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51 जल कलशों े जल से किया भगवान कार्तिकेय का जलभिषेक

Thu, 14 Jun 2018 11:04 PM IST
Updated Thu, 14 Jun 2018 11:04 PM IST
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51 जल कलशों  े जल से किया भगवान कार्तिकेय का जलभिषेक
रुद्रप्रयाग। क्रौंच पर्वत पर स्थित भगवान कार्तिक स्वामी मंदिर में चल रहे केदारखंड महापुराण कथा व महायज्ञ के नौवें दिन मंदिर में 51 जल कलशों की भव्य झांकी निकाली गई। इस दौरान पूरा धाम भगवान की जयकारोंसे गूंज उठा।
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कार्तिकेय मंदिर समिति की ओर से विश्व शांति एवं क्षेत्र की खुशहाली के लिए आयोजित किए जा रहे महायज्ञ एवं पुराणवाचन कथा में बृहस्पतिवार को ब्राह्मणों, मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं भक्तों ने मंदिर से करीब एक किमी दूर स्थित प्राकृतिकजल कुंडी पहुंचे। जहां स्रोत की पूजा अर्चना के बाद 51 कलशों में जल भरकर 11 बजे यात्रा शुरू की गई। करीब डेढ़ बजे जैसे ही जल कलश यात्रा मंदिर परिसर पहुंची, सैकड़ों भक्तों ने जयकारों से स्वागत किया। जल कलशों में लाए गए जल से भगवान कार्तिकेय का अभिषेक किया गया। इसके पश्चात शुरू हुई कथा में कथावाचक पंडित वासुदेव थपलियाल ने गंगा की अवतरण के बारे में बताते हुए कहा कि राजा भगीरथ ने भगवान शिव को घोर तपस्या से प्रसन्न किया था। तब भगवान भोलेनाथ ने भगीरथ को वरदान मांगने को कहा, जिस पर भगीरथ ने कहा कि मैं अपने पूर्वजों के तारण के लिए गंगा को पृथ्वी पर लाने का वरदान मांगा। भगवान भोलेनाथ ने गंगा को अपनी जटाओं में जगह दी। इसके बाद गंगा जटाओं से उतरते हुए धरती पर पहुंची और भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार हुआ। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष शत्रुघन सिंह नेगी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष चमोली लखपत बुटोला, बलराम नेगी, प्रबंधक पूरण सिंह नेगी, चंद्र सिंह नेगी, सूरजी देवी समेत भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
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