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सेंचुरी एरिया में बसे बुरूआ गांव के जंगल में चल रहा अवैध क्रशर
Updated Sat, 11 Nov 2017 10:10 PM IST
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रुद्रप्रयाग। ऊखीमठ विकासखंड की ग्राम पंचायत बुरूवा में अवैध क्रशर चल रहा है। यहां अवैध खनन से गांव के पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। ग्राम प्रधान ने एनजीटी और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को ज्ञापन भेजकर इसकी शिकायत की है। उन्होंने शासन, प्रशासन और विभाग पर भी अनदेखी का आरोप लगाया है।
150 परिवारों वाले बुरूवा गांव के जंगल में लंबे समय से चल रहे क्रशर और अवैध खनन से ग्रामीण परेशान हैं। यहां एक कंपनी विकास कार्यों के नाम पर काली गंगा से अवैध खनन कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्रशर चलने से दिनभर वातावरण में धूल गुबार उड़े रहते हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।
ग्राम प्रधान नरोत्तम सिंह धिरवाण ने बताया कि वर्ष 1998 में आई आपदा के बाद भू-वैज्ञानिकों ने क्षेत्र को संवेदनशील घोषित कर दिया था। वर्ष 2015 में पूरा क्षेत्र सेंसिटिव जोन घोषित हो चुका है। यहां किसी भी प्रकार के निर्माण और खनन पर रोक है। बावजूद प्रशासन व विभाग की मिलीभगत से खनन माफिया पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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अधिकारियों को पत्र के माध्यम से कई बार अवगत कराने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मामले का संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। प्रधान धिरवाण ने बताया कि पूर्व में पर्यावरण विभाग की टीम द्वारा गांव का निरीक्षण किया जा चुका है। तब टीम ने क्रशर और खनन को त्वरित बंद करने को कहा था। इधर, उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि बुरूवा गांव के जंगल में अवैध रूप से चल रहे क्रशर को पूर्व में सीज किया जा चुका है। वर्तमान में जो क्रशर संचालित है, वह वैध है।
150 परिवारों वाले बुरूवा गांव के जंगल में लंबे समय से चल रहे क्रशर और अवैध खनन से ग्रामीण परेशान हैं। यहां एक कंपनी विकास कार्यों के नाम पर काली गंगा से अवैध खनन कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्रशर चलने से दिनभर वातावरण में धूल गुबार उड़े रहते हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।
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ग्राम प्रधान नरोत्तम सिंह धिरवाण ने बताया कि वर्ष 1998 में आई आपदा के बाद भू-वैज्ञानिकों ने क्षेत्र को संवेदनशील घोषित कर दिया था। वर्ष 2015 में पूरा क्षेत्र सेंसिटिव जोन घोषित हो चुका है। यहां किसी भी प्रकार के निर्माण और खनन पर रोक है। बावजूद प्रशासन व विभाग की मिलीभगत से खनन माफिया पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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अधिकारियों को पत्र के माध्यम से कई बार अवगत कराने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मामले का संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। प्रधान धिरवाण ने बताया कि पूर्व में पर्यावरण विभाग की टीम द्वारा गांव का निरीक्षण किया जा चुका है। तब टीम ने क्रशर और खनन को त्वरित बंद करने को कहा था। इधर, उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि बुरूवा गांव के जंगल में अवैध रूप से चल रहे क्रशर को पूर्व में सीज किया जा चुका है। वर्तमान में जो क्रशर संचालित है, वह वैध है।