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कांडा-भरदार ताल से कई पेयजल स्रोत हुए पुनर्जीवित
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जखोली ब्लॉक के भरदार पट्टी के कांडा गांव के ग्रामीणों की मेहनत रंग लाई है। बरसाती पानी के संरक्षण के लिए तैयार किए गए ताल में जमा पानी से गांव समेत आसपास के कई पेयजल स्रोत पुनर्जीवित हो गए हैं, जिससे पेयजल समस्या दूर होने लगी है।
कांडा के ग्रामीणों द्वारा मनरेगा योजना में दो वर्ष पूर्व पेयजल स्रोत के निकट ही 50 मीटर लंबे व 30 मीटर चौड़ाई का ताल बनाया गया था। बीते दो वर्षों में ताल में बरसात का 15 लाख लीटर से अधिक पानी जमा होने से कांडा गांव का पेयजल स्रोत पुन: रिचार्ज हो गया। साथ ही निचले गांव रतनपुर के कुएं और पिनगड़ी गांव के धारे में मुख्य स्रोत भी पुनर्जीवित होने के साथ ही उनका जलस्तर भी बढ़ा है। इस ताल का निर्माण ऐसी जगह पर किया गया है, जहां पर पहाड़ी से बरसाती पानी इसमें ठहरता है। जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर ने बताया कि बरसाती जल संरक्षण के कांडा-भरदार में बनाया गया ताल लाभकारी साबित हो रहा है। सूखने के कगार पर पहुंच चुके प्राकृतिक स्रोतों से इस ताल से नया जीवन मिला है। वर्ष 2018-19 में जिले में मनरेगा में गांवों में बने ताल, खंतियों में बरसाती सीजन में 72 लाख लीटर से अधिक पानी जमा हुआ था, जिससे कई स्रोतों को नया जीवन मिला। संवाद
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कांडा के ग्रामीणों द्वारा मनरेगा योजना में दो वर्ष पूर्व पेयजल स्रोत के निकट ही 50 मीटर लंबे व 30 मीटर चौड़ाई का ताल बनाया गया था। बीते दो वर्षों में ताल में बरसात का 15 लाख लीटर से अधिक पानी जमा होने से कांडा गांव का पेयजल स्रोत पुन: रिचार्ज हो गया। साथ ही निचले गांव रतनपुर के कुएं और पिनगड़ी गांव के धारे में मुख्य स्रोत भी पुनर्जीवित होने के साथ ही उनका जलस्तर भी बढ़ा है। इस ताल का निर्माण ऐसी जगह पर किया गया है, जहां पर पहाड़ी से बरसाती पानी इसमें ठहरता है। जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर ने बताया कि बरसाती जल संरक्षण के कांडा-भरदार में बनाया गया ताल लाभकारी साबित हो रहा है। सूखने के कगार पर पहुंच चुके प्राकृतिक स्रोतों से इस ताल से नया जीवन मिला है। वर्ष 2018-19 में जिले में मनरेगा में गांवों में बने ताल, खंतियों में बरसाती सीजन में 72 लाख लीटर से अधिक पानी जमा हुआ था, जिससे कई स्रोतों को नया जीवन मिला। संवाद
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