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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rudraprayag News ›   Fire department: not his own Powerhouse

अग्निशमन विभाग: अपना ही ठौर नहीं

Mon, 18 Apr 2016 09:29 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाल, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो/ अमर उजाल, रुद्रप्रयाग Updated Mon, 18 Apr 2016 09:29 PM IST
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एक दशक बाद भी अग्निशमन विभाग को अपना स्थायी भवन और जगह नहीं मिल पाई है। तीन कमरों के दफ्तर और बैरक में विभाग का संचालन हो रहा है। अग्निशमन वाहनों के लिए पार्किंग नहीं होने से वे सड़क किनारे खड़े रहते हैं।

वर्ष 1997 में सृजित रुद्रप्रयाग जिले में वर्ष 2005 में अग्निशमन विभाग खुला। तब से एक दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी विभाग को स्थायी कार्यालय तक उपलब्ध नहीं हो सका है। लोगों की जिंदगी बचाने के लिए लड़ने वाले फायरमैन शासन-प्रशासन की उदासीनता का दंश झेल रहे हैं। हालात यह हैं कि मुख्य बाजार से पांच किमी दूर ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर सुमेरपुर में पंचायत भवन और पशुपालन विभाग के पुराने कमरों में दफ्तर और बैरक का संचालन हो रहा है। कुछ वर्ष पहले जिला मुख्यालय में कोटेश्वर में विभाग को भूमि आवंटित हुई थी, लेकिन मानकों के अनुरूप नहीं होने से यह कवायद आगे नहीं बढ़ पाई। दूसरी तरफ, एक ओर अग्निशमन सेवा सप्ताह मनाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर विभाग की जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्थिति यह है कि लीडिंग फायरमैन के पांच और चालक के चार पद रिक्त हैं।
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सड़क में खड़े रहते वाहन
अग्निशमन विभाग के फायर सेफ्टी उपकरणों को रखने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। विभाग के पास वाटर टैंकर, फोम टैंकर, मिनी वाटर टैंकर, रेसक्यू वैन और मिनी रेसक्यू वैन उपलब्ध है। जगह के अभाव में ये सभी वाहन बदरीनाथ राजमार्ग पर खड़े रहते हैं। ऐसे में जहां कई बार यातायात में व्यवधान होता है। वहीं वाहनों से छेड़छाड़ की आशंका रहती है।
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नहीं है हाईड्रेंट लाइन
जिला मुख्यालय से लेकर केदारघाटी तक पृथक से कहीं भी हाइड्रेंट लाइन नहीं बनाई गई है। समस्या के अग्निशमन विभाग को टेंकर भरने के लिए गदेरों की तलाश करनी पड़ती है। जबकि पूरे जनपद में बस्ती क्षेत्रों में गदेरे व स्रोत दूर हैं।

वनाग्नि बुझाने में की जा रही मदद
अग्निशमन विभाग की ओर से इन दिनों वनाग्नि की घटनाओं पर त्वरित काबू पाने के लिए वन विभाग की मदद की जा रही है। बीते सप्ताह तूना-बौंठा मोटर मार्ग पर बस्ती के निकट और नया बस अड्डा में लगी आग पर त्वरित काबू पाया गया।




पर्याप्त संसाधन तो हैं, लेकिन रखने के लिए जगह नहीं है। ऐसे में मजबूरी में वाहनों को सड़क पर खड़ा करना होता है। केदारनाथ रूट या अन्य निकट स्थान पर कार्यालय के लिए पर्याप्त जगह मिल जाए, तो पूरे जनपद में विषम परिस्थितियों मे ंतत्काल मदद पहुंचाने में सहूलियत हो जाती। - ठाकुर सिंह भंडारी, एफएसओ रुद्रप्रयाग
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