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राज्य की पहली व्यवसायिक ड्राइवर बनी नारायकोटी की ममता
Updated Thu, 23 Nov 2017 10:46 PM IST
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गुप्तकाशी। रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ ब्लाक के नारायणकोटी गांव की ममता पुजारी राज्य की पहली व्यावसायिक ड्राइवर बन गई हैं।
शिक्षक मंगल सिंह पुजारी व शिक्षिका पुष्पा देवी की तीन संतानों में सबसे छोटी पुत्री ममता को बचपन से ही कुछ अलग कर दिखाने का शौक था। प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही साइकिल की सवारी और जूनियर कक्षाओं में मोटर साइकिल व स्कूटर की सवारी में वह पारंगत हो गई थी। स्कूल की छुट्टी के बाद नारायणकोटी से गुप्तकाशी बाजार तक दो चक्कर स्कूटर के अनिवार्य थे। माता-पिता ने भी बेटी को उसकी रुचि के अनुरूप ही आगे बढ़ने का मौका दिया। जीआईसी गुप्तकाशी से इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद ममता देहरादून गई। यहां से उसने ड्राइविंग के शौक को करियर बनाने की ठानी। राजधानी वाहन चालक का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अब, परास्नातक पढ़ी यह बेटी उत्तराखंड की पहली व्यावसायिक ड्राइवर बन गई है। देहरादून में वह सहेली ट्रस्ट की कैब चला रही हैं। ममता का कहना है कि वे पहाड़ की महिलाओं को ड्राइविंग सिखाकर अपने एनजीओ की मदद से रोजगार के लिए प्रयास करेगी। इस बेटी के माता-पिता ने बताया कि उन्हें अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व है। एआरटीओ पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि व्यवसायिक ड्राइविंग के क्षेत्र में महिलाओं की मौजूदगी सराहनीय है।
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शिक्षक मंगल सिंह पुजारी व शिक्षिका पुष्पा देवी की तीन संतानों में सबसे छोटी पुत्री ममता को बचपन से ही कुछ अलग कर दिखाने का शौक था। प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही साइकिल की सवारी और जूनियर कक्षाओं में मोटर साइकिल व स्कूटर की सवारी में वह पारंगत हो गई थी। स्कूल की छुट्टी के बाद नारायणकोटी से गुप्तकाशी बाजार तक दो चक्कर स्कूटर के अनिवार्य थे। माता-पिता ने भी बेटी को उसकी रुचि के अनुरूप ही आगे बढ़ने का मौका दिया। जीआईसी गुप्तकाशी से इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद ममता देहरादून गई। यहां से उसने ड्राइविंग के शौक को करियर बनाने की ठानी। राजधानी वाहन चालक का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अब, परास्नातक पढ़ी यह बेटी उत्तराखंड की पहली व्यावसायिक ड्राइवर बन गई है। देहरादून में वह सहेली ट्रस्ट की कैब चला रही हैं। ममता का कहना है कि वे पहाड़ की महिलाओं को ड्राइविंग सिखाकर अपने एनजीओ की मदद से रोजगार के लिए प्रयास करेगी। इस बेटी के माता-पिता ने बताया कि उन्हें अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व है। एआरटीओ पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि व्यवसायिक ड्राइविंग के क्षेत्र में महिलाओं की मौजूदगी सराहनीय है।