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सड़कें बनती तो वीरान न होते गांव
ब्यूरो/ अमर उजाला रुद्रप्रयाग
Updated Sun, 31 Jan 2016 09:32 PM IST
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लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीत बोला भै-बंधु तुमतै कनु उत्तराखंड चयणू च...गीत में एक ऐसे राज्य की कल्पना की गई थी जो कृषि, पशुपालन, उद्योग और रोजगार से समृद्धा हो। गांवों में घर खुशहाल व खेतों में फसलें लहलहाती हों। लेकिन राज्य निर्माण के 16 वर्षों में तस्वीर इसके उलट है। विकास के दावे फाइलों में सिमटकर रह गए। उल्लास से भरे गांव पलायन से वीरान हो गए हैं। रुद्रप्रयाग जिले की ही बात करें तो उत्तराखंड बनने के बाद रुद्रप्रयाग में करीब दो सौ छोटे-बड़े मोटर मार्ग स्वीकृत किए गए, लेकिन 169 सड़कें आज भी धरातल पर नहीं उतरी हैं। केवल सड़कें नहीं होने से यहां से पलायन बढ़ गया है।
अगस्त्यमुनि ब्लाक के धनपुर पट़्टी के सिमतोली गांव में छह वर्ष पहले 20 परिवार थे। सड़क नहीं होने से केवल तीन परिवारों के पांच बुजुर्ग हैं। कांडा गांव में 60 परिवारों में 15 ही रह गए हैं। नौला में भी तीन परिवार रह गए हैं। 90 वर्षीय राधा देवी और दिव्यांग जयंती देवी कहती हैं कि सड़क बनती हो गांव यूं वीरान न होता। बच्छणस्यूं पट़्टी के ग्राम पंचायत नवासू के कफलखील तोक में सिर्फ एक परिवार है। एक दशक पहले यहां 15 परिवार थे। ग्राम पंचायत बंगोली के चाम्यूं गांव में आठ वर्ष पहले 30 परिवार थे, अब यहां सिर्फ चार लोग हैं। ग्रामीण आलम सिंह चौहान कहते हैं, उत्तराखंड बनने के बाद भी जरूरी सुविधाएं नसीब नहीं होना ही पलायन का प्रमुख कारण बना।
इनका कहना है -
सरकारों के दावे धरातल पर जब तक नहीं उतरेंगे, गांव यूं ही खाली होते रहेंगे। उत्तराखंड की मूल पहचान गांव है। लेकिन गांव आज वीरान हैं। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य के लिए मीलों दौड़ नियती बन गई है, जो चिंता का विषय है। आने वाली पीढ़ी को हम क्या देंगे, इस विषय पर सोचना होगा।
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-- अनिल जोशी, पर्यावरणविद् व गांव बसाओ, गांव बचाओ यात्रा के सूत्रधार
केस एक -
जिला मुख्यालय से करीब 12 किमी की दूर शिवनंदी से 8 किमी दूर चढ़ाई पर स्थित धनपुर पट्टी के ग्राम पंचायत कांडा को जोड़ने के लिए वर्ष 2006 में शिवनंदी-सिमतोली मोटर मार्ग स्वीकृत किया गया। लेकिन निर्माण आज तक नहीं हो पाया, जिससे सिमतोली, कांडा, नौला गांव पलायन से खाली हो गए।
केस दो -
पट्टी बच्छणस्यूं में साठ के दशक से खांकरा-पौड़ीखाल-गहडख़ाल मोटर मार्ग की मांग हो रही है। लेकिन आज तक मार्ग नहीं बना, जिस कारण पौड़ीखाल, निषणी सहित 10 गांवों में गिनती के लोग रह गए हैं।
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अगस्त्यमुनि ब्लाक के धनपुर पट़्टी के सिमतोली गांव में छह वर्ष पहले 20 परिवार थे। सड़क नहीं होने से केवल तीन परिवारों के पांच बुजुर्ग हैं। कांडा गांव में 60 परिवारों में 15 ही रह गए हैं। नौला में भी तीन परिवार रह गए हैं। 90 वर्षीय राधा देवी और दिव्यांग जयंती देवी कहती हैं कि सड़क बनती हो गांव यूं वीरान न होता। बच्छणस्यूं पट़्टी के ग्राम पंचायत नवासू के कफलखील तोक में सिर्फ एक परिवार है। एक दशक पहले यहां 15 परिवार थे। ग्राम पंचायत बंगोली के चाम्यूं गांव में आठ वर्ष पहले 30 परिवार थे, अब यहां सिर्फ चार लोग हैं। ग्रामीण आलम सिंह चौहान कहते हैं, उत्तराखंड बनने के बाद भी जरूरी सुविधाएं नसीब नहीं होना ही पलायन का प्रमुख कारण बना।
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इनका कहना है -
सरकारों के दावे धरातल पर जब तक नहीं उतरेंगे, गांव यूं ही खाली होते रहेंगे। उत्तराखंड की मूल पहचान गांव है। लेकिन गांव आज वीरान हैं। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य के लिए मीलों दौड़ नियती बन गई है, जो चिंता का विषय है। आने वाली पीढ़ी को हम क्या देंगे, इस विषय पर सोचना होगा।
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-- अनिल जोशी, पर्यावरणविद् व गांव बसाओ, गांव बचाओ यात्रा के सूत्रधार
केस एक -
जिला मुख्यालय से करीब 12 किमी की दूर शिवनंदी से 8 किमी दूर चढ़ाई पर स्थित धनपुर पट्टी के ग्राम पंचायत कांडा को जोड़ने के लिए वर्ष 2006 में शिवनंदी-सिमतोली मोटर मार्ग स्वीकृत किया गया। लेकिन निर्माण आज तक नहीं हो पाया, जिससे सिमतोली, कांडा, नौला गांव पलायन से खाली हो गए।
केस दो -
पट्टी बच्छणस्यूं में साठ के दशक से खांकरा-पौड़ीखाल-गहडख़ाल मोटर मार्ग की मांग हो रही है। लेकिन आज तक मार्ग नहीं बना, जिस कारण पौड़ीखाल, निषणी सहित 10 गांवों में गिनती के लोग रह गए हैं।