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15 अप्रैल को धहकते अंगारों में नृत्य करेंगे जाख देवता
Updated Thu, 12 Apr 2018 10:52 PM IST
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गुप्तकाशी। केदारघाटी के रक्षक देवता के रूप में पूजनीय यक्षराज जाख देवता 15 अप्रैल को जाख मंदिर परिसर में पश्वा पर अवतरित होकर धधकते अंगारों पर नृत्य करेंगे। इस अनुष्ठान के लिए ग्रामीणों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
देवशाल, कोठेड़ा और नारायणकोटी गांव के ग्रामीणों ने जाखधार मंदिर परिसर में गोठी बैठना (बैठक) की। इस मौके पर 15 अप्रैल को होने वाले पारंपरिक अनुष्ठान की तैयारियों पर चर्चा की गई। वयोवृद्ध मनोहर देवशाली ने बताया कि जाख देवता के बैसाखी की संक्रांति के दूसरे दिन धधकते अंगारों पर नृत्य की परंपरा 1100 वर्ष पुरानी है। बताया कि संक्रांति के दिन विंदवासनी मंदिर से भगवान जाख देवता की मूर्ति को उनके मूल मंदिर जाख लाया जाता है। यहां पर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना होती है। अनुष्ठान के लिए चिह्नित एकत्रित सूखी लकड़ियों को जलाया जाता है। ये लकड़ियों दिन और रात जलती हैं। धधकते अंगारों पर अगले दिन जाख देवता अपने पश्वा पर अवतरित होकर नृत्य करते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। उन्होंने अधिकाधिक लोगों ने अनुष्ठान का साक्षी बनकर भगवान जाख देवता से आशीष लेने को कहा।
देवशाल, कोठेड़ा और नारायणकोटी गांव के ग्रामीणों ने जाखधार मंदिर परिसर में गोठी बैठना (बैठक) की। इस मौके पर 15 अप्रैल को होने वाले पारंपरिक अनुष्ठान की तैयारियों पर चर्चा की गई। वयोवृद्ध मनोहर देवशाली ने बताया कि जाख देवता के बैसाखी की संक्रांति के दूसरे दिन धधकते अंगारों पर नृत्य की परंपरा 1100 वर्ष पुरानी है। बताया कि संक्रांति के दिन विंदवासनी मंदिर से भगवान जाख देवता की मूर्ति को उनके मूल मंदिर जाख लाया जाता है। यहां पर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना होती है। अनुष्ठान के लिए चिह्नित एकत्रित सूखी लकड़ियों को जलाया जाता है। ये लकड़ियों दिन और रात जलती हैं। धधकते अंगारों पर अगले दिन जाख देवता अपने पश्वा पर अवतरित होकर नृत्य करते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। उन्होंने अधिकाधिक लोगों ने अनुष्ठान का साक्षी बनकर भगवान जाख देवता से आशीष लेने को कहा।
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