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मलबे से प्राकृतिक स्रोत नष्ट, गांव को भी खतरा
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अगस्त्यमुनि ब्लाक के ग्राम पंचायत खांकरा के अंतर्गत रामपुर गांव के ग्रामीणों ने बैठक कर नवनिर्माण खांकरा-पौडीखाल मोटर मार्ग के मलबे से हुए नुकसान पर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि मलबे से उनके प्राकृतिक स्रोत नष्ट हो गए हैं, जबकि गांव को भी खतरा पैदा हो गया है।
गांव में हुई बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि लोक निर्माण विभाग की निर्माणाधीन सड़क के मलबे से उनके रामपुर व सैण स्थित पारंपरिक स्रोत से नष्ट हो गए हैं। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद सड़क का मलबा ग्रामीणों के प्राकृतिक स्रोतों के ऊपर डाला गया। स्रोत नष्ट होने से ग्रामीणों के सम्मुख पीने का पानी का संकट खड़ा हो गया है। सरकार एक ओर जहां घर-घर पानी पहुंचाने की बात कर रही है, लेकिन दूसरी ओर ग्रामीणों के पानी को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आलम यह है कि ग्रामीण पानी के लिए एक किमी दूर चित्रमति गदेरे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क का मलबा गदेरे में डालने से गदेरा मिट्टी से भर गया है। आलम यह है कि बरसात के समय उनकी खेती को भी नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में पूर्व में जिलाधिकारी को अवगत कराया गया, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस मौके पर रामकृष्ण रतूडी, राजेंद्र प्रसाद, सुभाष चंद्र, रघुवीर सिंह, बबीता देवी, सरिता देवी, कमला देवी, किशोरी देवी, कलम सिंह, प्रेम लाल समेत भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
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गांव में हुई बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि लोक निर्माण विभाग की निर्माणाधीन सड़क के मलबे से उनके रामपुर व सैण स्थित पारंपरिक स्रोत से नष्ट हो गए हैं। ग्रामीणों के विरोध के बावजूद सड़क का मलबा ग्रामीणों के प्राकृतिक स्रोतों के ऊपर डाला गया। स्रोत नष्ट होने से ग्रामीणों के सम्मुख पीने का पानी का संकट खड़ा हो गया है। सरकार एक ओर जहां घर-घर पानी पहुंचाने की बात कर रही है, लेकिन दूसरी ओर ग्रामीणों के पानी को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आलम यह है कि ग्रामीण पानी के लिए एक किमी दूर चित्रमति गदेरे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क का मलबा गदेरे में डालने से गदेरा मिट्टी से भर गया है। आलम यह है कि बरसात के समय उनकी खेती को भी नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में पूर्व में जिलाधिकारी को अवगत कराया गया, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस मौके पर रामकृष्ण रतूडी, राजेंद्र प्रसाद, सुभाष चंद्र, रघुवीर सिंह, बबीता देवी, सरिता देवी, कमला देवी, किशोरी देवी, कलम सिंह, प्रेम लाल समेत भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
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