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चांदी की चादर में लिपटी केदारपुरी
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Wed, 08 Mar 2017 09:44 PM IST
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बुधवार को केदारनाथ धाम में प्रात: 6 बजे से हो रही लगातार बर्फबारी।
- फोटो : amar ujala
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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ में पिछले 10 घंटे से लगातार बर्फबारी होने से साढ़े चार फीट से अधिक नई बर्फ जम गई है। धाम में चारों तरफ घना कोहरा छाया हुआ है। प्रात: 10 बजे से तापमान मानइस में होने से ठंड बढ़ गई है। अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तेज हिमपात हुआ है। जबकि निचले बस्ती क्षेत्रों में तड़के से रुक-रुक कर बारिश हो रही है।
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केदारनाथ में बुधवार तड़के छह बजे से तेज बर्फबारी शुरू हो गई थी। इस दौरान तापमान सामान्य बना रहा, लेकिन 9 बजे के बाद बर्फबारी के साथ तेज बर्फीली हवा चलने से पारा माइनस में चला गया। दोपहर डेढ़ बजे धाम में पारा माइनस 3 डिग्री पहुंच गया। धाम में मौजूद निम के कैप्टन सोबन सिंह ने बताया कि रामबाड़ा से रुद्रा प्वाइंट तक दो से ढाई फीट बर्फ जम चुकी है। बर्फबारी से पुनर्निर्माण के सभी कार्य व्यापक रूप से प्रभावित हो गए हैं।
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तृतीय केदार तुंगनाथ धाम सहित चोपता, दुगलबिट्टा, बनियाकुंड, द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम सहित जखोली के बधाणीताल व अगस्त्यमुनि ब्लाक के धनपुर, रानीगढ़ व बच्छणस्यूं पट्टी की ऊपरी पहाड़ियों व जंगलों में भी भारी हिमपात हुआ है।
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बदरीनाथ में तीन तो हेमकुंड में साढ़े चार फीट बर्फ
गोपेश्वर/जोशीमठ। बदरीनाथ धाम में तीन तो हेमकुंड साहिब में करीब साढ़े चार फीट ताजी बर्फ जम गई है। रुद्रनाथ, गौरसों बुग्याल, नंदा घुंघटी, औली, रामणी बुग्याल सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी जमकर बर्फबारी हुई है। देर शाम तक बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रहा। औली में भी करीब डेढ़ फीट तक बर्फ जम गई है। बर्फबारी से जोशीमठ-औली मोटर मार्ग कवांण बैंड से आगे फिसलन भरा हो गया है।
मंडल घाटी में भी कांचुलाखर्क से आगे बर्फबारी हुई। यहां चोपता तक करीब पांच इंच बर्फ जम गई है। औली में बर्फ जमने से यहां पर्यटकों और स्थानीय युवाओं ने स्कीइंग की। दिल्ली से औली पहुंचे पर्यटक स्वीटी और उमेश का कहना है कि वे पहली बार औली पहुंचे हैं। पहली बार करीब से बर्फ गिरने का नजारा देखा।
लोहाजंग में ही रुके पर्यटक
कर्णप्रयाग/देवाल। रूपकुंड और वैदनी में दो से तीन फीट बर्फबारी होने की सूचना है। वाण के क्षेत्र पंचायत सदस्य हीरा पहाड़ी ने बताया कि दूरस्थ गांव वाण, घेस, दीदना, वाक, हिमनी, बलाड़, सौरीगाड़ आदि गांव में अचानक ठंड बढ़ने से लोग अपने घरों में दुबके रहे। लोहाजंग के इंद्र सिंह राणा ने बताया कि दिल्ली, बंगलूरू से पर्यटक लोहाजंग में रुके है। इनको बुधवार को भीकलताल और ब्रहमताल जाना था, लेकिन तेज हवा व बारिश के कारण पर्यटक लोहाजंग से आगे नहीं बढ़ पाए हैं।
बर्फबारी से ढकी पहाड़ियां, फिर लौटी ठिठुरन
उत्तरकाशी। जिले में मंगलवार रात से ही रिमझिम बारिश के साथ ही गंगोत्री व यमुनोत्री धाम सहित ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी का दौर जारी है। बुधवार दिनभर निचले इलाकों में लगातार रिमझिम बारिश होती रही जबकि ऊंचाई वाले स्थानों में एक फीट तक बर्फ गिरी है। बर्फबारी के चलते गंगोत्री और यमुनोत्री हाईवे पर यातायात कठिन हो गया है। गंगनानी से आगे गंगोत्री हाईवे पर बर्फबारी से वाहनों की आवाजाही ठहर गई है जबकि यमुनोत्री हाईवे का सफर राड़ी टॉप में गिरी बर्फ के कारण जोखिम भरा हो गया है।
