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गौरीकुंड बदल गया गर्म पानी की धारा में
Rudraprayag
Updated Thu, 30 Oct 2014 05:32 AM IST
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गुप्तकाशी। केदारघाटी जल प्रलय में ध्वस्त मां गौरी (पार्वती) के तप्त कुंड की न तो प्रदेश सरकार सुध ले रही है और न ही श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति। जहां गर्म पानी के कुंड में स्नान कर लोग अपनी थकान मिटाया करते थे, वहां पीले पानी की धारा दिखाई दे रही है। इसके इर्द-गिर्द भी गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।
गौरीकुंड केदारनाथ यात्रा में मोटर मार्ग का अंतिम पड़ाव है। यह स्थान मां गौरा का मंदिर और तप्त कुंड के लिए प्रसिद्ध है। पिछले वर्ष जून माह की जलप्रलय में मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा और कुंड ध्वस्त हो गया। मंदिर का तो जीर्णोद्धार कर दिया गया, लेकिन ध्वस्त कुंड की स्थिति आज भी जस की तस है। जिस स्थान पर कभी कुंड हुआ करता था, वहां सिर्फ गर्म पानी का स्रोत दिखाई दे रहा है। इस स्रोत के चारों ओर गंदगी के अंबार लगे हैं। इसी स्रोत से नल जोड़कर काम चलाया जा रहा है। यदि कोई श्रद्धालु यहां आता है, तो वह इसी नल पर नहाकर चला जाता है।
मां गौरा करती थी स्नान
मान्यता है कि गौरीगांव के नीचे स्थित तप्तकुंड में मां पार्वती स्नान करतीं थी, इसलिए इसका नाम गौरीकुंड पड़ा। इस कुंड में स्नान कर जहां थकान मिटती है वहीं कई रोगों का निदान भी होता है।
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रोजी-रोटी छिनी
गुप्तकाशी। तप्तकुंड के ध्वस्त होने से जमलोकी ब्राह्मणों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है। रविग्राम निवासी नरेंद्र जमलोकी और रमेश जमलोकी बताते हैं कि संवत 1821 में तत्कालीन टिहरी नरेश प्रदीप शाह ने तप्तकुंड में पूजा का अधिकार रविग्राम के जमलोकी ब्राह्मणों को दिया था। यात्राकाल में सात परिवार रोटेशन में यहां पूजा करते थे। आपदा में कुंड के ध्वस्त होने के बाद सरकारी तंत्र ने अन्य स्थानों में तो कार्य कराए, लेकिन कुंड की ओर ध्यान नहीं दिया। जब यहां कुंड होेगा, तभी यहां की महत्ता पुन: स्थापित हो पाएगी।
गौरीकुंड के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस पर निर्णय शासन द्वारा ही लिया जाना है।
-अनिल शर्मा, कार्याधिकारी, बीकेटीसी
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गौरीकुंड केदारनाथ यात्रा में मोटर मार्ग का अंतिम पड़ाव है। यह स्थान मां गौरा का मंदिर और तप्त कुंड के लिए प्रसिद्ध है। पिछले वर्ष जून माह की जलप्रलय में मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा और कुंड ध्वस्त हो गया। मंदिर का तो जीर्णोद्धार कर दिया गया, लेकिन ध्वस्त कुंड की स्थिति आज भी जस की तस है। जिस स्थान पर कभी कुंड हुआ करता था, वहां सिर्फ गर्म पानी का स्रोत दिखाई दे रहा है। इस स्रोत के चारों ओर गंदगी के अंबार लगे हैं। इसी स्रोत से नल जोड़कर काम चलाया जा रहा है। यदि कोई श्रद्धालु यहां आता है, तो वह इसी नल पर नहाकर चला जाता है।
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मां गौरा करती थी स्नान
मान्यता है कि गौरीगांव के नीचे स्थित तप्तकुंड में मां पार्वती स्नान करतीं थी, इसलिए इसका नाम गौरीकुंड पड़ा। इस कुंड में स्नान कर जहां थकान मिटती है वहीं कई रोगों का निदान भी होता है।
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रोजी-रोटी छिनी
गुप्तकाशी। तप्तकुंड के ध्वस्त होने से जमलोकी ब्राह्मणों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है। रविग्राम निवासी नरेंद्र जमलोकी और रमेश जमलोकी बताते हैं कि संवत 1821 में तत्कालीन टिहरी नरेश प्रदीप शाह ने तप्तकुंड में पूजा का अधिकार रविग्राम के जमलोकी ब्राह्मणों को दिया था। यात्राकाल में सात परिवार रोटेशन में यहां पूजा करते थे। आपदा में कुंड के ध्वस्त होने के बाद सरकारी तंत्र ने अन्य स्थानों में तो कार्य कराए, लेकिन कुंड की ओर ध्यान नहीं दिया। जब यहां कुंड होेगा, तभी यहां की महत्ता पुन: स्थापित हो पाएगी।
गौरीकुंड के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस पर निर्णय शासन द्वारा ही लिया जाना है।
-अनिल शर्मा, कार्याधिकारी, बीकेटीसी