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गुलाबराय प्राकृतिक जलस्रोत चढ़ा विकास की भेंट
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जिला मुख्यालय से लगे गुलाबराय में दशकों पुराना प्राकृतिक जलस्रोत विकास की भेंट चढ़ गया है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना के तहत रैंतोली बाईपास के पास निर्माणाधीन सुरंग को स्रोत के सूखने का प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस स्रोत के सूखने से सैकड़ों परिवारों की जलापूर्ति पर असर पड़ा है। लोगों ने प्रशासन व एनएच से जलस्रोत का भू-गर्भीय सर्वेक्षण कर पुनर्जीवित कराने की मांग की है।
गुलाबराय में सदियों पुराना जलस्रोत राहगीरों के साथ स्थानीय लोगों के पेयजल का बड़ा सहारा रहा है। ग्रीष्मकाल में रुद्रप्रयाग मुख्य बाजार, सुविधानगर, भाणाधार सहित पुनाड़ के लोग भी इस स्रोत से अपनी जलापूर्ति करते थे। स्रोत पर बारामास पानी का स्राव एक समान रहता था लेकिन ऑलवेदर रोड परियोजना में भी बदरीनाथ हाईवे के चौड़ीकरण के दौरान इस प्राकृतिक जल धरोहर को संरक्षित किया गया। अब ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन परियोजना के तहत निर्माणाधीन रैंतोली सुरंग से स्रोत का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। बीते डेढ़ माह में पहले स्रोत पर पानी दिनोंदिन कम हुआ और एक सप्ताह पूर्व यह पूरी तरह से सूख गया। स्थानीय वयोवृद्ध 85 वर्षीय सरस्वती देवी देवली, 75 वर्षीय लज्जावती देवी, रमेश चंद्र देवली, प्रेमलाल देवली बताते हैं कि उनकी गुलाबराय में सात पीढ़ियां हो चुकी हैं। प्राकृतिक जलस्रोत पर हमेशा भरपूर पानी रहा लेकिन पिछले डेढ़ माह के भीतर अचानक ही पानी कम होने लगा और अब यह पूरी तरह से सूख गया है। संजय देवली बताते हैं कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन परियोजना में रैंतोली के समीप बन रही करीब एक किमी लंबी सुरंग से प्राकृतिक जलस्रोत पर असर पड़ा है। इस स्रोत के लगभग एक किमी पीछे सुरंग बन रही है जिसमें इन दिनों 5 से 6 इंच तक पानी का स्राव हो रहा है। उन्होंने भू-गर्भ वैज्ञानिकों की मदद से सर्वेक्षण कर प्राकृतिक जलस्रोत के संरक्षण की मांग की है। इधर, आरवीएनएल के वरिष्ठ अधिकारी विजय डंगवाल ने बताया कि जल्द ही जलस्रोत के भू-सर्वेक्षण के लिए योजना तैयार कर विशेषज्ञों से सर्वेक्षण कराया जाएगा।
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गुलाबराय में सदियों पुराना जलस्रोत राहगीरों के साथ स्थानीय लोगों के पेयजल का बड़ा सहारा रहा है। ग्रीष्मकाल में रुद्रप्रयाग मुख्य बाजार, सुविधानगर, भाणाधार सहित पुनाड़ के लोग भी इस स्रोत से अपनी जलापूर्ति करते थे। स्रोत पर बारामास पानी का स्राव एक समान रहता था लेकिन ऑलवेदर रोड परियोजना में भी बदरीनाथ हाईवे के चौड़ीकरण के दौरान इस प्राकृतिक जल धरोहर को संरक्षित किया गया। अब ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन परियोजना के तहत निर्माणाधीन रैंतोली सुरंग से स्रोत का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। बीते डेढ़ माह में पहले स्रोत पर पानी दिनोंदिन कम हुआ और एक सप्ताह पूर्व यह पूरी तरह से सूख गया। स्थानीय वयोवृद्ध 85 वर्षीय सरस्वती देवी देवली, 75 वर्षीय लज्जावती देवी, रमेश चंद्र देवली, प्रेमलाल देवली बताते हैं कि उनकी गुलाबराय में सात पीढ़ियां हो चुकी हैं। प्राकृतिक जलस्रोत पर हमेशा भरपूर पानी रहा लेकिन पिछले डेढ़ माह के भीतर अचानक ही पानी कम होने लगा और अब यह पूरी तरह से सूख गया है। संजय देवली बताते हैं कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन परियोजना में रैंतोली के समीप बन रही करीब एक किमी लंबी सुरंग से प्राकृतिक जलस्रोत पर असर पड़ा है। इस स्रोत के लगभग एक किमी पीछे सुरंग बन रही है जिसमें इन दिनों 5 से 6 इंच तक पानी का स्राव हो रहा है। उन्होंने भू-गर्भ वैज्ञानिकों की मदद से सर्वेक्षण कर प्राकृतिक जलस्रोत के संरक्षण की मांग की है। इधर, आरवीएनएल के वरिष्ठ अधिकारी विजय डंगवाल ने बताया कि जल्द ही जलस्रोत के भू-सर्वेक्षण के लिए योजना तैयार कर विशेषज्ञों से सर्वेक्षण कराया जाएगा।
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