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इंदिरा अम्मा कैंटीन में मिल रही है कंडाली की सब्जी
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Tue, 19 Jan 2016 08:53 PM IST
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जिस कंडाली के नाम से सिहरन उठती है, उसकी सब्जी और कापली को लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
इंदिरा अम्मा भोजनालय में कंडाली की सब्जी को मीनू में शामिल किया गया है। इसे सप्ताह में एक दिन बनाया जा रहा है।
यहां इन दिनों इंदिरा अम्मा भोजनालय में लोग चौंसा, भटवाणी, गथवाणी, गहथ की दाल, रयास की दाल का स्वाद ले रहे हैं।
दूध गंगा उत्पादन समिति मेदनपुर की ओर से संचालित भोजनालय में स्थानीय उत्पाद से बना भोजन परोसा जा रहा है। समिति ने अब कंडाली की सब्जी व कापली को भी मीनू में शामिल कर लिया है।
गांव से ही जरूरत के हिसाब से कंडाली भोजनालय तक पहुंचाई जा रही है।
ऐसे बनती है कंडाली की सब्जी
कंडाली की कोमल कोपलों को काटकर एकत्रित किया जाता है। इसके बाद इन्हें हल्की आंच में जलाया जाता है। इससे इनका कांटा खत्म हो जाता है।
इसके बाद इसे उबालकर इसको गूंथा जाता है। मेथी, धनिया के छौंक के साथ सब्जी या कापली बनाई जाती है।
स्वास्थ्य के लिए भी है लाभकारी
जीआईसी रतूड़ा के विज्ञान शिक्षक धीरेंद्र सिंह बर्तवाल ने बताया कि कंडाली, अर्टिकासिएसिया फेमिली में आता है। इसे अंग्रेजी में स्पेईंग नेटल कहा जाता है।
जबकि इसका वानस्पतिक नाम अर्टिका डायोइसिया है।
दवा के क्षेत्र में इसका विशेष महत्व है। यह गंजेपन को दूर करने के साथ ही त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द में भी उपयोग में लाई जाती है। इसमें फोरिक ऐसिड काफी मात्रा में पाई जाती है।
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कंडाली को सर्दियों में शरीर में गर्माहट के लिए सब्जी व कापली के रूप में खाया जाता है।
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इंदिरा अम्मा भोजनालय में कंडाली की सब्जी को मीनू में शामिल किया गया है। इसे सप्ताह में एक दिन बनाया जा रहा है।
यहां इन दिनों इंदिरा अम्मा भोजनालय में लोग चौंसा, भटवाणी, गथवाणी, गहथ की दाल, रयास की दाल का स्वाद ले रहे हैं।
दूध गंगा उत्पादन समिति मेदनपुर की ओर से संचालित भोजनालय में स्थानीय उत्पाद से बना भोजन परोसा जा रहा है। समिति ने अब कंडाली की सब्जी व कापली को भी मीनू में शामिल कर लिया है।
गांव से ही जरूरत के हिसाब से कंडाली भोजनालय तक पहुंचाई जा रही है।
ऐसे बनती है कंडाली की सब्जी
कंडाली की कोमल कोपलों को काटकर एकत्रित किया जाता है। इसके बाद इन्हें हल्की आंच में जलाया जाता है। इससे इनका कांटा खत्म हो जाता है।
इसके बाद इसे उबालकर इसको गूंथा जाता है। मेथी, धनिया के छौंक के साथ सब्जी या कापली बनाई जाती है।
स्वास्थ्य के लिए भी है लाभकारी
जीआईसी रतूड़ा के विज्ञान शिक्षक धीरेंद्र सिंह बर्तवाल ने बताया कि कंडाली, अर्टिकासिएसिया फेमिली में आता है। इसे अंग्रेजी में स्पेईंग नेटल कहा जाता है।
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जबकि इसका वानस्पतिक नाम अर्टिका डायोइसिया है।
दवा के क्षेत्र में इसका विशेष महत्व है। यह गंजेपन को दूर करने के साथ ही त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द में भी उपयोग में लाई जाती है। इसमें फोरिक ऐसिड काफी मात्रा में पाई जाती है।
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कंडाली को सर्दियों में शरीर में गर्माहट के लिए सब्जी व कापली के रूप में खाया जाता है।