मार्च माह में गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की पहाड़ियों ने दूसरी बार बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है। रात से हो रही बारिश व बर्फबारी के चलते गंगोत्री हाईवे गंगनानी से आगे बाधित है। सुक्खी टॉप, हर्षिल, झाला, मुखबा, धराली, जसपुर सहित उपला टकनौर घाटी के कई गांव बर्फबारी से लकदक हो गए हैं। यहां गांवों में एक फीट तक बर्फ गिरी है, जबकि यमुना वैली में खरसाली, बीफ, जानकीचट्टी, फूलचट्टी, राड़ी टॉप में जमकर बर्फबारी होने से यमुनोत्री हाईवे पर यातायात पर कठिन हो गया। बारिश व बर्फबारी के कारण जिले में फिर से कंपकंपी लौट आई है। कई जगहों पर लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लेते दिखे।
अंधेरे में डूबे टकनौर घाटी के दर्जनों गांव
उत्तरकाशी। बारिश व बर्फबारी के चलते उपला टकनौर घाटी के कई गांवों में बिजली नहीं है। मंगलवार रात से क्षेत्र के दर्जनों गांव अंधेरे में डूबे हैं। जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित हीना, भटवाड़ी व आसपास इलाकों में भी बिजली मंगलवार रात से गुल रही। हालांकि ऊर्जा निगम ने बुधवार देर शाम तक भटवाड़ी तक बिजली आपूर्ति बहाल कर दी है, लेकिन उपला टकनौर के हर्षिल, झाला, मुखबा, धराली, जसपुर सहित दर्जनों गांव अब भी अंधेरे में डूबे हैं।
इन गांवों में एक फीट तक बर्फबारी के कारण बिजली लाइनें ध्वस्त हो गई। एसडीओ भटवाड़ी आरएल रतूड़ी ने बताया कि भटवाड़ी तक बिजली सप्लाई बहाल कर दी गई है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की मतगणना में ड्यूटी होने के कारण उपला टकनौर क्षेत्र में आज बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाएगी। बृहस्पतिवार दोपहर तक यहां बिजली आपूर्ति बहाल करने का प्रयास रहेगा।
बारिश-बर्फबारी से खिले काश्तकारों और सैलानियों के चेहरे
चंबा/नई टिहरी। धनोल्टी और काणाताल क्षेत्र में बारिश और मौसम की पांचवीं बर्फबारी होने से सैलानी और काश्तकारों के चेहरे खिल गए। बर्फबारी की सूचना मिलने पर देहरादून से सैलानियों का धनोल्टी और काणाताला क्षेत्र में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। यह बारिश फसलों के लिए संजीवनी मानी जा रही है। बारिश से तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। जिले में 15 मिमी बारिश रिकार्ड की गई है।
जिले में मंगलवार मध्य रात्रि से शुरू हुई बारिश का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। ठंड के लौटने पर लोगों को गर्म ऊनी वस्त्र निकालने को मजबूर होना पड़ा। बारिश के चलते बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। सुबह से ही धनोल्टी और काणाताल क्षेत्र में हल्की बर्फबारी होती रही, लेकिन बर्फ ज्यादा टिक नहीं पाई।
पर्यावरणविद् विजय जड़धारी ने बताया कि यह बारिश गेहूं, जौ, मसूर की फसलों और सेब की पैदावार बढ़ाने के लिए संजीवनी साबित होगी। बारिश के चलते तापमान में 11.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को नई टिहरी का अधिकतम तापमान 17.6 डिग्री सेल्सियस था, जो बुधवार को घटकर 5.9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। न्यूनतम तापमान 2.6 डिग्री सेल्सियस रहा।
औद्यानिकी एवं वानिकी विवि रानीचौरी परिसर मौसम विज्ञान विभाग के विशेषज्ञ डा. प्रकाश सिंह नेगी ने बताया कि टिहरी जिले में मंगलवार रात से 15 एमएम बारिश हो चुकी है। अगले दो दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है।
सूखने के कगार पर पहुंच गई थी 10 से 15 फीसदी फसल
जोशीमठ। यह बारिश और बर्फबारी गेहूं, सरसों की फसल के साथ ही सेब, आडू, खुमानी की पैदावार के लिए लाभकारी होगी। फरवरी माह में बारिश नहीं होने से खेतों की नमी गायब हो गई थी। अब अचानक मौसम में आए बदलाव से फसल सूखने से बच गई है। स्थानीय काश्तकार संदीप तिवारी, अव्वल सिंह और सुरेंद्र सिंह का कहना है कि असिंचित खेतों में सिंचाई की दिक्कत होने लगी थी। लेकिन अब बारिश होने से गेहूं और सरसों की फसल को नया जीवन मिल गया है।
सेब काश्तकार कमल सिंह का कहना है कि इस बार जोशीमठ क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी बेहद कम हुई है, जिससे सेब, आडू और खुमानी के पेड़ों से फूल झड़ने लगे थे। अब बारिश होने से पौधों को ऊर्जा मिल जाएगी। मुख्य कृषि अधिकारी दिनेश कुमार का कहना है कि बारिश की कमी से दस से पंद्रह फीसदी फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई थी। अब यह बारिश और बर्फबारी निचले और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की फसलों के लिए लाभकारी साबित होगी।