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केदारनाथ की उत्सव डोली धाम रवाना
ब्यूरो/ अमर उजाला ब्यूरो ऊखीमठ/गुप्तकाशी।
Updated Thu, 05 May 2016 09:24 PM IST
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kedahnath doli
- फोटो : amarujala
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भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली धाम के लिए रवाना हो गई है। भोलेनाथ के जयकारों के बीच डोली बृहस्पतिवार को अपने प्रथम पड़ाव विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंच गई है। यहां डोली का भव्य स्वागत किया गया।
शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में सुबह सात बजे आचार्य और मंदिर के वेदपाठियों ने पूजा-अर्चना की। केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग ने धाम के लिए नियुक्त मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग को पगड़ी एवं अंगवस्त्र पहनाया और छह माह की ग्रीष्मकालीन पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी सौंपी। सुबह 10 बजे बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली ने ओंकारेश्वर मंदिर की तीन परिक्रमा की।
पुजारियों ने डोली की आरती की। सुबह 10.15 बजे सैकड़ों भक्तों की मौजूदगी में ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में 6-कुमाऊं रेजीमेंट की बैंड धुनों और स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ बाबा केदार की डोली ने धाम के लिए प्रस्थान किया। विद्यापीठ में कुछ देर विश्राम के बाद बाबा केदार की डोली भैंसारी होते हुए गुप्तकाशी पहुंची। यहां मालगुजार बचन सिंह नेगी के घर पर डोली ने कुछ देर विश्राम किया।
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इस मौके पर डोली की आरती की गई और ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित किए। इसके बाद डेढ़ बजे बाबा केदार की डोली विश्वनाथ मंदिर परिसर में पहुंची। यहां मंदिर की एक परिक्रमा के बाद पुजारी शशिधर लिंग ने आरती कर डोली का स्वागत किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, पुलिस, प्रशासन और मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।
भैरवनाथ की पूजा की गई
ऊखीमठ। ओंकारेश्वर मंदिर में बुधवार रात आठ बजे भैरवनाथ पूजा संपन्न हुई। पुजारियों ने भैरवनाथ जी का विशेष श्रृंगार किया। करीब तीन घंटे की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। विदित हो कि केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले धाम में मौजूद भगवान भैरवनाथ जी के कपाट खोले जाते हैं।
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शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में सुबह सात बजे आचार्य और मंदिर के वेदपाठियों ने पूजा-अर्चना की। केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग ने धाम के लिए नियुक्त मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग को पगड़ी एवं अंगवस्त्र पहनाया और छह माह की ग्रीष्मकालीन पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी सौंपी। सुबह 10 बजे बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली ने ओंकारेश्वर मंदिर की तीन परिक्रमा की।
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पुजारियों ने डोली की आरती की। सुबह 10.15 बजे सैकड़ों भक्तों की मौजूदगी में ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में 6-कुमाऊं रेजीमेंट की बैंड धुनों और स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ बाबा केदार की डोली ने धाम के लिए प्रस्थान किया। विद्यापीठ में कुछ देर विश्राम के बाद बाबा केदार की डोली भैंसारी होते हुए गुप्तकाशी पहुंची। यहां मालगुजार बचन सिंह नेगी के घर पर डोली ने कुछ देर विश्राम किया।
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इस मौके पर डोली की आरती की गई और ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित किए। इसके बाद डेढ़ बजे बाबा केदार की डोली विश्वनाथ मंदिर परिसर में पहुंची। यहां मंदिर की एक परिक्रमा के बाद पुजारी शशिधर लिंग ने आरती कर डोली का स्वागत किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, पुलिस, प्रशासन और मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।
भैरवनाथ की पूजा की गई
ऊखीमठ। ओंकारेश्वर मंदिर में बुधवार रात आठ बजे भैरवनाथ पूजा संपन्न हुई। पुजारियों ने भैरवनाथ जी का विशेष श्रृंगार किया। करीब तीन घंटे की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। विदित हो कि केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले धाम में मौजूद भगवान भैरवनाथ जी के कपाट खोले जाते हैं।