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जान हथेली पर रखकर जा रहे हैं कालीमठ दर्शन को

Thu, 14 Apr 2016 10:04 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Thu, 14 Apr 2016 10:04 PM IST
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 Niagara are placing philosophy Kalimath
kalimath bridage - फोटो : amarujala

चैत्र नवरात्र के मौके पर मां महाकाली, मां सरस्वती और मां महालक्ष्मी के शक्तिपीठ कालीमठ के दर्शनों को भक्तों को जान हथेली पर रखकर पहुंचना पड़ रहा है। कारण, आपदा में सरस्वती नदी पर बहे झूला पुल का निर्माण अब तक नहीं हो पाया है। ऐसे में श्रद्धालुओं को लकड़ी के फट्टों के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है।

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सरस्वती नदी के दोनों तरफ बसा कालीमठ गांव आपदा के बाद से अनदेखी का दंश झेल रहा है। ग्रामीण श्रमदान से नदी पर बनाए गए लकड़ी के फट्टों के पुल से आवाजाही को मजबूर हैं। ग्लेशियर पिघलने से नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। स्थायी झूला पुल का निर्माण एबडेमेंट से लेकर फ्रेम तक सिमटा है। इन हालात में नवरात्र में देवी मां के दर्शनों को श्रद्धालु कम पहुंच रहे हैं। कई लोग तो, हालातों को देखकर सड़क से ही लौट रहे हैं।
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कालीमठ मंदिर के मठापति अव्वल सिंह का कहना है कि आपदा के बाद से स्थितियां जस की तस हैं। सरस्वती नदी पर पुल का निर्माण कछुवा गति से होने से लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीण मोहन सिंह, हरि सिंह, जय सिंह आदि का का कहना है कि शासन को अवगत कराने पर भी सुध नहीं ली जा रही है।
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केदारनाथ आपदा को तीन माह होने को हैं। बावजूद इसके कालीमठ में हालात जस के तस हैं। मंदिर पहुंच मार्ग से लेकर पुल का निर्माण नहीं होने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मंदिर में भी गिनती के लोग पहुंच रहे हैं। अगर जून तक पुल निर्माण व अन्य संसाधन मुहैया नहीं कराए गए तो आंदोलन किया जाएगा। - गीता राणा, ग्राम प्रधान

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