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मंदिर की पवित्रता से समझौते को तैयार नहीं उमा
Rudraprayag
Updated Thu, 23 Oct 2014 05:32 AM IST
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केदारनाथ। केंद्रीय मंत्री साध्वी उमा भारती केदारनाथ पुनर्निर्माण मसले पर हक-हकूकधारियों को साथ देने का वादा कर चली गई। लेकिन उन्होंने मंदिर की पवित्रता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ किसी भी समझौते के साथ इनकार किया है।
विभिन्न क्षेत्रों के एक्सपर्ट के साथ केदारनाथ के निरीक्षण के लिए पहुंची उमा ने तीर्थ-पुरोहितों को डांटा-डपटा, तो पुचकारा भी। तीर्थ पुरोहितों ने उनके समक्ष तीन मांग रखी, तो उमा ने भी तीन शर्त रख दी। उमा भारती ने साफ कह दिया कि पहले केदारबाबा है, दूसरे स्थान पर तीर्थ पुरोहित। हालांकि तीर्थ पुरोहिताें के हक के साथ अहित नहीं होने दिया जाएगा। तीर्थ पुरोहित समाज ने आपदा से बचे भवनों को यथावत रखने, क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत और जिन लोगों के भवन ध्वस्त हो गए हैं, उनको दोबारा उसी स्थान पर बसाने की मंाग की। जवाब में उमा ने साफ कह दिया कि देवदर्शनी से मंदिर के आगे स्थापित नंदी बैल की प्रतिमा दिखाई दे, यह रूप होना चाहिए। सरस्वती और मंदाकिनी नदी के संगम के बीच के स्थान पर मलमूत्र विसर्जन (यानि कि होटल निर्माण न हो) नहीं होना चाहिए। पुराणों में भी इसका उल्लेख किया गया है। मंदिर समीप सिर्फ एक मंजिल दुकानों का निर्माण हो। ताकि मंदिर की अस्मिता को ठेस नहीं पहुंचे। ऐसा न हो कि मंदिर ढक जाए।
उन्होंने कहा कि हक-हकूकधारियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। जो प्रभावित व्यापारी जहां का है, उसको उसी स्थान पर पुनर्वासित किया जाएगा। उनकी भूमि पर बाहरी व्यक्ति को नहीं बसने दिया जाएगा। पुराने स्थान पर बसाने कि जिद पर उन्होंने कहा कि वह उनकी बेटी-बहन है और इसी रूप में आई है। यदि जबरदस्ती करेंगे, तो उनको मुख्यमंत्री हरीश रावत (यानि कि सरकारी तंत्र) के हवाले कर दूंगी। तब सब कुछ सरकारी हिसाब से होगा। वह किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगी। उमा का मूड देखकर तीर्थ पुरोहित भी बोल उठे कि ‘दीदी आप हमारा साथ मत छोड़ना’।
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कुंडों के जीर्णोद्धार पर जोर
केदारनाथ। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने आपदा से क्षतिग्रस्त और तबाह हो चुके पवित्र कुंडों के जीर्णोद्धार की बात कही है। उन्होंने कहा कि कुंडों का पौराणिक महत्व है। तीर्थयात्री इन कुंडों में पूजा कराते हैं। इसलिए उनका जीर्णोद्धार और पुनर्जीवित करना जरूरी है।
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विभिन्न क्षेत्रों के एक्सपर्ट के साथ केदारनाथ के निरीक्षण के लिए पहुंची उमा ने तीर्थ-पुरोहितों को डांटा-डपटा, तो पुचकारा भी। तीर्थ पुरोहितों ने उनके समक्ष तीन मांग रखी, तो उमा ने भी तीन शर्त रख दी। उमा भारती ने साफ कह दिया कि पहले केदारबाबा है, दूसरे स्थान पर तीर्थ पुरोहित। हालांकि तीर्थ पुरोहिताें के हक के साथ अहित नहीं होने दिया जाएगा। तीर्थ पुरोहित समाज ने आपदा से बचे भवनों को यथावत रखने, क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत और जिन लोगों के भवन ध्वस्त हो गए हैं, उनको दोबारा उसी स्थान पर बसाने की मंाग की। जवाब में उमा ने साफ कह दिया कि देवदर्शनी से मंदिर के आगे स्थापित नंदी बैल की प्रतिमा दिखाई दे, यह रूप होना चाहिए। सरस्वती और मंदाकिनी नदी के संगम के बीच के स्थान पर मलमूत्र विसर्जन (यानि कि होटल निर्माण न हो) नहीं होना चाहिए। पुराणों में भी इसका उल्लेख किया गया है। मंदिर समीप सिर्फ एक मंजिल दुकानों का निर्माण हो। ताकि मंदिर की अस्मिता को ठेस नहीं पहुंचे। ऐसा न हो कि मंदिर ढक जाए।
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उन्होंने कहा कि हक-हकूकधारियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। जो प्रभावित व्यापारी जहां का है, उसको उसी स्थान पर पुनर्वासित किया जाएगा। उनकी भूमि पर बाहरी व्यक्ति को नहीं बसने दिया जाएगा। पुराने स्थान पर बसाने कि जिद पर उन्होंने कहा कि वह उनकी बेटी-बहन है और इसी रूप में आई है। यदि जबरदस्ती करेंगे, तो उनको मुख्यमंत्री हरीश रावत (यानि कि सरकारी तंत्र) के हवाले कर दूंगी। तब सब कुछ सरकारी हिसाब से होगा। वह किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगी। उमा का मूड देखकर तीर्थ पुरोहित भी बोल उठे कि ‘दीदी आप हमारा साथ मत छोड़ना’।
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कुंडों के जीर्णोद्धार पर जोर
केदारनाथ। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने आपदा से क्षतिग्रस्त और तबाह हो चुके पवित्र कुंडों के जीर्णोद्धार की बात कही है। उन्होंने कहा कि कुंडों का पौराणिक महत्व है। तीर्थयात्री इन कुंडों में पूजा कराते हैं। इसलिए उनका जीर्णोद्धार और पुनर्जीवित करना जरूरी है।