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पांजणा गांव के 134 परिवारों को विस्थापन का इंतजार!
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रुद्रप्रयाग। जखोली विकासखंड के आपदा प्रभावित ग्राम पंचायत पांजणा के 134 परिवार एक दशक से विस्थापन का इंतजार कर रहे हैं। एक दशक से आपदा का दंश झेल रहे ग्रामीणों ने रोष जताते हुए डीएम को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने जल्द विस्थापन की कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
वर्ष 2007 में दैवी आपदा में पांजणा गांव को व्यापक नुकसान हुआ था। तब, प्रशासन ने भू-वैज्ञानिकों से गांव का भू-गर्भीय सर्वेक्षण कराया था, जिसमें गांव को आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील मानते हुए रहने लायक नहीं बताया गया था। इसके बाद राजस्व विभाग, वन विभाग और विकास विभाग द्वारा कई बार के संयुक्त निरीक्षण कर गांव के सभी 148 परिवारों को प्रभावित मानते हुए विस्थापन की सूची में शामिल किया गया था, लेकिन एक दशक बीत जाने के बाद भी सिर्फ 14 परिवारों को ही अन्यत्र पुनर्वास के लिए धनराशि दी गई है। शेष 134 परिवार आज भी डर के साए में दरारों से पटे घरों में रहने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान त्रिलोक सिंह रौतेला, दुर्गा सिंह रावत, दर्शन लाल, प्रकाश लाल, अनीता देवी, कपूर सिंह, पार्वती देवी, संजय सिंह, गिरीश, गोपाल सिंह, कीर्ति सिंह, अजीत सिंह, भीम सिंह, कमल सिंह, सुमन सिंह पंकज सिंह, धर्मपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, अनीता देवी, संगीता देवी आदि का कहना है कि केदारनाथ आपदा के बाद से हालात और भी खराब हो गए हैं। गांव के चारों तरफ भूस्खलन जोन सक्रिय हो रखा है, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि जिले में विस्थापन सूची में शामिल 23 गांवों में पहले चरण में 7 गांवों के 56 परिवारों का अन्यत्र पुनर्वास होना है। इसके लिए शासन से जरूरी धनराशि भी प्राप्त हो चुकी है। विस्थापन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
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वर्ष 2007 में दैवी आपदा में पांजणा गांव को व्यापक नुकसान हुआ था। तब, प्रशासन ने भू-वैज्ञानिकों से गांव का भू-गर्भीय सर्वेक्षण कराया था, जिसमें गांव को आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील मानते हुए रहने लायक नहीं बताया गया था। इसके बाद राजस्व विभाग, वन विभाग और विकास विभाग द्वारा कई बार के संयुक्त निरीक्षण कर गांव के सभी 148 परिवारों को प्रभावित मानते हुए विस्थापन की सूची में शामिल किया गया था, लेकिन एक दशक बीत जाने के बाद भी सिर्फ 14 परिवारों को ही अन्यत्र पुनर्वास के लिए धनराशि दी गई है। शेष 134 परिवार आज भी डर के साए में दरारों से पटे घरों में रहने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान त्रिलोक सिंह रौतेला, दुर्गा सिंह रावत, दर्शन लाल, प्रकाश लाल, अनीता देवी, कपूर सिंह, पार्वती देवी, संजय सिंह, गिरीश, गोपाल सिंह, कीर्ति सिंह, अजीत सिंह, भीम सिंह, कमल सिंह, सुमन सिंह पंकज सिंह, धर्मपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, अनीता देवी, संगीता देवी आदि का कहना है कि केदारनाथ आपदा के बाद से हालात और भी खराब हो गए हैं। गांव के चारों तरफ भूस्खलन जोन सक्रिय हो रखा है, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि जिले में विस्थापन सूची में शामिल 23 गांवों में पहले चरण में 7 गांवों के 56 परिवारों का अन्यत्र पुनर्वास होना है। इसके लिए शासन से जरूरी धनराशि भी प्राप्त हो चुकी है। विस्थापन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
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