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एक वर्ष बाद भी जनपद की नौ ग्राम पंचायतों में नहीं बनी मिनी सरकार
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विषम भौगोलिक परिस्थितियों व तीन विकासखंड वाले रुद्रप्रयाग जनपद में एक वर्ष से नौ ग्राम पंचायतें ग्राम प्रधान विहीन संचालित हो रही हैं। गांवों में मनरेगा समेत कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों को कई जरूरी प्रमाण पत्र व भूमि संबंधित कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
अक्तूबर 2019 में प्रदेश में तीन चरणों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराए गए थे। तब, आरक्षण के चलते जिले की 336 ग्राम पंचायतों में 9 ग्राम पंचायतों में चुनाव नहीं हो पाया था, जिस कारण वहां मिनी सरकार गठित नहीं हो पाई। लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार इन ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान का चुनाव नहीं करा पाई है, जिसका खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। जिले में जखोली विकासखंड में कपणियां, कांडा व कोटी और ऊखीमठ ब्लॉक में गुप्तकाशी, रविग्राम, गिरिया, जाल तल्ला, न्यालसू और सांकरी ग्राम पंचायत ग्राम प्रधान विहीन चल रही हैं। इन ग्राम पंचायतों में जिला निर्वाचन विभाग द्वारा वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ग्राम प्रधान का पद अनुसूचित जाति महिला, महिला, अनुसूचित जनजाति महिला/पुरूष और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया, लेकिन यहां इस जाति का एक भी व्यक्ति मूल निवासी नहीं मिला, जिस कारण ग्राम प्रधान पद पर नामांकन नहीं होने से चुनाव नहीं हो पाया। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार इन ग्राम पंचायतों में उप चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं कर पाई है। जबकि जिला स्तर पर पुन: सर्वेक्षण के बाद ग्राम पंचायतों में आरक्षण की अंतिम सूची जारी की जा चुकी है, जिसके तहत ऊखीमठ विकासखंड के ग्राम पंचायत रविग्राम व सांकरी में अब ग्राम प्रधान का पद महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है। जबकि ग्राम पंचायत गिरिया, गुप्तकाशी, जालतल्ला और न्यालसू में प्रधान पद को अनारक्षित किया गया है। उधर, जखोली में कांडा ग्राम पंचायत में प्रधान पद को अनारक्षित, कोटी और कपणिया में पूर्ववत रखा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान का पद रिक्त होने से उनके गांवों में मनरेगा समेत राज्य व केंद्र की महत्वकांक्षी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। जरूरतमंदों को अपने पंचायत स्तरीय कार्यों के लिए खंड विकास कार्यालय व ग्राम विकास अधिकारी के लिए दौड़ लगानी पड़ रही है।
इनका कहना है --
जनपद में जिन दस ग्राम पंचायतों में आरक्षण के चलते ग्राम प्रधान पद का चुनाव नहीं हो पाया था। अब वहां, आरक्षण में संशोधन कर अंतिम सूची राज्य चुनाव आयोग को भेज दी गई है। अधिसूचना जारी होने के बाद भी चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी।
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-- बसंत मेहता, पंचायत राज अधिकारी, रुद्रप्रयाग
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अक्तूबर 2019 में प्रदेश में तीन चरणों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराए गए थे। तब, आरक्षण के चलते जिले की 336 ग्राम पंचायतों में 9 ग्राम पंचायतों में चुनाव नहीं हो पाया था, जिस कारण वहां मिनी सरकार गठित नहीं हो पाई। लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार इन ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान का चुनाव नहीं करा पाई है, जिसका खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। जिले में जखोली विकासखंड में कपणियां, कांडा व कोटी और ऊखीमठ ब्लॉक में गुप्तकाशी, रविग्राम, गिरिया, जाल तल्ला, न्यालसू और सांकरी ग्राम पंचायत ग्राम प्रधान विहीन चल रही हैं। इन ग्राम पंचायतों में जिला निर्वाचन विभाग द्वारा वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ग्राम प्रधान का पद अनुसूचित जाति महिला, महिला, अनुसूचित जनजाति महिला/पुरूष और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया, लेकिन यहां इस जाति का एक भी व्यक्ति मूल निवासी नहीं मिला, जिस कारण ग्राम प्रधान पद पर नामांकन नहीं होने से चुनाव नहीं हो पाया। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार इन ग्राम पंचायतों में उप चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं कर पाई है। जबकि जिला स्तर पर पुन: सर्वेक्षण के बाद ग्राम पंचायतों में आरक्षण की अंतिम सूची जारी की जा चुकी है, जिसके तहत ऊखीमठ विकासखंड के ग्राम पंचायत रविग्राम व सांकरी में अब ग्राम प्रधान का पद महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है। जबकि ग्राम पंचायत गिरिया, गुप्तकाशी, जालतल्ला और न्यालसू में प्रधान पद को अनारक्षित किया गया है। उधर, जखोली में कांडा ग्राम पंचायत में प्रधान पद को अनारक्षित, कोटी और कपणिया में पूर्ववत रखा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान का पद रिक्त होने से उनके गांवों में मनरेगा समेत राज्य व केंद्र की महत्वकांक्षी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। जरूरतमंदों को अपने पंचायत स्तरीय कार्यों के लिए खंड विकास कार्यालय व ग्राम विकास अधिकारी के लिए दौड़ लगानी पड़ रही है।
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इनका कहना है --
जनपद में जिन दस ग्राम पंचायतों में आरक्षण के चलते ग्राम प्रधान पद का चुनाव नहीं हो पाया था। अब वहां, आरक्षण में संशोधन कर अंतिम सूची राज्य चुनाव आयोग को भेज दी गई है। अधिसूचना जारी होने के बाद भी चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी।
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-- बसंत मेहता, पंचायत राज अधिकारी, रुद्रप्रयाग