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केदारनाथ में दो सौ किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना ग्रिड से हुई लिंक
Updated Thu, 23 Nov 2017 10:42 PM IST
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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ में दूध गंगा पर दो करोड़ से अधिक लागत से बनी 200 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना को यूपीसीएल के ग्रिड से लिंक कर दिया गया है। टेस्ट में परियोजना सफल रही है। निगम और उरेडा के बीच जल्द ही बिजली खरीद अनुबंध की औपचारिकताएं भी पूरी हो जाएंगी।
नेहरू पर्वतारोहण और उरेडा के सहयोग से बनाई गई यह जल विद्युत परियोजना एक वर्ष से कम समय में बनने वाली पहली परियोजना है। परियोजना के पावर हाउस से यूपीसीएल के ट्रांसफार्मर तक 22 पोलों के सहारे 664 मीटर एलटी विद्युत लाइन खींची गई है, जिस पर 165 केवी के दो ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। कुछ दिन पूर्व उरेडा और यूपीसीएल के अधिकारियों की मौजूदगी में परियोजना को ग्रिड से लिंक कर सफल टेस्ट भी किया गया है। इस परियोजना पर 100-100 किलोवाट की दो टरबाइनें लगाई गई हैं, जिससे इन दिनों प्रतिदिन 40 से 60 किलोवाट तक बिजली उत्पादन हो रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जहां केदारनाथ धाम में बारहों महीने बिजली बहाल रहेगी, वहीं, ऊर्जा निगम को 80 से 100 किलोवाट तक बिजली मिल सकेगी। उरेडा के परियोजना प्रबंधक नीरज गर्ग ने बताया कि विभागीय स्तर पर परियोजना से जुड़े सभी कार्य पूरे कर लिए गए हैं। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता मनोज गुंसाई ने बताया कि टेस्टिंग सफल रही है। लेकिन उरेडा द्वारा अभी तक अनुबंध के दस्तावेज नहीं सौंपे गए हैं।
चार वर्ष पुराना है यह प्रोजेक्ट
उरेडा द्वारा केदारनाथ में वर्ष 2012 में 200 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना का निर्माण शुरू किया गया था। डेढ़ करोड़ से अधिक लागत की परियोजना पर ठेकेदार द्वारा कछुआ गति से कार्य किया गया। वहीं, 2013 जून में आपदा में यह पूरी परियोजना ही ध्वस्त हो गई। बीते वर्ष निम के साथ पुन: परियोजना को शुरू किया गया था, जो अब बनकर तैयार हो चुकी है।
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इनका कहना है -
केदारनाथ में दूध गंगा पर 200 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना पूरी होने के साथ यूपीसीएल के ग्रिड से भी लिंक कर दी गई है। यूपीसीएल के साथ अनुबंध की प्रक्रिया चल रही है, जो जल्द पूरी हो जाएगी। विषम हालातों में भी यह परियोजना स्वीकृत लागत पर एक वर्ष से कम समय में पूरी हुई है।
-एलडी शर्मा, डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर उरेडा, देहरादून
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नेहरू पर्वतारोहण और उरेडा के सहयोग से बनाई गई यह जल विद्युत परियोजना एक वर्ष से कम समय में बनने वाली पहली परियोजना है। परियोजना के पावर हाउस से यूपीसीएल के ट्रांसफार्मर तक 22 पोलों के सहारे 664 मीटर एलटी विद्युत लाइन खींची गई है, जिस पर 165 केवी के दो ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। कुछ दिन पूर्व उरेडा और यूपीसीएल के अधिकारियों की मौजूदगी में परियोजना को ग्रिड से लिंक कर सफल टेस्ट भी किया गया है। इस परियोजना पर 100-100 किलोवाट की दो टरबाइनें लगाई गई हैं, जिससे इन दिनों प्रतिदिन 40 से 60 किलोवाट तक बिजली उत्पादन हो रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जहां केदारनाथ धाम में बारहों महीने बिजली बहाल रहेगी, वहीं, ऊर्जा निगम को 80 से 100 किलोवाट तक बिजली मिल सकेगी। उरेडा के परियोजना प्रबंधक नीरज गर्ग ने बताया कि विभागीय स्तर पर परियोजना से जुड़े सभी कार्य पूरे कर लिए गए हैं। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता मनोज गुंसाई ने बताया कि टेस्टिंग सफल रही है। लेकिन उरेडा द्वारा अभी तक अनुबंध के दस्तावेज नहीं सौंपे गए हैं।
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चार वर्ष पुराना है यह प्रोजेक्ट
उरेडा द्वारा केदारनाथ में वर्ष 2012 में 200 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना का निर्माण शुरू किया गया था। डेढ़ करोड़ से अधिक लागत की परियोजना पर ठेकेदार द्वारा कछुआ गति से कार्य किया गया। वहीं, 2013 जून में आपदा में यह पूरी परियोजना ही ध्वस्त हो गई। बीते वर्ष निम के साथ पुन: परियोजना को शुरू किया गया था, जो अब बनकर तैयार हो चुकी है।
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इनका कहना है -
केदारनाथ में दूध गंगा पर 200 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना पूरी होने के साथ यूपीसीएल के ग्रिड से भी लिंक कर दी गई है। यूपीसीएल के साथ अनुबंध की प्रक्रिया चल रही है, जो जल्द पूरी हो जाएगी। विषम हालातों में भी यह परियोजना स्वीकृत लागत पर एक वर्ष से कम समय में पूरी हुई है।
-एलडी शर्मा, डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर उरेडा, देहरादून