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शिक्षा की बेहतरी के लिए हों जरूरी संसाधन
ब्यूरो/ अमर उजाला,जखोली
Updated Mon, 02 May 2016 10:38 PM IST
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ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की बेहतरी के लिए स्कूलों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के साथ शिक्षक व अभिभावक में निरंतर संवाद को जरूरी बताया गया।
जीआईसी ओंकारानंद हिमालयन मॉनटेसरी इंटर कालेज में आयोजित गोष्ठी का शुभारंभ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गीता नौटियाल एवं शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक शिव सिंह नेगी, रघुवीर सिंह पंवार व अन्य लोगों ने संयुक्त रूप से किया। कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर तभी बेहतर हो सकता है, जब अभिभावक भी रुचि लें।
कहना था कि सीमित संसाधनों में संचालित सरकारी शिक्षा के प्रति परिजनों का उदासीन होना चिंताजनक है। उन्होंने प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में जरूरी संसाधनों की उपलब्धता को जरूरी बताया। वक्ताओं का कहना था कि अंग्रेजी शासन के समय देहरादून, मसूरी और नैनीताल में शिक्षा के केंद्र स्थापित किए गए थे, जो आज भी अपनी साख बनाए हुए हैं। आजादी के बाद प्रदेश व देश में अन्य कोई ऐसे शिक्षण संस्थान स्थापित नहीं हो पाए हैं।
ग्रामीण स्कूलों को जरूरी संसाधनों से जोड़ने के साथ वहां अच्छे तकनीकी संस्थान व अन्य रचनात्मक गतिविधियों के केंद्र को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे नौनिहालों का बौद्धिक स्तर बढ़ सके। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने लोकगीत, नृत्य, कविता पाठ सहित अन्य रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। गोष्ठी में सीपी चमोली, धूम सिंह चौहान, गोविंद राम सेमवाल, लखपत राणा, ललिता प्रसाद भट्ट, कपूर सिंह पंवार, विजय सिंह, सत्य प्रसाद भट्ट आदि मौजूद थे।
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जीआईसी ओंकारानंद हिमालयन मॉनटेसरी इंटर कालेज में आयोजित गोष्ठी का शुभारंभ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गीता नौटियाल एवं शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक शिव सिंह नेगी, रघुवीर सिंह पंवार व अन्य लोगों ने संयुक्त रूप से किया। कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर तभी बेहतर हो सकता है, जब अभिभावक भी रुचि लें।
कहना था कि सीमित संसाधनों में संचालित सरकारी शिक्षा के प्रति परिजनों का उदासीन होना चिंताजनक है। उन्होंने प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में जरूरी संसाधनों की उपलब्धता को जरूरी बताया। वक्ताओं का कहना था कि अंग्रेजी शासन के समय देहरादून, मसूरी और नैनीताल में शिक्षा के केंद्र स्थापित किए गए थे, जो आज भी अपनी साख बनाए हुए हैं। आजादी के बाद प्रदेश व देश में अन्य कोई ऐसे शिक्षण संस्थान स्थापित नहीं हो पाए हैं।
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ग्रामीण स्कूलों को जरूरी संसाधनों से जोड़ने के साथ वहां अच्छे तकनीकी संस्थान व अन्य रचनात्मक गतिविधियों के केंद्र को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे नौनिहालों का बौद्धिक स्तर बढ़ सके। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने लोकगीत, नृत्य, कविता पाठ सहित अन्य रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। गोष्ठी में सीपी चमोली, धूम सिंह चौहान, गोविंद राम सेमवाल, लखपत राणा, ललिता प्रसाद भट्ट, कपूर सिंह पंवार, विजय सिंह, सत्य प्रसाद भट्ट आदि मौजूद थे।
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