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महिलाओं को आगे बढ़ाने में सभी का सहयोग जरूरी: गौरव
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रुद्रप्रयाग। अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स महाअभियान के तहत अगस्त्यमुनि ब्लाक के क्यूंजा घाटी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय जाबरी में महिला स्वरोजगार पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें बालिका शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर दिया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं के विकास के बिना समाज का का विकास संभव नहीं है।
विद्यालय में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए बतौर मुख्य अतिथि अपर उप जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि महिलाएं जिस प्रकार से घर, परिवार की जिम्मेदारियों को निभाती हैं, वह किसी भी विकसित देश की अर्थव्यवस्था का 50 फीसदी कार्य के बराबर है। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि हम, घर-गांवों से ही महिलाओं को आगे बढ़ाने का कार्य करें। उन्होंने गांवों में समितियों के माध्यम से महिलाओं को मिनी बैंक से जोड़ने की बात भी कही, जिससे प्रत्येक माह जमा होने वाली धनराशि से ग्रामीण क्षेत्रों में लघु-कुटीर उद्योग स्थापित किए जा सके, जिनका संचालन स्वयं महिलाओं द्वारा किया जाए। अपर उप जिलाधिकारी ने महिलाओं से बेटियों की शिक्षा पर जोर देने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि मंदाकिनी की आवाज सामुदायिक रेडियो के अध्यक्ष चरण सिंह राणा ने कहा कि क्यूंजा घाटी की कृषि महिलाओं पर निर्भर है। कहा कि महिलाओं के इसके जरिए स्वयं को आर्थिक मजबूती देनी होगी। उन्होंने कहा कि अमर उजाला पहला संस्थान है, जिसने क्षेत्र की सुध ली है। यह प्रयास महिला जागरूकता के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। आजीविका एकीकृत सहयोग परियोजना के समन्वयक प्रदीप नेगी व सुगमकर्ता नागेंद्र नेगी ने महिलाओं को खेती की नई तकनीक के बारे में बताते हुए संचालित योजनाओं का लाभ उठाने को कहा। इस मौके पर अगस्त्यमुनि थाना से पहुंची कांस्टेबल सिम्पी ने महिला अपराध और बचाव के बारे में ग्रामीण महिलाओं को जानकारी दी। संगोष्ठी में जूनियर हाईस्कूल कांदी की छात्राओं ने बेटी के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर नाटक का मंचन भी किया। इस मौके पर जाबरी की महिलाओं ने झुमेलू, चांछड़ी और थड्या लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दी। साथ ही कक्षा 5वीं की छात्रा आईशा सहित अन्य बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। जाबरी गांव की महिलाओं ने गांवों से होते पलायन पर मार्मिक नाटक का मंचन भी किया। जबकि जीआईसी चंद्रनगर की छात्रा निधि ने बेटी के जन्म से उसके विवाह और मां बनने तक सफर को अपनी कविता से बखूबी उकेरा
जीआईसी कंडारा की शिक्षिका कुसुम भट्ट के संचालन में आयोजित संगोष्ठी में कुलदीप टम्टा, चंद्रशेखर, शूरवीर टम्टा, जसमाली देवी, जसपाल सिंह राणा, रणवीर सिंह, मदन लाल, शाखा देवी, प्रदीप सिंह, जसमती देवी, वरदेई देवी, जोगणी देवी, सुशीला देवी, रेखा देवी, प्रीति देवी, विनिता देवी, राजेश्वरी देवी, जसमती देवी, उत्तम नेगी, गीता देवी, नितिन नेगी, शिवानंद नौटियाल, सरिता देवी, प्रर्मिला देवी, विमला देवी, रैजा देवी, रौली देवी, सजनी देवी, अंजू देवी, बिंदू देवी, मंजू देवी सहित स्कूली बच्चे और अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
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बालिकाओं व महिलाओं को जागरूक कर उन्हें आत्मनिर्भर व आत्मसुरक्षित बनाने के लिए अमर उजाला अपराजिता महाभियान अनूठी पहल है। इस प्रयास से लोगों में नई सोच पैदा हो रही है, जिसे गांव-गांव और जन-जन तक फैलाने में सभी को सहयोग करना होगा। गांवों में रहने वाली महिलाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है कि उन्हें घर, परिवार और समाज द्वारा प्रोत्साहित किया जाए।
-- अरुणा नौटियाल, प्रधानाध्यापिका राप्रावि जाबरी
