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कार्तिक स्वामी मंदिर में दो दिवसीय देव दिपावली महोत्सव शुरू
Updated Wed, 21 Nov 2018 10:47 PM IST
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रुद्रप्रयाग। क्रौंच पर्वत पर स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर में दो दिवसीय देव दीपावली महोत्सव पूजा-अर्चना के साथ शुभारंभ हुआ। भक्तों ने भगवान कार्तिकेय का आह्वान कर जलाभिषेक किया। दूसरी ओर बुधवार रात्रि को संतान प्राप्ति के लिए दूर-दराज क्षेत्रों से आए 50 नि:संतान दंपतियों ने मंदिर में खड़ दीया के साथ पूजा-अर्चना किया।
जनपद रुद्रप्रयाग व चमोली के 360 गांवों के आराध्य देवता भगवान कार्तिकेय के मंदिर कार्तिक स्वामी में बुधवार को दो दिवसीय देव दीपावली महोत्सव शुरू हुआ। इस मौके पर बाड़व, जहंगी, स्वारी, घिमतोली, पोगठा, गोदि-गिंवाला, जयंकडी, पोखरी आदि गांवों की कीर्तन मंडलियों ने मंदिर में कीर्तन-भजन किया। पूरी रात जागरण हुुआ। इस दौरान भगवान की चार पहर विशेष पूजाएं संपादित की गई। वहीं संतान प्राप्ति के लिए दूर-दराज क्षेत्रों से आए 50 नि:संतान दंपतियों ने मंदिर में खड़ दीया के साथ पूजा-अर्चना किया। बृहस्पतिवार को मंदिर परिसर में विश्व कल्याण व आमजन की सुख-समृद्धि के लिए यज्ञ-हवन का आयोजन किया जाएगा। मंदिर समिति के अध्यक्ष शत्रुघन सिंह नेगी ने बताया कि आयोजन में दोनों जनपदों से भारी संख्या में भक्त यहां पहुंच रहे हैं। इस मौके पर मंदिर समिति सचिव बलराम नेगी, पूरण सिंह नेगी, प्रबंधक, विक्रम नेगी उपाध्यक्ष समेत अन्य लोग मौजूद थे।
यह है मान्यता
किवदंती के अनुसार जब देवताओं द्वारा भगवान गणेश का नाम अग्र पूजा के लिए घोषित किया गया तो देवताओं के सेनापति कार्तिकेय नाराज हो गए। वह, अपने मांस व खून को अपने माता-पिता को सौंपकर निर्वाण रूप में क्रौंच पर्वत पर चले गए। उन्हें मनाने के लिए भगवान शिव, माता पार्वती के साथ गणेश और अन्य देवी-देवता भी पहुंचे, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी और तप करने लगे। कई प्रयासों के बाद आखिर में कार्तिकेय ने कहा कि वह वर्षभर में एक बार सभी देवताओं को दर्शन देंगे। इसलिए मान्यता है कि देव दीपावली के दिन देवी-देवता उनके दर्शनों के लिए क्रौंच पर्वत पर पहुंचते है।
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जनपद रुद्रप्रयाग व चमोली के 360 गांवों के आराध्य देवता भगवान कार्तिकेय के मंदिर कार्तिक स्वामी में बुधवार को दो दिवसीय देव दीपावली महोत्सव शुरू हुआ। इस मौके पर बाड़व, जहंगी, स्वारी, घिमतोली, पोगठा, गोदि-गिंवाला, जयंकडी, पोखरी आदि गांवों की कीर्तन मंडलियों ने मंदिर में कीर्तन-भजन किया। पूरी रात जागरण हुुआ। इस दौरान भगवान की चार पहर विशेष पूजाएं संपादित की गई। वहीं संतान प्राप्ति के लिए दूर-दराज क्षेत्रों से आए 50 नि:संतान दंपतियों ने मंदिर में खड़ दीया के साथ पूजा-अर्चना किया। बृहस्पतिवार को मंदिर परिसर में विश्व कल्याण व आमजन की सुख-समृद्धि के लिए यज्ञ-हवन का आयोजन किया जाएगा। मंदिर समिति के अध्यक्ष शत्रुघन सिंह नेगी ने बताया कि आयोजन में दोनों जनपदों से भारी संख्या में भक्त यहां पहुंच रहे हैं। इस मौके पर मंदिर समिति सचिव बलराम नेगी, पूरण सिंह नेगी, प्रबंधक, विक्रम नेगी उपाध्यक्ष समेत अन्य लोग मौजूद थे।
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यह है मान्यता
किवदंती के अनुसार जब देवताओं द्वारा भगवान गणेश का नाम अग्र पूजा के लिए घोषित किया गया तो देवताओं के सेनापति कार्तिकेय नाराज हो गए। वह, अपने मांस व खून को अपने माता-पिता को सौंपकर निर्वाण रूप में क्रौंच पर्वत पर चले गए। उन्हें मनाने के लिए भगवान शिव, माता पार्वती के साथ गणेश और अन्य देवी-देवता भी पहुंचे, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी और तप करने लगे। कई प्रयासों के बाद आखिर में कार्तिकेय ने कहा कि वह वर्षभर में एक बार सभी देवताओं को दर्शन देंगे। इसलिए मान्यता है कि देव दीपावली के दिन देवी-देवता उनके दर्शनों के लिए क्रौंच पर्वत पर पहुंचते है।
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