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23वीं पूण्यतिथि पर शहीद यशोधर बेंजवाल को दी श्रद्धांजलि
Updated Fri, 10 Nov 2017 10:38 PM IST
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रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में 10 नवंबर 1995 को श्रीयंत्र टापू श्रीनगर में अपने प्राणों की आहुति देने वाले बेेंजी गांव निवासी शहीद यशोधर बेंजवाल की 23वीं पुण्य तिथि पर शहीद यशोधर बेंजवाल स्मृति संस्था अगस्त्यमुनि की ओर से श्रद्धासुमन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने शहीद के गांव को शहीद पर्यटन गांव की घोषणा पूरी नहीं होने पर रोष जताया।
शुक्रवार देर शाम सिल्ली/बेंजी में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शहीद के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने शहीद की शहादत के 22 वर्ष बाद भी दोषी लोगों को सजा नहंी मिलने पर रोष जताया। राज्य आंदोलनकारी व भाकपा माले के युवा नेता इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बनाया जा सका। सुविधाओं के अभाव में गांव खाली हो रहे हैं, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं थी। 13 जिलों के छोटे से राज्य में तीन विधानसभाएं और दो-दो राजधानियां बन रही हैं, जो राजनीतिक दलों की सत्तासुख और वोट बैंक की नीति को बया कर रही हैं। समिति के सचिव दीपक बेंजवाल और गजेंद्र रौतेला का कहना था, कि पूर्ववर्ती सरकार ने शहीद के गांव बेंजी को शहीद पर्यटन गांव घोषित किया था, लेकिन दो वर्ष बाद भी गांव में कोई सुविधा नहीं जुट पाई है। इस मौके पर श्रेष्ठमणि भट्ट, मालती हलदार, दीपक भट्ट, बेंजवाल, बेनी प्रसाद भट्ट, अरविंद बेंजवाल, अरूणा बेंजवाल ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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शुक्रवार देर शाम सिल्ली/बेंजी में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शहीद के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने शहीद की शहादत के 22 वर्ष बाद भी दोषी लोगों को सजा नहंी मिलने पर रोष जताया। राज्य आंदोलनकारी व भाकपा माले के युवा नेता इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बनाया जा सका। सुविधाओं के अभाव में गांव खाली हो रहे हैं, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं थी। 13 जिलों के छोटे से राज्य में तीन विधानसभाएं और दो-दो राजधानियां बन रही हैं, जो राजनीतिक दलों की सत्तासुख और वोट बैंक की नीति को बया कर रही हैं। समिति के सचिव दीपक बेंजवाल और गजेंद्र रौतेला का कहना था, कि पूर्ववर्ती सरकार ने शहीद के गांव बेंजी को शहीद पर्यटन गांव घोषित किया था, लेकिन दो वर्ष बाद भी गांव में कोई सुविधा नहीं जुट पाई है। इस मौके पर श्रेष्ठमणि भट्ट, मालती हलदार, दीपक भट्ट, बेंजवाल, बेनी प्रसाद भट्ट, अरविंद बेंजवाल, अरूणा बेंजवाल ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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