महिलाएं गांवों की रीढ़ है। घर, परिवार की जिम्मेदारियों से गांवों में होने वाले सामाजिक व धार्मिक कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को आर्थिकी से जोडने के लिए उन्हें प्रशिक्षण और संसाधन मुहैया कराने चाहिए, जिससे वे आत्मनिर्भर हो सके।
-- देवेश्वरी सेमवाल, शिक्षिका जूहा कांदी
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विद्यालय में आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ करते हुए बतौर मुख्य अतिथि अपर उप जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि महिलाएं जिस प्रकार से घर, परिवार की जिम्मेदारियों को निभाती हैं, वह किसी भी विकसित देश की अर्थव्यवस्था का 50 फीसदी कार्य के बराबर है। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि हम, घर-गांवों से ही महिलाओं को आगे बढ़ाने का कार्य करें। उन्होंने गांवों में समितियों के माध्यम से महिलाओं को मिनी बैंक से जोड़ने की बात भी कही, जिससे प्रत्येक माह जमा होने वाली धनराशि से ग्रामीण क्षेत्रों में लघु-कुटीर उद्योग स्थापित किए जा सके, जिनका संचालन स्वयं महिलाओं द्वारा किया जाए। अपर उप जिलाधिकारी ने महिलाओं से बेटियों की शिक्षा पर जोर देने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि मंदाकिनी की आवाज सामुदायिक रेडियो के अध्यक्ष चरण सिंह राणा ने कहा कि क्यूंजा घाटी की कृषि महिलाओं पर निर्भर है। कहा कि महिलाओं के इसके जरिए स्वयं को आर्थिक मजबूती देनी होगी। उन्होंने कहा कि अमर उजाला पहला संस्थान है, जिसने क्षेत्र की सुध ली है। यह प्रयास महिला जागरूकता के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। आजीविका एकीकृत सहयोग परियोजना के समन्वयक प्रदीप नेगी व सुगमकर्ता नागेंद्र नेगी ने महिलाओं को खेती की नई तकनीक के बारे में बताते हुए संचालित योजनाओं का लाभ उठाने को कहा। इस मौके पर अगस्त्यमुनि थाना से पहुंची कांस्टेबल सिम्पी ने महिला अपराध और बचाव के बारे में ग्रामीण महिलाओं को जानकारी दी। संगोष्ठी में जूनियर हाईस्कूल कांदी की छात्राओं ने बेटी के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर नाटक का मंचन भी किया। इस मौके पर जाबरी की महिलाओं ने झुमेलू, चांछड़ी और थड्या लोक नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दी। साथ ही कक्षा 5वीं की छात्रा आईशा सहित अन्य बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। जाबरी गांव की महिलाओं ने गांवों से होते पलायन पर मार्मिक नाटक का मंचन भी किया। जबकि जीआईसी चंद्रनगर की छात्रा निधि ने बेटी के जन्म से उसके विवाह और मां बनने तक सफर को अपनी कविता से बखूबी उकेरा
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जीआईसी कंडारा की शिक्षिका कुसुम भट्ट के संचालन में आयोजित संगोष्ठी में कुलदीप टम्टा, चंद्रशेखर, शूरवीर टम्टा, जसमाली देवी, जसपाल सिंह राणा, रणवीर सिंह, मदन लाल, शाखा देवी, प्रदीप सिंह, जसमती देवी, वरदेई देवी, जोगणी देवी, सुशीला देवी, रेखा देवी, प्रीति देवी, विनिता देवी, राजेश्वरी देवी, जसमती देवी, उत्तम नेगी, गीता देवी, नितिन नेगी, शिवानंद नौटियाल, सरिता देवी, प्रर्मिला देवी, विमला देवी, रैजा देवी, रौली देवी, सजनी देवी, अंजू देवी, बिंदू देवी, मंजू देवी सहित स्कूली बच्चे और अन्य ग्रामीण मौजूद थे।
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बालिकाओं व महिलाओं को जागरूक कर उन्हें आत्मनिर्भर व आत्मसुरक्षित बनाने के लिए अमर उजाला अपराजिता महाभियान अनूठी पहल है। इस प्रयास से लोगों में नई सोच पैदा हो रही है, जिसे गांव-गांव और जन-जन तक फैलाने में सभी को सहयोग करना होगा। गांवों में रहने वाली महिलाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है कि उन्हें घर, परिवार और समाज द्वारा प्रोत्साहित किया जाए।
-- अरुणा नौटियाल, प्रधानाध्यापिका राप्रावि जाबरी
महिलाएं गांवों की रीढ़ है। घर, परिवार की जिम्मेदारियों से गांवों में होने वाले सामाजिक व धार्मिक कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को आर्थिकी से जोडने के लिए उन्हें प्रशिक्षण और संसाधन मुहैया कराने चाहिए, जिससे वे आत्मनिर्भर हो सके।
-- देवेश्वरी सेमवाल, शिक्षिका जूहा कांदी