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सरस्वती-मंदाकिनी केे संगम पर बनेगा आशीर्वाद स्थल
Rudraprayag
Updated Wed, 22 Oct 2014 05:32 AM IST
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केदारनाथ। केदारनाथ मंदिर के अंदर और परिसर में पूजा कराने वाले यात्रियों की भीड़ कम करने के लिए सरस्वती और मंदाकिनी नदी के संगम पर घाट का निर्माण किया जाएगा। इसको केदार सुफल आशीर्वाद स्थल का नाम दिया जा रहा है। इस स्थान में तीर्थ पुरोहित अपने यजमानों की पूजा-तर्पण सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान कराएंगे। साथ ही मंदिर के पीछे स्मृति वाटिका बनाई जाएगी। जिसमें ब्रह्मकमल उगाए जाएंगे। प्रदेश कैबिनेट ने भी श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
पिछले साल आई आपदा के बाद केदारनाथ धाम में हंस कुंड मलबे में दब गया था। इस कुंड में तीर्थयात्री अपने पितरों का तर्पण किया करते थे। इस पूजा को उनके तीर्थ पुरोहित संपन्न कराते थे। इसके अलावा तीर्थ पुरोहित मंदिर में ही यजमानों से पूजा करने लगते हैं। यात्रियों की भीड़भाड़ होने पर इससे अव्यवस्था हो जाती है। इससे निपटने के लिए मंदिर समिति ने धाम में नदी किनारे घाट बनाने का प्लान बनाया। मंदिर के पीछे भी जलप्रलय से सब कुछ ध्वस्त हो चुका है। कैबिनेट ने मंदिर के पीछे निर्माण कार्य न कराने का निर्णय लिया है। इस स्थान पर मंदिर समिति स्मृति वाटिका बनाएगी।
आपदा में मारे गए लोगों की स्मृति में यहंा फूल उगाए जाएंगे। साथ ही भोले बाबा को चढ़ाया जाने वाला ब्रह्म कमल भी इस वाटिका की शोभा बनेगा।
कोट-
घाट नाम उचित नहीं लग रहा था। इसलिए केदार सुफल आशीर्वाद स्थल नाम दिया गया। क्राउड कंट्रोल को देखते हुए यह योजना बनाई गई। जबकि स्मृति वाटिका में लगे ब्रह्मकमल को यात्री शिव को चढ़ाएंगे। इससे मंदिर समिति की आय भी बढे़गी। बीडी सिंह, सीईओ बीकेटीसी
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पिछले साल आई आपदा के बाद केदारनाथ धाम में हंस कुंड मलबे में दब गया था। इस कुंड में तीर्थयात्री अपने पितरों का तर्पण किया करते थे। इस पूजा को उनके तीर्थ पुरोहित संपन्न कराते थे। इसके अलावा तीर्थ पुरोहित मंदिर में ही यजमानों से पूजा करने लगते हैं। यात्रियों की भीड़भाड़ होने पर इससे अव्यवस्था हो जाती है। इससे निपटने के लिए मंदिर समिति ने धाम में नदी किनारे घाट बनाने का प्लान बनाया। मंदिर के पीछे भी जलप्रलय से सब कुछ ध्वस्त हो चुका है। कैबिनेट ने मंदिर के पीछे निर्माण कार्य न कराने का निर्णय लिया है। इस स्थान पर मंदिर समिति स्मृति वाटिका बनाएगी।
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आपदा में मारे गए लोगों की स्मृति में यहंा फूल उगाए जाएंगे। साथ ही भोले बाबा को चढ़ाया जाने वाला ब्रह्म कमल भी इस वाटिका की शोभा बनेगा।
कोट-
घाट नाम उचित नहीं लग रहा था। इसलिए केदार सुफल आशीर्वाद स्थल नाम दिया गया। क्राउड कंट्रोल को देखते हुए यह योजना बनाई गई। जबकि स्मृति वाटिका में लगे ब्रह्मकमल को यात्री शिव को चढ़ाएंगे। इससे मंदिर समिति की आय भी बढे़गी। बीडी सिंह, सीईओ बीकेटीसी
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