जनपद के आखिरी गांव गौंडार के ग्रामीण ढाई माह से छिल्लों की रोशनी में जीवन यापन कर रहे हैं। यहां मधु गंगा पर निर्मित 100 किलोवाट की जल विद्युत परियोजना की पाइप लाइन अगस्त माह से क्षतिग्रस्त पड़ी है, जिस कारण विद्युत उत्पादन ठप होने से घरों की बिजली गुल है।
वर्ष 2013 में आपदा में ध्वस्त हुई जल विद्युत परियोजना का चार वर्ष पूर्व पुनर्निर्माण किया गया। लेकिन उचित रख-रखाव के अभाव में योजना बीते तीन वर्षों में दो बार क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इस वर्ष भी बरसात से 14 अगस्त को योजना की पाइप लाइन अतिवृष्टि के कारण क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब, से उरेडा द्वारा योजना की मरम्मत नहीं की गई है, जिस कारण गांव के 75 परिवार अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान वीर सिंह पंवार ने बताया कि समस्या के बारे अवगत कराने के दो माह से अधिक समय बाद भी स्थित जस की तस बनी है। क्षतिग्रस्त नहर से वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे पावर हाउस तक पानी पहुंचाने का प्रयास भी किया गया। लेकिन बात नहीं बन पाई, जिस कारण ग्रामीण छिल्ले की रोशनी में जीवन यापन करना पड़ रहा है। बावजूद विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। उरेडा के प्रोजेक्ट मैनेजर एसके सैनी ने बताया कि क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत के लिए आपदा मद से ढाई लाख का प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। जैसे ही बजट प्राप्त होगा, परियोजना को दुरस्त कर विद्युत उत्पादन शुरू किया जाएगा।