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दम तोड़ रहा शहीद आदर्श ग्राम बेंजी का सपना

Tue, 09 Nov 2021 07:54 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 09 Nov 2021 07:54 PM IST
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martyr Adarsh village Benji's dream dying
राज्य आंदोलनकारी यशोधर बेंजवाल का पैतृक गांव बेंजी कागजों और प्रस्तावों में ही शहीद आदर्श गांव बनकर रह गया है। पलायन की मार झेल रहे गांव में पेयजल संकट मुंह बाए खड़ा है। साथ ही अन्य सुविधाएं भी दम तोड़ रही हैं।
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राज्य निर्माण आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले यशोधर बेंजवाल 10 नवंबर 1995 को श्रीयंत टापू, श्रीनगर गढ़वाल में शहीद हो गए थे। राज्य बनने के बाद अगस्त्यमुनि में खेल विभाग के छात्रावास का नाम बेंजवाल के नाम पर रखा गया। वहीं, वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड निर्माण आंदोलन के शहीदों के गांवों को शहीद आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। इस संबंध में 16 जनवरी 2015 को बेंजी गांव में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में खुली बैठक की गई थी। बैठक में ग्रामीणों ने पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, शहीद की मूर्ति अनावरण, डिग्री कालेज रुद्रप्रयाग का नाम शहीद के नाम रखने समेत 18 प्रस्ताव सौंपे थे। प्रस्तावों पर चर्चा के लिए 11 फरवरी 2015 को दूसरी बैठक भी हुई। तब, स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को लेकर ग्राम पंचायत से प्रस्ताव भी मांगा लेकिन साढ़े छह वर्ष बाद भी शहीद आदर्श ग्राम की परिकल्पना साकार नहीं हो पाई है।
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उत्तराखंड शहीद यशोधर बेंजवाल स्मृति संस्था के सचिव दीपक बेंजवाल, कैलाश बेंजवाल, गिरीश बेंजवाल का कहना है कि बेंजी को आदर्श ग्राम बनाने के सरकार ने प्रस्ताव तो मांगे लेकिन एक भी प्रस्ताव अमलीजामा नहीं पहन पाया है। शहीद के नाम पर जो भी संस्थाएं संचालित हैं, वे ग्रामीणों के स्वयं के प्रयास से हैं।
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