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चारधाम परियोजना संघर्ष समिति का क्रमिक धरना दूसरे दिन भी जारी
Updated Sun, 16 Dec 2018 09:55 PM IST
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रुद्रप्रयाग। चारधाम परियोजना संघर्ष समिति का भवन स्वामियों और व्यापारियों को मुआवजा देने और उनके विस्थापन की मांग को लेकर धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। उन्होंने सरकार पर प्रभावितों के साथ अन्याय करने का आरोप भी लगाया।
हनुमान मंदिर चौक पर धरना देते हुए आंदोलनकारियों ने मांगपूर्ति तक आंदोलनरत रहने की बात कही। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी व महामंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि प्रभावित व्यापारी व भवन स्वामी लंबे समय से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे है, लेकिन सरकार उनकी मांगों के निस्तारण के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। कहा कि वह परियोजना का विरोध नहीं कर रहे है। बल्कि प्रभावितों के हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि पहाड़ में छोटे बड़े कस्बों को उजाड़कर विकास संभव नहीं है। उन्होंने प्रभावित व्यापारियों के लिए नए बाजार विकसित करने की मांग भी की। व्यापार संघ अध्यक्ष कांता प्रसाद नौटियाल ने कहा कि चारधाम परियोजना से प्रभावित व्यापारियों/भवन स्वामियों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने के साथ ही उनके नुकसान का वास्तविक मूल्यांकन कर वर्तमान दर से चार गुना अधिक प्रतिकर दिया जाए। इस मौके पर केशव नौटियाल, अमित रतूडी, मगनानंद भट्ट, केपी ढौढिंयाल, राकेश मोहन बिष्ट, कृष्णानंद डिमरी, अजय, राजेश सेमवाल, श्यामलाल सुंदरियाल समेत भारी संख्या में प्रभावित भवन स्वामी व व्यापारी मौजूद थे।
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हनुमान मंदिर चौक पर धरना देते हुए आंदोलनकारियों ने मांगपूर्ति तक आंदोलनरत रहने की बात कही। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी व महामंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि प्रभावित व्यापारी व भवन स्वामी लंबे समय से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे है, लेकिन सरकार उनकी मांगों के निस्तारण के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है। कहा कि वह परियोजना का विरोध नहीं कर रहे है। बल्कि प्रभावितों के हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि पहाड़ में छोटे बड़े कस्बों को उजाड़कर विकास संभव नहीं है। उन्होंने प्रभावित व्यापारियों के लिए नए बाजार विकसित करने की मांग भी की। व्यापार संघ अध्यक्ष कांता प्रसाद नौटियाल ने कहा कि चारधाम परियोजना से प्रभावित व्यापारियों/भवन स्वामियों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने के साथ ही उनके नुकसान का वास्तविक मूल्यांकन कर वर्तमान दर से चार गुना अधिक प्रतिकर दिया जाए। इस मौके पर केशव नौटियाल, अमित रतूडी, मगनानंद भट्ट, केपी ढौढिंयाल, राकेश मोहन बिष्ट, कृष्णानंद डिमरी, अजय, राजेश सेमवाल, श्यामलाल सुंदरियाल समेत भारी संख्या में प्रभावित भवन स्वामी व व्यापारी मौजूद थे।
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