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केदारघाटी के गांवों में पांडव नृत्य की धूम
Updated Mon, 25 Dec 2017 10:29 PM IST
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गुप्तकाशी। केदारघाटी की ग्राम पंचायत नारायणकोटी और ल्वारा में इन दिनों पांडव नृत्य की धूम मची है। आठ साल बाद हुए पांडव नृत्य को लेकर ग्रामीणों और ध्याणियों में खूब उत्साह है।
ऊखीमठ ब्लॉक में नारायणकोटी गांव के प्राचीन वीरभद्र मंदिर परिसर में 3 दिसंबर से पांडव नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक दिन ढोल दमाऊ की थाप पर पांडव एवं स्थानीय देव पश्वा नृत्य करते हैं। आयोजन समिति के अध्यक्ष सच्चिदानंद पुजारी ने बताया कि पांडव नृत्य में गैंडा कौथिग, हाथी कौथिग, मोरू द्वार और केदारनाथ यात्रा के साथ पांडव नृत्य का समापन होगा। 28 दिसंबर को चक्रव्यूह का मंचन किया जाएगा।
दूसरी ओर ग्राम पंचायत ल्वारा में भी 15 साल बाद पांडव नृत्य का आयोजन हुआ है। 2 दिसंबर से शुरू हुए पांडव नृत्य में इन दिनों पांडव पश्वा घर-घर जाकर लोगों को दर्शन दे रहे हैं। मायके पहुंची ध्याणियां अपने हाथों से पांडवों को परंपरागत पकवान परोसकर आशीर्वाद ले रही हैं।
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ग्रामीण महेश बगवाड़ी ने बताया कि पांडव नृत्य के दौरान 28 दिसंबर को चक्रव्यूह व 31 ऐरावत हाथी का मंचन किया जाएगा। पूर्व में गैंडा कौथीग, द्रोपदी चीर हरण, लाक्षा गृह और गंगा स्नान आदि महाभारतकालीन परंपराओं का निर्वहन किया जा चुका है।
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ऊखीमठ ब्लॉक में नारायणकोटी गांव के प्राचीन वीरभद्र मंदिर परिसर में 3 दिसंबर से पांडव नृत्य का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक दिन ढोल दमाऊ की थाप पर पांडव एवं स्थानीय देव पश्वा नृत्य करते हैं। आयोजन समिति के अध्यक्ष सच्चिदानंद पुजारी ने बताया कि पांडव नृत्य में गैंडा कौथिग, हाथी कौथिग, मोरू द्वार और केदारनाथ यात्रा के साथ पांडव नृत्य का समापन होगा। 28 दिसंबर को चक्रव्यूह का मंचन किया जाएगा।
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दूसरी ओर ग्राम पंचायत ल्वारा में भी 15 साल बाद पांडव नृत्य का आयोजन हुआ है। 2 दिसंबर से शुरू हुए पांडव नृत्य में इन दिनों पांडव पश्वा घर-घर जाकर लोगों को दर्शन दे रहे हैं। मायके पहुंची ध्याणियां अपने हाथों से पांडवों को परंपरागत पकवान परोसकर आशीर्वाद ले रही हैं।
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ग्रामीण महेश बगवाड़ी ने बताया कि पांडव नृत्य के दौरान 28 दिसंबर को चक्रव्यूह व 31 ऐरावत हाथी का मंचन किया जाएगा। पूर्व में गैंडा कौथीग, द्रोपदी चीर हरण, लाक्षा गृह और गंगा स्नान आदि महाभारतकालीन परंपराओं का निर्वहन किया जा चुका है।