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डोली की विदाई पर हुए भावुक
ब्यूरो/ अमर उजाला, ऊखीमठ
Updated Thu, 05 May 2016 09:33 PM IST
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ओंकारेश्वर मंदिर में सुबह से ही बाबा केदार के दर्शनों के लिए भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बाद जैसे ही बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली की विदाई होने लगी, तो मंदिर परिसर में मौजूद भक्त भावुक हो गए। बाबा केदार हमारू भी ख्याल राखी, तेरा ही सहारा छा, जन त्वीन हमारू ख्याल यख राखी, तख बटिन भी रखणी रै..।
वर्ष 2012 की ऊखीमठ और 2013 की केदारनाथ आपदा में मिले दर्द से उभरती केदारघाटी में बाबा केदार की यात्रा को लेकर उत्साह चरम पर है। मंदिर में अपने आराध्य के दर्शनों को पहुंचे भक्तों के जयकारों से ओंकारेश्वर धाम गूंजायमान रहा। प्रात: 10.15 बजे बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली ओंकारेश्वर मंदिर से प्रस्थान कर अलग-अलग रास्तों से होते हुए दोपहर बाद गुप्तकाशी विश्नाथ मंदिर पहुंची।
इस दौरान रास्ते में सैकड़ों हाथ सुख-समृद्धि की आस के लिए उठते रहे। कई भक्त तो अपने आराध्य को विदा करते समय फूट-फूटकर रोते भी दिखे। आचार्य हर्ष जमलोकी, पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, केशव रावत आदि का कहना है कि इस वर्ष, आपदा से पूर्व की तरह यात्रा को लेकर उल्लास नजर आ रहा है, जो सुखद है।
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वर्ष 2012 की ऊखीमठ और 2013 की केदारनाथ आपदा में मिले दर्द से उभरती केदारघाटी में बाबा केदार की यात्रा को लेकर उत्साह चरम पर है। मंदिर में अपने आराध्य के दर्शनों को पहुंचे भक्तों के जयकारों से ओंकारेश्वर धाम गूंजायमान रहा। प्रात: 10.15 बजे बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली ओंकारेश्वर मंदिर से प्रस्थान कर अलग-अलग रास्तों से होते हुए दोपहर बाद गुप्तकाशी विश्नाथ मंदिर पहुंची।
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इस दौरान रास्ते में सैकड़ों हाथ सुख-समृद्धि की आस के लिए उठते रहे। कई भक्त तो अपने आराध्य को विदा करते समय फूट-फूटकर रोते भी दिखे। आचार्य हर्ष जमलोकी, पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, केशव रावत आदि का कहना है कि इस वर्ष, आपदा से पूर्व की तरह यात्रा को लेकर उल्लास नजर आ रहा है, जो सुखद है।
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