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फौजी मटकोटा में सार्वजनिक परिवहन सुविधा नहीं
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भूरारानी से फौजी मटकोटा को जाती खस्ताहाल सड़क।
- फोटो : RUDRAPUR
सेना से सेवानिवृत्त लोगों और शहीदों के परिजनों को बसाने के लिए 50 वर्ष पूर्व स्थापित किए गए फौजी मटकोटा क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है। रुद्रपुर का यह दूरस्थ गांव परिसीमन के बाद नगर निगम में शामिल होने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है। नगर निगम के वार्ड 32 में पड़ने वाले इस क्षेत्र के गरीब तबके के लोग आज भी पैदल या साइकिल पर ही निर्भर हैं।
फौजी मटकोटा से भूरारानी मार्ग तक पैदल आने के लिए करीब डेढ़ किमी चलना पड़ता है। भूरारानी मार्ग में भी सार्वजनिक परिवहन की सुविधा न होने से कुछ लोग रिस्क लेकर रेलवे की पटरी पार कर नैनीताल हाईवे पर पहुंचते हैं तो कुछ लिफ्ट लेकर रुद्रपुर। फौजी मटकोटा स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में तैनात कई शिक्षक-शिक्षिकाएं भी पैदल ही कॉलेज तक पहुंचते हैं। इस मुद्दे पर अमर उजाला ने फौटी मटकोटा के लोगों और वहां तैनात शिक्षक-शिक्षकाओं से बातचीत की।
फौजी मटकोटा बहुत पुराना बसा हुआ गांव है लेकिन आज तक इस गांव में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा तक नहीं है। गरीब तबके लोग अभी भी पैदल ही रुद्रपुर पहुंचते हैं। - विनीत।
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फौजी मटकोटा से भूरारानी मार्ग तक पहुंचने के लिए करीब डेढ़ किमी पैदल चलना पड़ता है। शासन और प्रशासन ने इस क्षेत्र की उपेक्षा ही की है। प्रशासन को परिवहन की सुविधा शुरू करनी चाहिए। - देवेंद्र सिंह।
मूलभूत सुविधाएं नहीं दे पाना शासन-प्रशासन का गैरजिम्मेदाराना रवैया दर्शाता है। किसी भी राजनेता ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। चुनाव के समय सिर्फ लोकलुभावन वायदे ही किए जाते हैं। - ममता।
मैं सिडकुल की एक फैक्ट्री में नौकरी करता हूं। प्रतिदिन साइकिल से कंपनी पहुंचना पड़ता है। यदि भूरारानी मार्ग पर दिन में एक या दो बार भी टेंपो, ई-रिक्शा या बस मिलते तो काफी सुविधा होती। - प्रदीप।
गांव में बुकिंग पर भी ई-रिक्शा और टेंपो आसानी से नहीं मिल पाते हैं। कई बार रात के समय परिवार के सदस्य का स्वास्थ्य बिगड़ने में अस्पताल पहुंचाने में दिक्कतें आती हैं। गरीब तबके के लोगों के साथ अधिक दिक्कते हैं। - धर्मवीर सिंह।
मैं सामिया लेक सिटी में रहता हूं। फौजी मटकोटा इंटर कॉलेज तक आने के लिए कोई सार्वजनिक परिवहन की सुविधा न होने के कारण फौजी मटकोटा इंटर कॉलेज तक पैदल आना पड़ता है। - मनोज रंजन कुुमार, प्रधानाचार्य, फौजी मटकोटा इंटर कॉलेज।
मैं आवास विकास से मेट्रोपोलिस के पास तक ऑटो से पहुंचती हूं। उसके बाद फौजी मटकोटा इंटर कॉलेज पहुंचने के लिए रेलवे ट्रैक पार कर पैदल आना पड़ता है। - हर्षिता भट्ट, शिक्षिका।
फौजी मटकोटा इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले कई बच्चे बहुत दूर से पैदल चलकर आते हैं। कुछ बच्चे साइकिल से भी आते हैं। लेकिन इस गांव में दिन के समय एक या दो बार टेम्पो चलना चाहिए। - रामकृष्ण तिवारी, शिक्षक।
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फौजी मटकोटा से भूरारानी मार्ग तक पैदल आने के लिए करीब डेढ़ किमी चलना पड़ता है। भूरारानी मार्ग में भी सार्वजनिक परिवहन की सुविधा न होने से कुछ लोग रिस्क लेकर रेलवे की पटरी पार कर नैनीताल हाईवे पर पहुंचते हैं तो कुछ लिफ्ट लेकर रुद्रपुर। फौजी मटकोटा स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में तैनात कई शिक्षक-शिक्षिकाएं भी पैदल ही कॉलेज तक पहुंचते हैं। इस मुद्दे पर अमर उजाला ने फौटी मटकोटा के लोगों और वहां तैनात शिक्षक-शिक्षकाओं से बातचीत की।
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फौजी मटकोटा बहुत पुराना बसा हुआ गांव है लेकिन आज तक इस गांव में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा तक नहीं है। गरीब तबके लोग अभी भी पैदल ही रुद्रपुर पहुंचते हैं। - विनीत।
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फौजी मटकोटा से भूरारानी मार्ग तक पहुंचने के लिए करीब डेढ़ किमी पैदल चलना पड़ता है। शासन और प्रशासन ने इस क्षेत्र की उपेक्षा ही की है। प्रशासन को परिवहन की सुविधा शुरू करनी चाहिए। - देवेंद्र सिंह।
मूलभूत सुविधाएं नहीं दे पाना शासन-प्रशासन का गैरजिम्मेदाराना रवैया दर्शाता है। किसी भी राजनेता ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। चुनाव के समय सिर्फ लोकलुभावन वायदे ही किए जाते हैं। - ममता।
मैं सिडकुल की एक फैक्ट्री में नौकरी करता हूं। प्रतिदिन साइकिल से कंपनी पहुंचना पड़ता है। यदि भूरारानी मार्ग पर दिन में एक या दो बार भी टेंपो, ई-रिक्शा या बस मिलते तो काफी सुविधा होती। - प्रदीप।
गांव में बुकिंग पर भी ई-रिक्शा और टेंपो आसानी से नहीं मिल पाते हैं। कई बार रात के समय परिवार के सदस्य का स्वास्थ्य बिगड़ने में अस्पताल पहुंचाने में दिक्कतें आती हैं। गरीब तबके के लोगों के साथ अधिक दिक्कते हैं। - धर्मवीर सिंह।
मैं सामिया लेक सिटी में रहता हूं। फौजी मटकोटा इंटर कॉलेज तक आने के लिए कोई सार्वजनिक परिवहन की सुविधा न होने के कारण फौजी मटकोटा इंटर कॉलेज तक पैदल आना पड़ता है। - मनोज रंजन कुुमार, प्रधानाचार्य, फौजी मटकोटा इंटर कॉलेज।
मैं आवास विकास से मेट्रोपोलिस के पास तक ऑटो से पहुंचती हूं। उसके बाद फौजी मटकोटा इंटर कॉलेज पहुंचने के लिए रेलवे ट्रैक पार कर पैदल आना पड़ता है। - हर्षिता भट्ट, शिक्षिका।
फौजी मटकोटा इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले कई बच्चे बहुत दूर से पैदल चलकर आते हैं। कुछ बच्चे साइकिल से भी आते हैं। लेकिन इस गांव में दिन के समय एक या दो बार टेम्पो चलना चाहिए। - रामकृष्ण तिवारी, शिक्षक।