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बाल विकास परियोजना में न भवन न अधिकारी, कैसे संवरेगा बचपन
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ब्लॉक मुख्यालय में बाल विकास परियोजना भगवान भरोसे है। परियोजना का कार्यालय जहां खंडहर स्कूल में चल रहा है, वहीं कार्यालय में छह पदों के सापेक्ष पांच रिक्त चल रहा है। ब्लॉक में 155 आंगनबाड़ी केंद्रों में से सिर्फ 38 के पास ही अपने भवन हैं।
वर्ष 2018 में ब्लॉक मुख्यालय के गांधीनगर में वर्षों पूर्व बंद हो चुके स्कूल भवन पर बाल विकास परियोजना कार्यालय शुरू किया गया। तीन कमरों वाले खंडहर हो रहे भवन का सिर्फ एक कमरा ही ठीक है। हल्की बारिश में ही छत टपकने लगती है। परिसर में जगह नहीं होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सेविकाओं की मासिक बैठक भी नहीं हो पाती है। दूसरी तरफ बाल विकास परियोजना में ब्लॉकस्तर पर सुपरवाइजर के छह पदों के सापेक्ष पांच पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जो एक सुपरवाइजर कार्यरत हैं, वह भी चिकित्सकीय अवकाश पर चल रही है।
छह माह से नहीं मिला मानदेय
बाल विकास परियोजना के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत कार्यकर्ता व सेविकाओं को छह माह से मानदेय नहीं मिल पाया है। आंगनबाड़ी, सेविका संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष प्रेमा बर्त्वाल, रोशनी नौटियाल, सीमा देवी, शर्मिला देवी आदि का कहना है कि बीते वर्ष सितंबर से उन्हें मानदेय नहीं मिल पाया है।
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ऊखीमठ में बाल विकास परियोजना कार्यालय के लिए अन्यत्र भवन की तलाश की जा रही है। साथ ही यहां सुपरवाइजर के पांच पद खाली है, जिसके बारे में आला अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है। मानदेय के मामले में निदेशालय स्तर से ही कुछ तकनीक खामियां चल रही हैं, जिन्हें दूर करने के लिए ब्लॉक स्तर पर जानकारियां एकत्रित की जा रही है। - शैली प्रजापति, जिला कार्यक्रम अधिकारी रुद्रप्रयाग।
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वर्ष 2018 में ब्लॉक मुख्यालय के गांधीनगर में वर्षों पूर्व बंद हो चुके स्कूल भवन पर बाल विकास परियोजना कार्यालय शुरू किया गया। तीन कमरों वाले खंडहर हो रहे भवन का सिर्फ एक कमरा ही ठीक है। हल्की बारिश में ही छत टपकने लगती है। परिसर में जगह नहीं होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सेविकाओं की मासिक बैठक भी नहीं हो पाती है। दूसरी तरफ बाल विकास परियोजना में ब्लॉकस्तर पर सुपरवाइजर के छह पदों के सापेक्ष पांच पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जो एक सुपरवाइजर कार्यरत हैं, वह भी चिकित्सकीय अवकाश पर चल रही है।
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छह माह से नहीं मिला मानदेय
बाल विकास परियोजना के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत कार्यकर्ता व सेविकाओं को छह माह से मानदेय नहीं मिल पाया है। आंगनबाड़ी, सेविका संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष प्रेमा बर्त्वाल, रोशनी नौटियाल, सीमा देवी, शर्मिला देवी आदि का कहना है कि बीते वर्ष सितंबर से उन्हें मानदेय नहीं मिल पाया है।
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ऊखीमठ में बाल विकास परियोजना कार्यालय के लिए अन्यत्र भवन की तलाश की जा रही है। साथ ही यहां सुपरवाइजर के पांच पद खाली है, जिसके बारे में आला अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है। मानदेय के मामले में निदेशालय स्तर से ही कुछ तकनीक खामियां चल रही हैं, जिन्हें दूर करने के लिए ब्लॉक स्तर पर जानकारियां एकत्रित की जा रही है। - शैली प्रजापति, जिला कार्यक्रम अधिकारी रुद्रप्रयाग।