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केदारनाथ के रावल ने भी किया केदार महोत्सव का विरोध
ब्यूरो/ अमर उजाला रुद्रप्रयाग
Updated Tue, 02 Feb 2016 09:01 PM IST
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केदार महोत्सव को लेकर केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग ने भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने से वहां कोई भी आयोजन परंपरा के खिलाफ होगा। इधर, भाजपा सहित केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों ने भी केदार महोत्सव को लेकर नाराजगी जताई है।
केदारनाथ में आगामी 25 से 29 फरवरी को सरकार की ओर से केदार महोत्सव का आयोजन प्रस्तावित है। पांच दिवसीय आयोजन के तहत यहां रुद्रा प्वाइंट से छानी कैंप तक डेढ़ किमी बुग्याली क्षेत्र में साहसिक खेल होने हैं, लेकिन केदार महोत्सव का लगातार विरोध हो रहा है। केदारनाथ के रावल ने भी इसे धार्मिक मान्यताओं का उल्लंघन माना है। कहा कि ग्रीष्मकाल में वहां पर यात्रा को बढ़ावा देने या पुनर्निर्माण कार्यों के बारे में जानकारी देने को लेकर सरकार और प्रशासन आयोजन कर सकते हैं, लेकिन शीतकाल में यह परंपरा सही नहीं है। दूसरी ओर, भाजपा के अजेंद्र अजय का कहना है कि सरकार को केदार महोत्सव कराना है, तो उसे गुप्तकाशी, ऊखीमठ, कालीमठ आदि स्थानों पर कराए। केदारनाथ में इस तरह के आयोजन का विरोध किया जाएगा। केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित अरुण प्रकाश बाजपेयी, विपिन सेमवाल, राजाराम सेमवाल ने भी केदार महोत्सव का विरोध किया है। कहा कि सरकार आपदा पीड़ितों की समस्याओं का निस्तारण करने के बजाय, धार्मिक मान्यताओं को दरकिनार करने का कार्य कर रही है, जिससे देवभूमि और धाम की छवि प्रभावित हो रही है।
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केदारनाथ में आगामी 25 से 29 फरवरी को सरकार की ओर से केदार महोत्सव का आयोजन प्रस्तावित है। पांच दिवसीय आयोजन के तहत यहां रुद्रा प्वाइंट से छानी कैंप तक डेढ़ किमी बुग्याली क्षेत्र में साहसिक खेल होने हैं, लेकिन केदार महोत्सव का लगातार विरोध हो रहा है। केदारनाथ के रावल ने भी इसे धार्मिक मान्यताओं का उल्लंघन माना है। कहा कि ग्रीष्मकाल में वहां पर यात्रा को बढ़ावा देने या पुनर्निर्माण कार्यों के बारे में जानकारी देने को लेकर सरकार और प्रशासन आयोजन कर सकते हैं, लेकिन शीतकाल में यह परंपरा सही नहीं है। दूसरी ओर, भाजपा के अजेंद्र अजय का कहना है कि सरकार को केदार महोत्सव कराना है, तो उसे गुप्तकाशी, ऊखीमठ, कालीमठ आदि स्थानों पर कराए। केदारनाथ में इस तरह के आयोजन का विरोध किया जाएगा। केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित अरुण प्रकाश बाजपेयी, विपिन सेमवाल, राजाराम सेमवाल ने भी केदार महोत्सव का विरोध किया है। कहा कि सरकार आपदा पीड़ितों की समस्याओं का निस्तारण करने के बजाय, धार्मिक मान्यताओं को दरकिनार करने का कार्य कर रही है, जिससे देवभूमि और धाम की छवि प्रभावित हो रही है।
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