फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rudraprayag News ›   चुनौतियों के साथ आगे बढ़ रहे ग्रामीण

चुनौतियों के साथ आगे बढ़ रहे ग्रामीण

Sat, 29 Jun 2013 05:30 AM IST
Rudraprayag
Rudraprayag Updated Sat, 29 Jun 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
अगस्त्यमुनि। मैं खुद आपदा प्रभावित हूं। मेरे घर के आगे के छह मकान मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ में बह गए हैं। इसके अलावा राजकीय महाविद्यालय अगस्त्यमुनि का बालिका छात्रावास भी आधा क्षतिग्रस्त हो गया है। जवाहरनगर में लोग हर रात डर के साथ काट रहे हैं। सबके मन में एक ही बात है कहीं बारिश न हो जाए।
विज्ञापन

चिंताआें को छोड़ते हुए शुक्रवार सुबह आठ बजे मैं जवाहरनगर से पैदल बनियाड़ी होते हुए बगड़ गांव को निकला। साढ़े आठ बजे के करीब बगड़ के ऊपर ढलान पर पहुंचा। ग्रामीणों ने इसी ढलान को काटकर पैदल मार्ग में तब्दील कर दिया है। यहां पर झाड़ियाें को पकड़कर मैं नीचे उतर रहा था तो रास्ते में भीरी से पैदल आ रहे देवेंद्र सिंह व उनकी पत्नी कुसुम मिली। दंपति के साथ आठ वर्षीय बच्ची भी थी, जो बीमार थी। परिजन उसे डाक्टर को दिखाने ले जा रहे हैं। ढलान के खतरनाक रास्ते को पार कर हम लोग किसी तरह नीचे पहुंचे, लेकिन असली परीक्षा तो अब थी। ढलान पार करने के बाद गदेरे को पार करना था वो भी एक पत्थर से दूसरे पत्थर में कूदकर। मां ने बच्ची को पीठ पर चुन्नी के सहारे बांध दिया और बमुश्किल गदेरे को पार किया। इनके साथ-साथ मैने भी इसे पार कर दिया। उन्हाेंने मुझे बताया कि पूरा रास्ता जानलेवा बना हुआ है, थोड़ी सी असावधानी किसी हादसे को न्यौता दे सकती है। विजयनगर पहुंचा तो यहां पर मुझे पश्चिम बंगाल की आनंद मार्ग युनिवर्सल रिलीफ संस्था की टीम मिली। ये टीम रविप्रकाश आनंद के नेतृत्व में काम कर रही है। टीम आपदाग्रस्त क्षेत्राें में आवश्यक सामग्री वितरित कर रहे हैं। रवि ने बताया कि उन्हाेंने फलई में चंद्रापुरी, जवाहरनगर, गंगानगर, मरघट, चाका, बनियाड़ी के 281 आपदा प्रभावित को राहत सामग्री वितरित की। बताया कि टीम सर्वे भी कर रही है, जिससे प्रभाविताें को भविष्य में भी मदद की जाएगी। इसके बाद मैं जीआईसी अगस्त्यमुनि में लगे राहत कैंप में गया। यहां पर रामकृष्ण मिशन व अन्य संस्थाआें ने राहत सामग्री प्रभाविताें को दी जा रही है। राहत कैंप से लौटकर मैं विजयनगर पहुंचा तो यहां का नजारा अन्य दिनाें से बिल्कुल अलग था। जहां दिनभर यहां चहल-पहल रहती थी, आज सन्नाटा पसरा हुआ है। इस सन्नाटे के बीच प्रभाविताें की दबी हुई आवाजें अंतर्मन को सुनाई दे रही थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed