जिले के तोषी गांव के 40 परिवार आज भी सड़क से वंचित हैं। जरूरी सुविधाओं के अभाव में ये ग्रामीण आदिकाल में जीने को विवश हैं। चीनी, नमक, दाल और बच्चों को 9वीं की पढ़ाई के लिए उन्हें प्रतिदिन एकतरफा आठ किमी पैदल त्रियुजीनारायण पहुंचना होता है। वहीं बुखार की दवा के लिए 32 किमी दूर एलोपैथिक केंद्र फाटा की दौड़ लगानी होती है।
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जिला मुख्यालय 92 किमी (84 किमी सड़क व 8 किमी पैदल) दूर तोषी गांव सेंचुरी एरिया में बसा है। गांव के ग्रामीणों को जहां चारापत्ती वन विभाग से पूछकर जुटानी पड़ती है। बीमार व गर्भवती महिला को डंडी से लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। ग्राम प्रधान शशि देवी का कहना है कि त्रियुगीनारायण से राशन व अन्य जरूरी वस्तुओं का एक तरफा भाड़ा चार सौ रुपये से अधिक देना पड़ता है। डेढ़ दशक में गांव के 15 परिवार पलायन कर चुके हैं। कहती हैं, गांव को सड़क से जोड़ने के लिए एक दशक पहले प्रस्ताव तैयार किया गया था। बावजूद इसके अब तक उस पर अमल नहीं हो पाया है। उप प्रधान नागेंद्र सिंह, जगत सिंह, मदन मोहन, भगत सिंह आदि का कहना है कि उत्तराखंड राज्य जिन परिकल्पनाओं को लेकर बनाया गया था, वे उन्हें आज तक नहीं मिल पाई हैं। सरकार अगर उन्हें सड़क नहीं दे सकती,तो अन्यत्र विस्थापन कर दें।
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सेंचुरी एरिया के गांवों को बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वनाधिकार 2006 लागू किया गया है। इस अधिनियम के आधार पर तोषी सहित अन्य सेंचुरी ऐरिया के गांवों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। - डा. राघव लंगर, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग