जिला मुख्यालय से लगे पुनाड़ में आयोजित पांडव नृत्य के 24वें दिन पांडवों ने अस्त्र-शस्त्रों के साथ गंगा स्नान किया। इस मौके पर उन्होंने अपने पितृों को याद करते हुए उन्हें तर्पण भी दिए। कल पुनाड़ में पांडव नृत्य का समापन होगा।
शुक्रवार को सुबह ढोल-दमाऊं और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पांडव पश्वा, पुजारी व भक्तगण संगम पर पहुंचे। जहां पर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र व देवी निषाणों का पूजा करते हुए उन्हें गंगा स्नान कराया। साथ ही स्वयं भी डुबकी लगाई। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के बाद उन्होंने अपने पित्रों का पूजन करते हुए तर्पण किया। इसके उपरांत पांडव पश्वा, पुनाड गांव स्थित पांडव चौक में पहुंचे। जहां पंडवाणी गायन में उन्होंने नृत्य किया। इससे पूर्व बीते बृहस्पतिवार रात्रि को पांडव नृत्य के तहत गैंडा कौथिग का आयोजन किया गया। शनिवार रात हाथी सूंड कौथिग का आयोजन होगा। जबकि 22 दिसंबर को प्रसाद वितरण के साथ 26 दिवसीय पांडव लीला का मंचन संपन्न हो जाएगा। इस मौके पर पुजारी कमलेश्वर प्रसाद सेमवाल, दिनेश चंद्र सेमवाल, सुरेंद्र बिष्ट, विजय कप्रवाण, एमसी डियूंडी, प्रकाश भारती समेत अन्य कई लोग मौजूद थे।