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पहले रेत से पटे रहे अब जलमग्न हो गए नमामि गंगे के घाट
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रुद्रप्रयाग। नमामि गंगे परियोजना जिले में खानापूर्ति साबित होकर रह गई है। अलकनंदा व मंदाकिनी नदी किनारे करोड़ों की लागत से बने घाट आठ माह से रेत से पटे रहे और अब जलमग्न हो गए हैं। लोगों का कहना है कि घाटों का निर्माण नदियों के बहाव तल से ऊपर बनाया जाना चाहिए था। निर्माण के नाम पर धन की बर्बादी की गई है।
केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना के तहत रुद्रप्रयाग नगर में मंदाकिनी व अलकनंदा नदी पर पांच घाट बनाए गए हैं। कोटेश्वर व घोलतीर में भी अलकनंदा नदी किनारे घाट बनाए गए हैं, लेकिन निर्माण के बाद से इन घाटों का रखरखाव नहीं किया गया। घाटों का निर्माण नदी के तल से किया गया है, जिससे जलस्तर बढ़ते ही घाट जलमग्न हो जाते हैं। मंदाकिनी नदी पर बना घाट पिछले वर्ष सितंबर से इस जून तक रेत और कचरे से पटा रहा। यहां कई टन लकड़ी के ढेर भी लगे थे, जिससे घाट की रेलिंग व अन्य सामग्री भी क्षतिग्रस्त हो गई है। इधर, बेलणी मोटर पुल के नीचे बने घाट की हालत भी दयनीय बनी रही। यहां बाथरूम के दरवाजे क्षतिग्रस्त थे, जिनकी मरम्मत आज तक नहीं हो पाई। जन अधिकार मंच के अध्यक्ष मोहित डिमरी, सभासद सुरेंद्र रावत, सामाजिक कार्यकर्ता अशोक चौधरी, केपी ढौंडियाल आदि का कहना है कि घाटों के निर्माण के नाम पर धन की बर्बादी की गई है।
कोट
नमामि गंगे परियोजना के तहत निर्मित घाट नपा को हस्तांतरित किए गए हैं, लेकिन इनके संरक्षण, साफ-सफाई के लिए बजट की व्यवस्था नहीं हैं। हमारे आय के स्रोत भी इतने अधिक नहीं हैं कि घाटों का संरक्षण किया जा सके। इस संबंध में संबंधित संस्था और जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है। - सीमा रावत, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका रुद्रप्रयाग।
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केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना के तहत रुद्रप्रयाग नगर में मंदाकिनी व अलकनंदा नदी पर पांच घाट बनाए गए हैं। कोटेश्वर व घोलतीर में भी अलकनंदा नदी किनारे घाट बनाए गए हैं, लेकिन निर्माण के बाद से इन घाटों का रखरखाव नहीं किया गया। घाटों का निर्माण नदी के तल से किया गया है, जिससे जलस्तर बढ़ते ही घाट जलमग्न हो जाते हैं। मंदाकिनी नदी पर बना घाट पिछले वर्ष सितंबर से इस जून तक रेत और कचरे से पटा रहा। यहां कई टन लकड़ी के ढेर भी लगे थे, जिससे घाट की रेलिंग व अन्य सामग्री भी क्षतिग्रस्त हो गई है। इधर, बेलणी मोटर पुल के नीचे बने घाट की हालत भी दयनीय बनी रही। यहां बाथरूम के दरवाजे क्षतिग्रस्त थे, जिनकी मरम्मत आज तक नहीं हो पाई। जन अधिकार मंच के अध्यक्ष मोहित डिमरी, सभासद सुरेंद्र रावत, सामाजिक कार्यकर्ता अशोक चौधरी, केपी ढौंडियाल आदि का कहना है कि घाटों के निर्माण के नाम पर धन की बर्बादी की गई है।
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नमामि गंगे परियोजना के तहत निर्मित घाट नपा को हस्तांतरित किए गए हैं, लेकिन इनके संरक्षण, साफ-सफाई के लिए बजट की व्यवस्था नहीं हैं। हमारे आय के स्रोत भी इतने अधिक नहीं हैं कि घाटों का संरक्षण किया जा सके। इस संबंध में संबंधित संस्था और जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है। - सीमा रावत, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका रुद्रप्रयाग।
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