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उत्तराखंड के मूल निवासियों के सामने पहचान का संकट : डिमरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
अगस्त्यमुनि। मूल निवास-1950 और सशक्त भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति की बैठक में समिति की अग्रिम रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने अपने-अपने विचार रखते हुए सुझाव दिए।
बैठक में संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि आज उत्तराखंड में मूल निवासियों के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया है। हमारी पहचान के साथ ही संस्कृति, नौकरी, रोजगार, जमीन सहित तमाम आर्थिक संसाधनों पर बाहर से आए हुए लोगों का कब्जा होता जा रहा है।
इसके पीछे का मुख्य कारण मूल निवास 1950 की व्यवस्था का खत्म होना और कमजोर भू-कानून लागू होना है। कहा कि संघर्ष समिति के आंदोलन से सरकार बैकफुट पर है। बताया कि संघर्ष समिति, नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस पर मूल निवास एवं सशक्त भू-कानून का एक ब्लूप्रिंट सरकार को सौंपने जा रही है।
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बैठक में व्यापार संघ अध्यक्ष त्रिभुवन नेगी तथा पूर्व अध्यक्ष नवीन बिष्ट ने सुझाव दिया कि आंदोलन को रुद्रप्रयाग जनपद में गति देने हेतु अगस्त्यमुनि, तिलवाड़ा, गुप्तकाशी, ऊखीमठ सहित अन्य हिस्सों में भी रैली आयोजित की जाए और कार्यक्रम की तिथि घोषित करने हेतु इन सभी स्थानों पर बैठकें की जाएंगी।
व्यापार संघ के प्रदेश मंत्री मोहन रौतेला व सामाजिक कार्यकर्ता हरीश गुसाईं ने इस अभियान को गांव-गांव तक इस ले जाने की आवश्यकता बताई। सेवा निवृत कर्मचारी संगठन के कुशलानंद भट्ट ने कहा कि हमें इस बात को समझना होगा कि बिना संघर्ष के हमें सफलता नहीं मिलेगी। बैठक में कालीचरण रावत, कालिका काण्डपाल, हपींद्र सिंह असवाल, महावीर नेगी, कमल रावत, सुनील सेमवाल, जितेंद्र रावत, कमलेश जमलोकी आदि मौजूद रहे।
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अगस्त्यमुनि। मूल निवास-1950 और सशक्त भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति की बैठक में समिति की अग्रिम रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने अपने-अपने विचार रखते हुए सुझाव दिए।
बैठक में संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि आज उत्तराखंड में मूल निवासियों के सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया है। हमारी पहचान के साथ ही संस्कृति, नौकरी, रोजगार, जमीन सहित तमाम आर्थिक संसाधनों पर बाहर से आए हुए लोगों का कब्जा होता जा रहा है।
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इसके पीछे का मुख्य कारण मूल निवास 1950 की व्यवस्था का खत्म होना और कमजोर भू-कानून लागू होना है। कहा कि संघर्ष समिति के आंदोलन से सरकार बैकफुट पर है। बताया कि संघर्ष समिति, नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस पर मूल निवास एवं सशक्त भू-कानून का एक ब्लूप्रिंट सरकार को सौंपने जा रही है।
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बैठक में व्यापार संघ अध्यक्ष त्रिभुवन नेगी तथा पूर्व अध्यक्ष नवीन बिष्ट ने सुझाव दिया कि आंदोलन को रुद्रप्रयाग जनपद में गति देने हेतु अगस्त्यमुनि, तिलवाड़ा, गुप्तकाशी, ऊखीमठ सहित अन्य हिस्सों में भी रैली आयोजित की जाए और कार्यक्रम की तिथि घोषित करने हेतु इन सभी स्थानों पर बैठकें की जाएंगी।
व्यापार संघ के प्रदेश मंत्री मोहन रौतेला व सामाजिक कार्यकर्ता हरीश गुसाईं ने इस अभियान को गांव-गांव तक इस ले जाने की आवश्यकता बताई। सेवा निवृत कर्मचारी संगठन के कुशलानंद भट्ट ने कहा कि हमें इस बात को समझना होगा कि बिना संघर्ष के हमें सफलता नहीं मिलेगी। बैठक में कालीचरण रावत, कालिका काण्डपाल, हपींद्र सिंह असवाल, महावीर नेगी, कमल रावत, सुनील सेमवाल, जितेंद्र रावत, कमलेश जमलोकी आदि मौजूद रहे।