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टेलर मास्टर की बेटी अलीशा ने हासिल की 18वीं रैंक, बनना चाहती है आईएएस
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गदरपुर में अलीशा की उपलब्धि पर मिठाई खिलाते पिता याकूब।
- फोटो : RUDRAPUR
क्षेत्र के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की छात्रा अलीशा ने इंटर की परीक्षा में 94.6 फीसदी अंक प्राप्त कर टॉप 25 की सूची में 18वीं रैंक हासिल की है। टेलर की बेटी ने मेहनत के बल पर अच्छे अंक हासिल किए हैं और उसका सपना आईएएस अधिकारी बनने का है। उसने सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ प्रधानाचार्य माया चनयाना और अन्य शिक्षिकाओं को दिया है।
अलीशा के पिता 30 वर्षों से कपड़े सिलने का काम कर रहे हैं। अलीशा की मां तबस्सुम गृहणी हैं। मोहम्मद याकूब की पांच संतानों में अलीशा सबसे छोटी हैं। याकूब ही सिलाई से होने वाली आमदनी से परिवार का गुजरा होता है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद होनहार अलीशा ने कड़ी मेहनत व लगन के बल पर प्रदेश में अपना और विद्यालय का नाम रोशन किया है।
अलीशा ने बताया कि स्कूल से आने के बाद वह एक घंटा आराम करने के बाद नियमित सात से आठ घंटा पढ़ाई करती थीं। घर के हालात सही न होने पर जब किताबें खरीदने में समस्या आती थी तो स्कूल की शिक्षिका बबीता, वैशाली जोशी व उर्वशी उनकी मदद करती थीं। उसका सपना आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करने का है।
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वहीं बेटी की सफलता से गदगद याकूब का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण अलीशा को शिक्षा कार्य में परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन अलीशा ने अपनी सच्ची लगन के बल पर शिक्षा कार्य प्रभावित नहीं होने दिया। उन्हें बेटी पर गर्व है।
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अलीशा के पिता 30 वर्षों से कपड़े सिलने का काम कर रहे हैं। अलीशा की मां तबस्सुम गृहणी हैं। मोहम्मद याकूब की पांच संतानों में अलीशा सबसे छोटी हैं। याकूब ही सिलाई से होने वाली आमदनी से परिवार का गुजरा होता है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद होनहार अलीशा ने कड़ी मेहनत व लगन के बल पर प्रदेश में अपना और विद्यालय का नाम रोशन किया है।
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अलीशा ने बताया कि स्कूल से आने के बाद वह एक घंटा आराम करने के बाद नियमित सात से आठ घंटा पढ़ाई करती थीं। घर के हालात सही न होने पर जब किताबें खरीदने में समस्या आती थी तो स्कूल की शिक्षिका बबीता, वैशाली जोशी व उर्वशी उनकी मदद करती थीं। उसका सपना आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करने का है।
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वहीं बेटी की सफलता से गदगद याकूब का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण अलीशा को शिक्षा कार्य में परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन अलीशा ने अपनी सच्ची लगन के बल पर शिक्षा कार्य प्रभावित नहीं होने दिया। उन्हें बेटी पर गर्व है।