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पहाड़ की वादियों में गढ़वाली, हिंदी गीतों की धुनों पर गूंज रहे चुनावी गीत

Fri, 11 Feb 2022 10:33 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 11 Feb 2022 10:33 PM IST
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Election songs resonating to the tunes of Garhwali, Hindi songs in mountain valleys
गढ़वाली, कुमाऊंनी और हिंदी गीतों की धुनों पर उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के गीत इन दिनों नगर से लेकर गांव व गलियों में गूंज रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस, आप और उक्रांद के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशियों ने गीतों को अपने प्रचार का मुख्य माध्यम बनाया है। ऐसे में स्थानीय कलाकारों को गीत लेखन, गायन और संगीत का मौका मिल रहा है।
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कका, बोड़ा, भै-बंधु, दीदी-भुलियो, ह्वे जवा तैयार, दीदी, भुलियो हम सबिन्यु एकजुट ह्वे जाण..., केदारनाथ को बोल्यू च ... तोल्यू च, धरती को लाल, सुण जा, देवभूमि आज कन धै लगाणी च सहित कई चुनावी गीत इन दिनों गूंज रहे हैं। वहीं, भजन-कीर्तन और भक्तिमय गीतों के जरिए भी गांवों में समर्थक अपने-अपने प्रत्याशी का प्रचार कर रहे हैं। स्लोगन की लाइनें भी चुनावी नारा बनी हुई हैं। इन चुनावी गीतों के जरिए राजनीतिक दलों से लेकर निर्दलीय समर्थक मतदाताओं से अपने प्रत्याशी के पक्ष में वोट की अपील कर रहे हैं।
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जिले में रंगमंच से जुड़े कई लोगों के द्वारा पार्टियों व निर्दलीयों के लिए चुनावी गीत लिखे गाए गए हैं। लोक गायक सुनील थपलियाल ने बताया कि आप व भाजपा ने उन्हें चुनाव प्रचार गीत तैयार करने को कहा था। उन्होंने एक गीत आप और दो गीत भाजपा के लिए लिखे, जिन्हें स्वयं संगीत में पिरोकर गाया भी है। वहीं, लोक गायक सचिन सिंधवाल ने बताया कि उन्होंने भाजपा व कांग्रेस के लिए चुनावी गीत लिखे और गाए हैं। इधर, पांडवाज ग्रुप के सलिल डोभाल ने बताया कि उत्तराखंड राज्य में 2017 के विस चुनाव से गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी व हिंदी गीतों के जरिए पार्टियों ने प्रचार का नया पैटर्न शुरू हुआ था। हर पार्टी, चर्चित धुनों, गीतों पर अपने गीत व नारा तैयार करवाना चाह रही है। इस बार भी आप, भाजपा, कांग्रेस और उक्रांद ने अपने गीत तैयार कराए हैं। साथ ही कई निर्दलीयों ने भी गढ़वाली व हिंदी गीतों की धुनों पर प्रचार गीत गाए हैं। पार्टी व प्रत्याशी गीतों के जरिए सीधे मतदाता तक पहुंचने का प्रयास करती हैं। क्योंकि संगीत को सुनना हर कोई पसंद करता है।
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