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डिग्री कॉलेज रुद्रप्रयाग को भवन की दरकार
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जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में राजकीय डिग्री कॉलेज को 15 वर्ष बाद भी अपना कैंपस नहीं मिल पाया है। महाविद्यालय, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के पुराने भवन में चल रहा है। यहां पर्याप्त जगह के अभाव में शिक्षण व शिक्षणेत्तर गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
वर्ष 2006 में बीबीए पाठ्यक्रम के साथ रुद्रप्रयाग में डिग्री कॉलेज खोला गया, जो स्थापना के डेढ़ वर्ष बाद भी व्यवस्था के सहारे चल रहा है। छात्र नेता विक्रांत चौधरी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आशीष कप्रवाण, रूपेश सेमवाल का कहना है कि जगह के अभाव में कॉलेज में शैक्षणिक गतिविधियां संचालित नहीं हो पाती हैं। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और उच्च व पूर्व में जिला प्रभारी रहे शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत को स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। उच्च शिक्षा मंत्री ने कॉलेज का जायजा लेकर प्राथमिकता से निस्तारण का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
कैंपस के लिए जवाड़ी गांव के पास वर्ष 2010 में भूमि का चयन किया गया था। करीब छह वर्ष पूर्व केंद्र सरकार के रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) से भवन निर्माण के लिए करीब 2.40 करोड़ का बजट मिला था। मृदा परीक्षण समेत अन्य औपचारिकताओं के बाद तीन वर्ष पूर्व भवन निर्माण शुरू हुआ, लेकिन अब तक चार कक्ष ही बन पाए हैं।
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विज्ञान संकाय की नहीं मिली मान्यता
राजकीय महाविद्यालय रुद्रप्रयाग को स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी विज्ञान की मान्यता नहीं मिल पाई है। कॉलेज की शुरुआत 2006 में बीबीए पाठ्यक्रम के साथ हुई। इसके बाद 2010 में बीसीए की मान्यता मिली, जबकि 2016 में कला संकाय में राजनीति विज्ञान, समाज शास्त्र, इतिहास, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी और हिंदी विषय का संचालन शुरू हुआ।
जगह के अभाव में कॉलेज में शिक्षण व शिक्षणेत्तर गतिविधियों में दिक्कतें आ रही हैं। जवाड़ी में कैंपस के निर्माण के तहत चार कक्ष तैयार हो रहे हैं, जबकि दूसरे भवन की बुनियाद पड़ चुकी है। शासन व निदेशालय को भी अवगत कराया गया है।
- डॉ. जगमोहन सिंह रावत, प्रभारी, प्राचार्य डिग्री कॉलेज, रुद्रप्रयाग
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वर्ष 2006 में बीबीए पाठ्यक्रम के साथ रुद्रप्रयाग में डिग्री कॉलेज खोला गया, जो स्थापना के डेढ़ वर्ष बाद भी व्यवस्था के सहारे चल रहा है। छात्र नेता विक्रांत चौधरी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आशीष कप्रवाण, रूपेश सेमवाल का कहना है कि जगह के अभाव में कॉलेज में शैक्षणिक गतिविधियां संचालित नहीं हो पाती हैं। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और उच्च व पूर्व में जिला प्रभारी रहे शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत को स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। उच्च शिक्षा मंत्री ने कॉलेज का जायजा लेकर प्राथमिकता से निस्तारण का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
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कैंपस के लिए जवाड़ी गांव के पास वर्ष 2010 में भूमि का चयन किया गया था। करीब छह वर्ष पूर्व केंद्र सरकार के रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) से भवन निर्माण के लिए करीब 2.40 करोड़ का बजट मिला था। मृदा परीक्षण समेत अन्य औपचारिकताओं के बाद तीन वर्ष पूर्व भवन निर्माण शुरू हुआ, लेकिन अब तक चार कक्ष ही बन पाए हैं।
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विज्ञान संकाय की नहीं मिली मान्यता
राजकीय महाविद्यालय रुद्रप्रयाग को स्थापना के डेढ़ दशक बाद भी विज्ञान की मान्यता नहीं मिल पाई है। कॉलेज की शुरुआत 2006 में बीबीए पाठ्यक्रम के साथ हुई। इसके बाद 2010 में बीसीए की मान्यता मिली, जबकि 2016 में कला संकाय में राजनीति विज्ञान, समाज शास्त्र, इतिहास, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी और हिंदी विषय का संचालन शुरू हुआ।
जगह के अभाव में कॉलेज में शिक्षण व शिक्षणेत्तर गतिविधियों में दिक्कतें आ रही हैं। जवाड़ी में कैंपस के निर्माण के तहत चार कक्ष तैयार हो रहे हैं, जबकि दूसरे भवन की बुनियाद पड़ चुकी है। शासन व निदेशालय को भी अवगत कराया गया है।
- डॉ. जगमोहन सिंह रावत, प्रभारी, प्राचार्य डिग्री कॉलेज, रुद्रप्रयाग