{"_id":"39afa4dfae8e9e6d7c98f2b719b59e7e","slug":"disaster-affected-women-were-becoming-self-sufficient-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदा प्रभावित महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदा प्रभावित महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर
अमर उजाला रुद्रप्रयाग
Updated Wed, 30 Dec 2015 05:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वर्ष 2013 में केदारनाथ त्रासदी में कई महिलाओं ने अपना सुहाग खो दिया था। ऐसे में इनके सामने परिवार के लालन-पालन की जिम्मेदारी खड़ी हो गई थी। इस स्थिति में मंदाकिनी बुनकर समिति ने इन महिलाओं को सहारा दिया। समिति ने इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का शुरू किया है।
इसमें सिलाई, कताई, छटाई, बिनाई, कढ़ाई, पेंटिंग, फिनिशिंग, पैकिंग व टैगिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में केदारघाटी की तीन सौ महिलाएं आठ केंद्रों में प्रशिक्षण ले रही हैं। इन्हें प्रशिक्षण के साथ-साथ 1800 रुपये प्रतिमाह मानदेय भी दिया जा रहा है।
मंदाकिनी बुनकर समिति के निदेशक हरीकृष्ण बगवाड़ी बताते हैं कि प्रतिदिन चार घंटे प्रशिक्षण के बाद ये अपने घरों का रोजमर्रा के काम भी पूरा करती है। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं स्वयं उत्पाद तैयार कर सकती हैं। इसके लिए समिति उन्हें बेहतर मार्केट उपलब्ध कराने के प्रयास करेगी।
विज्ञापन
समिति के साथ जुड़कर एक लक्ष्य मिल गया है। आज खुद को आत्मनिर्भर महसूस करती हूं। विषम परिस्थितियों से लड़ना सीख लिया है। - विनीता शुक्ला, प्रशिक्षणार्थी।
प्रशिक्षण से जिंदगी को जीने का सलीका मिला है। आज घर के कामों के साथ-साथ सिलाई, कताई, बुनाई सीखने से अपने पैरों पर खड़े होने से आत्मविश्वास बढ़ा है। - रीता वाजपेई, प्रशिक्षणार्थी।
विज्ञापन
इसमें सिलाई, कताई, छटाई, बिनाई, कढ़ाई, पेंटिंग, फिनिशिंग, पैकिंग व टैगिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में केदारघाटी की तीन सौ महिलाएं आठ केंद्रों में प्रशिक्षण ले रही हैं। इन्हें प्रशिक्षण के साथ-साथ 1800 रुपये प्रतिमाह मानदेय भी दिया जा रहा है।
विज्ञापन
मंदाकिनी बुनकर समिति के निदेशक हरीकृष्ण बगवाड़ी बताते हैं कि प्रतिदिन चार घंटे प्रशिक्षण के बाद ये अपने घरों का रोजमर्रा के काम भी पूरा करती है। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं स्वयं उत्पाद तैयार कर सकती हैं। इसके लिए समिति उन्हें बेहतर मार्केट उपलब्ध कराने के प्रयास करेगी।
विज्ञापन
समिति के साथ जुड़कर एक लक्ष्य मिल गया है। आज खुद को आत्मनिर्भर महसूस करती हूं। विषम परिस्थितियों से लड़ना सीख लिया है। - विनीता शुक्ला, प्रशिक्षणार्थी।
प्रशिक्षण से जिंदगी को जीने का सलीका मिला है। आज घर के कामों के साथ-साथ सिलाई, कताई, बुनाई सीखने से अपने पैरों पर खड़े होने से आत्मविश्वास बढ़ा है। - रीता वाजपेई, प्रशिक्षणार्थी।